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रिक्शा चलाया, सब्जी बेची, अब इसके स्टार्टअप में काम करते हैं IIT-IIM वाले!

ड्राइवर तक को 50 हजार सैलरी...12वीं पास का कमाल सुन उछल पड़ेंगे!

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Used to pull Rickshaw now IIT-IIM graduates work for him Bihar Startup
दिलखुश कुमार ने बिहार में शुरू किया स्टार्टअप. (फोटो- फेसबुक)
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प्रशांत सिंह
6 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 6 अप्रैल 2023, 01:35 PM IST)
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स्टार्टअप का नाम तो हम सबने सुना होगा. युवाओं में इसका अच्छा खासा क्रेज है. मतलब, दोस्त का प्लेसमेंट न हो तो ‘स्टार्टअप’. नौकरी में मजा न आए तो ‘स्टार्टअप’. लेकिन कभी-कभी स्टार्टअप बनाकर आपका दोस्त मिर्जापुर वेब सीरीज वाले गुड्डू भैया वाले मोड में आ जाता है. “स्टार्टअप शुरू तो मजबूरी में किए थे, अब मज़ा आ रहा है”. स्टार्टअप ‘आसमान की ऊंचाइयों’ में तब पहुंच जाता है, जब आपका साथी IIT-IIM वाले लोगों को नौकरी पर रखने लगे और खुद 12वीं तक पढ़ा हो. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के रहने वाले दिलखुश कुमार की.

दिलखुश कुमार करोड़ों रुपये वाले एक स्टार्टअप के CEO हैं. स्टार्टअप का नाम है रोडबेज़ (RodBez). नाम से तो ये स्टार्टअप Uber या Ola की तरह लगता है. लेकिन नहीं, दिलकुश का आइडिया कुछ अलग था. RodBez एक डेटाबेस कंपनी है. कंपनी डेटा के मदद से कस्टमर्स को टैक्सी ड्राइवर से जोड़ती है. इस सर्विस के जरिए उन्हें 50 किलोमीटर से ज्यादा के ट्रैवेल के लिए टैक्सी मिलती है.

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GNTTV में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले दिलखुश हमेशा से बिहार में एक टैक्सी सर्विस शुरू करना चाहते थे. लेकिन घर पर आर्थिक तंगी के कारण 12वीं तक पढ़ाई की और खुद टैक्सी चलाने लगे. इतना ही नहीं, दिलखुश ने पटना में सब्जी बेचने का काम भी किया. गार्ड की नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया, उसमें भी नहीं चुने गए. यहां तक दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा भी चलाया.

कैसे शुरू हुआ स्टार्टअप?

दिलखुश ने RodBez की शुरुआत एक सेकेंड हैंड टाटा नैनो के साथ की. 6-7 महीने में स्टार्टअप चल निकला. दिलखुश की टीम को 4 करोड़ रुपये की फंडिंग मिल गई. आज आलम ये है कि कंपनी पटना से बिहार के हर गांव तक टैक्सी सर्विस दे रही है. सबसे खास बात, 12वीं तक पढ़े दिलखुश के स्टार्टअप में IIT-IIM से पढ़ने वाले लोग काम कर रहें हैं.

बाकी स्टार्टअप्स के मुकाबले दिलखुश अपने ड्राइवर्स को कॉम्पिटिटिव सैलरी भी देते हैं. RodBez के ड्राइवर्स को हर महीने 50 से 60 हजार रुपये सैलरी मिलती है. वैसे आपका स्टार्टअप कल्चर को लेकर क्या मानना है? हमें कॉमेंट करके बताइए और ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहिए दी लल्लनटॉप.

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