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अल्पसंख्यकों को मिलने वाली MANF फेलोशिप छह महीने से अटकी, छात्रों ने भेदभाव का आरोप लगाया

UGC ने 1 जनवरी 2023 को फेलोशिप बढ़ाने के निर्देश दिए थे, लेकिन MANF फेलोशिप में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई. कई छात्रों को छह-छह महीने से नहीं मिला फेलोशिप का पैसा.

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9 जनवरी 2024 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2024, 09:28 PM IST)
manf scholars demand hike in fellowship discontinued by government
बीजेपी की केंद्र सरकार ने दिसंबर 2022 में लोकसभा को बताया था कि MANF योजना को बंद किया जा रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)
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मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप (MANF). देश की लगभग 30 यूनिवर्सिटीज़ में दी जाने वाली इस फेलोशिप से जुड़े रिसर्चर्स और डॉक्टरेट स्टूडेंट्स ने अपनी फेलोशिप बढ़ाने के लिए मंत्रालय को पत्र लिखा है. फेलोशिप केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (MoMA) के तहत दी जाती है. स्टूडेंट्स का ये भी कहना है कि उनकी MANF fellowship कई महीनों से उन्हें मिली नहीं है.

MANF से जुड़े स्टूडेंट्स ने फेलोशिप देने में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि अन्य सभी रिसर्च फेलोशिप्स की राशि हाल ही में बढ़ा दी गई. जबकि MANF से जुड़े छात्रों की फेलोशिप में कोई भी इज़ाफा नहीं किया गया है. द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में संसद में MANF फेलोशिप बंद करने के केंद्र सरकार के फैसले की घोषणा की थी. मंत्री ने कहा था कि MANF फेलोशिप कई अन्य फेलोशिप से ओवरलैप करती है, इसलिए इसे बंद कर दिया गया. AMU से एजुकेशन में Phd कर रहे सनी ने दी लल्लनटॉप को बताया,

“हमने मंत्रालय को कई पत्र लिखे. हमसे कहा गया कि जिन लोगों को फेलोशिप अभी तक मिल रही थी, उन्हें रिसर्च खत्म होने तक फेलोशिप मिलती रहेगी. मुझे 31 हजार रुपए फेलोशिप मिलती थी. 1 जनवरी को फेलोशिप बढ़ाकर 37 हजार कर दी गई. लेकिन मुझे अभी तक एक भी बार बढ़ी हुई फेलोशिप नहीं मिली है. इतना ही नहीं, सितंबर में आखिरी बार फेलोशिप आई थी. उसके बाद से ये अटकी हुई है. हमें अपनी रिसर्च और खाने-पीने तक में दिक्कतें आ रही हैं.”

सनी ने आगे बताया कि कुछ स्टूडेंट्स का MANF, नेशनल फेलोशिप ऑफ OBC और JRF तीनों में सेलेक्शन हुआ था. क्योंकि किसी एक को चुनना होता है, तो उन्होंने MANF को चुना. अब MANF को ही बंद कर दिया गया है. उन स्टूडेंट्स की क्या गलती है?

फेलोशिप को प्रोत्साहन दिया जाए

MANF फेलोशिप पर अपनी बात रखने के लिए रिसर्चर्स के संगठन ऑल इंडिया रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन (AIRSA) ने ईरानी को एक पत्र लिखा. संगठन ने कहा कि रिसर्च का काम देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए इसमें निवेश करना और फेलोशिप को प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण है. AIRSA ने अपने पत्र में लिखा,

“MANF फेलोशिप क्रीमीलेयर इनकम से नीचे आने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए एक वरदान की तरह थी. फेलोशिप के कारण उन्हें पैसों की चिंता किए बिना Phd और M Phil जैसी डिग्री हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था.”

MANF में 2019 में किया गया संशोधन

MANF से जुड़े रिसर्चर्स का कहना है कि फेलोशिप में आखिरी बार संशोधन 2019 में किया गया था. वहीं UGC और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा जनजातीय मामलों के मंत्रालय से जुड़ी अन्य फेलोशिप्स में साल 2023 में संशोधन किया गया था. रिसर्चर्स के मुताबिक UGC द्वारा दी जाने वाली जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) को 31 हजार रुपए से बढ़ाकर 37 हजार रुपए कर दिया गया था. वहीं सीनियर रिसर्च फेलोशिप (SRF) को 35 हजार रुपए से बढ़ाकर 42 हजार रुपए किया गया था. ये बदलाव 1 जनवरी 2023 से लागू हुए थे. सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू कश्मीर से सोशल वर्क में Phd कर रहे जसप्रीत ने दी लल्लनटॉप को बताया,

“फेलोशिप को UGC के नियमों के आधार पर बढ़ाया जाता है. सभी मंत्रालयों में ऐसा किया गया. लेकिन MoMA ने ऐसा नहीं किया. इसी मंत्रालय के तहत MANF फेलोशिप आती है. कानून के मुताबिक फेलोशिप हर महीने दी जाती है. लेकिन हमें MANF पिछले 6 महीने से नहीं मिली है. पिछली बार ये जून 2023 में आई थी. हम मंत्रालय को अपनी बात बताते हैं तो वो कहते हैं कि उनके पास फंड नहीं है. हमें सिर्फ आश्वासन दिया जाता है कि इस पर काम चल रहा है.”

जसप्रीत ने आगे बताया कि उनके ऊपर पिछले कई महीनों से प्रेशर है, वो अपने खर्चे नहीं चला पा रहे हैं. फेलोशिप ना आने से उनके ऊपर मेंटल प्रेशर भी काफी ज्यादा है.

बता दें कि MANF फेलोशिप जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, सहित 30 अन्य यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स को दी जाती है. रिसर्चर्स ने स्मृति ईरानी और उनके मंत्रालय को पत्र लिख इसे वितरित करने वाली नोडल एजेंसी से MANF को बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और मासिक आधार पर फेलोशिप देने का आग्रह किया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ उर्दू से Phd कर रहे मोहम्मद रिज़वान ने दी लल्लनटॉप को बताया,

“फेलोशिप हर महीने आनी चाहिए. लेकिन मुझे आखिरी बार फेलोशिप 3 अक्टूबर 2023 को मिली थी. कभी-कभी तो छह-छह महीने फेलोशिप नहीं आती. इसका कोई सेट पैटर्न नहीं है. हम लोगों का पोर्टल भी अभी तक अपडेट नहीं हुआ है. UGC की बाकी फेलोशिप का पोर्टल अपडेट हो चुका है. हमने मंत्रालय से भी संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन कोई भी जवाब नहीं मिला है. हमें इंतजार करने के लिए कह दिया जाता है.”

(ये भी पढ़ें: RAS MAINS की तारीख पर बवाल, उम्मीदवारों की मांग CM भजनलाल तक पहुंची)

2022 में बंद करने के आदेश दिए

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने दिसंबर 2022 में लोकसभा को बताया था कि MANF योजना को बंद किया जा रहा है. अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि ये फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि MANF फेलोशिप कई अन्य योजनाओं के साथ ओवरलैप हो रही थी.

फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में MANF के अलावा अल्पसंख्यकों के लिए कई अन्य योजनाओं के बजट में काफी कटौती की गई है. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए केंद्रीय बजट का अनुमान 2022-23 में लगभग 5 हजार करोड़ रुपए था. लेकिन इस बार मंत्रालय को 3 हजार करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं. ये पिछले साल की तुलना में 38 फीसदी कम है.

इस विषय पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का पक्ष आने पर खबर को संपादित किया जाएगा.

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