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'कोई भगवान ब्राह्मण नहीं, शिवजी भी दलित हैं'- JNU VC का बयान

JNU VC ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए सभी महिलाओं को शूद्र बताया और उन्हें समान अधिकार देने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात भी कही.

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23 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 23 अगस्त 2022, 08:37 PM IST)
JNU VC
JNU वीसी शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित (फोटो- आज तक)
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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की VC शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने एक कार्यक्रम में कहा कि कोई भी हिंदू देवी-देवता ऊंची जाति के नहीं हो सकते. भगवान शिव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वो श्मशान में बैठते हैं. ब्राह्मण कभी श्मशान में नहीं बैठ सकते हैं. VC ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए सभी महिलाओं को शूद्र बताया और उन्हें समान अधिकार देने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात भी कही.

डॉ. अम्बेडकर पर लेक्चर में बोल रही थीं VC

 JNU VC ने ये सारी बातें एक लेक्चर सीरीज के दौरान बोलीं. वो डॉ. भीमराव अंबेडकर लेक्चर सीरीज में "डॉ. बीआर अंबेडकर थॉट्स ऑन जेंडर जस्टिस: डिकोडिंग द यूनिफॉर्म सिविल कोड'' टॉपिक पर बोल रही थीं. उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी में जल्द ही 'कुलपति' की जगह 'कुलगुरू' शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है. 

राजस्थान के जालोर में 9 साल के दलित छात्र की शिक्षक की पिटाई से मौत के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की जाति पर बयान दिया. उन्होंने कहा, 

  देवताओं की उत्पत्ति को मानव शास्त्र से जानना चाहिये. कोई भी देवता ब्राह्मण जाति के नहीं हैं. सबसे ऊंची जाति क्षत्रिय जाति है. यहां तक भगवान शिव भी SC/ST जाति के हैं, क्योंकि वो सांप लपेटे हुये हैं और बहुत कम कपड़े पहनते हैं. भगवान शिव शमशान में बैठते हैं, मुझे नहीं लगता की कोई भी ब्राह्मण शमशान में बैठता होगा.

उन्होंने आगे कहा कि लक्ष्मी, शक्ति और जगन्नाथ जैसे कोई भी देवता ऊंची जाति से नहीं आते हैं. यहां तक जगन्नाथ भगवान भी आदिवासी मूल के हैं. वीसी ने कहा,

ना जाने क्यों हम इस भेदभाव को जारी रखे हुये हैं. हमें बाबा साहेब के विचारों पर फिर से विचार करना चाहिये. आधुनिक भारत का कोई नेता नहीं है जो इतना महान विचारक था.

लेक्चर के दौरान JNU VC ने महिलाओं को समान अधिकार और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर भी टिप्पणी की. यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,

डॉ. अंबेडकर इसे लागू करना चाहते थे. गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है, जो कि पुर्तगालियों ने लागू किया था. इसलिये वहां हिंदू, क्रिश्चियन, इस्लाम और बौद्ध सभी ने इसे स्वीकर किया है. तो ऐसा देश में क्यों नहीं किया जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि जब तक हमारे पास समाजिक लोकतंत्र नहीं होगा तब तक राजनीतिक लोकतंत्र नहीं हो सकता है. ये नहीं किया जा सकता कि अल्पसंख्यकों को सारे अधिकार दे दिये जायें और बहुसंख्यकों को वो अधिकार न मिलें. एक समय ऐसा आएगा कि ये सब आपको उल्टा पड़ जाएगा और आप उसे संभाल नहीं पाएंगे. 

महिलाओं पर बोलते हुये JNU वीसी ने कहा कि मनुस्मृति में सभी महिलाओं को शूद्र का दर्जा दिया गया है. इसलिये कोई भी महिला ये दावा नहीं कर सकती की वो ब्राह्मण है या कुछ और है. JNU VC ने कहा,

 महिलाओं को उनकी जाति उनके पिता या पति से मिलती है. कोई महिला ये दावा नहीं कर सकती कि वो ब्राह्मण है या कुछ और है. 

 उन्होंने महिलाओं को रिजर्वेशन देने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि देश में आज 54 यूनिवर्सिटीज में सिर्फ 6 महिला वाइस चांसलर हैं, इसमें से केवल एक ही रिजर्व्ड कैटेगरी से हैं. JNU वीसी ने कहा कि जल्द ही यूनिवर्सिटी में 'कुलपति' को 'कुलगुरु' कहा जा सकता है. उनके अनुसार 14 सितंबर को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में वो ये प्रस्ताव सामने रखेंगी. 

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