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गुरुग्राम में DLF कॉलोनियों के हजारों घर टूटेंगे या सील होंगे: रिपोर्ट

अधिकारियों का अनुमान है कि इन आवासीय कॉलोनियों में लगभग 60 पर्सेंट प्लॉट्स सरकारी नियम-कायदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं.

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30 जून 2026 (पब्लिश्ड: 08:29 PM IST)
DLF Gurugram properties Illegal
डीएलएफ फेज-III सरकारी नियम-कायदों को तोड़ने में सबसे आगे है (फोटो क्रेडिट: India Today)
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गुरुग्राम के सबसे पॉश इलाके की हजारों प्रॉपर्टीज पर तलवार लटक गई है. DLF फेस-1 से लेकर फेस-5 तक की कॉलोनियों की इमारतों पर कार्रवाई हो सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इन कॉलोनियों की 4,500 से ज्यादा प्रॉपर्टीज को भवन निर्माण और जोनिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप में चिह्नित किया गया है. जल्दी ही यहां डिमॉलिशन और सीलिंग की कार्रवाई शुरू हो सकती है. 

द ट्रिब्यून ने बताया कि अधिकारियों का अनुमान है कि इन आवासीय कॉलोनियों में लगभग 60 पर्सेंट प्लॉट्स सरकारी नियम-कायदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) डिपार्टमेंट की तरफ से तैयार की गई सूची से पता चलता है कि नियम-कायदों के उल्लंघन का दायरा अब तक की गई सीलिंग की कार्रवाई से भी बड़ा है. इस लिस्ट में दो कैटेगरी के तहत संपत्तियों को चिह्नित किया गया है. सामान्य श्रेणी के प्लॉट्स और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित प्लॉट. दोनों को मिलाकर 4,500 से ज्यादा संपत्तियां है. 

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सबसे ज्यादा DLF फेज-3 में ‘कांड’ 

रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में शामिल DLF फेज-III सरकारी नियम-कायदों को तोड़ने में सबसे आगे है. इन सभी कॉलोनियों में नियमों के उल्लंघन के जितने मामले सामने आए हैं उनमें से करीब 60% अकेले DLF फेज-III के हैं. डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर (इंफोर्समेंट) की तरफ से सबसे ज्यादा तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई इसी इलाके में की गई है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कंस्ट्रक्शन ऑन स्टिल्ट में सबसे ज्यादा नियमों को तार-तार किया गया है. जनरल कैटेगरी की लिस्ट में बड़ी तादाद में ऐसे प्लॉट मिले हैं, जहां स्टिल्ट पार्किंग पर अवैध कमरे बना दिए गए हैं और कट-आउट को ढक दिया गया है. यही स्टिल्ट-प्लस-फोर (Stilt+4) कंस्ट्रक्शन अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे एक महत्वपूर्ण केस का अहम मुद्दा है. जिस जगह को पार्किंग के लिए खुला रखा जाना चाहिए, वहां कमरे, दुकान, ऑफिस या दूसरा निर्माण कर दिया जाए तो इसे स्टिल्ट पर निर्माण कहते हैं.

इसके अलावा इन प्लॉट्स में गैरकानूनी तरीके से होटल और गेस्ट हाउस भी चल रहे हैं.

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सैलून से लेकर पीजी तक खुले 

ईडब्ल्यूएस लिस्ट इससे भी भयावह सच्चाई बयान करती है. शहर के सबसे गरीब लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई इमारतों को पेइंग-गेस्ट में तब्दील कर दिया गया है. सेक्टर-20, 21, 35, 50, 52, 60, 64, 73, 75, 77, 78, 79 और 80 में पीजी, गेस्ट हाउस, होटल, क्लाउड किचन और सैलून में खोल दिए गए.

अब डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर (इंफोर्समेंट) ने कहा है कि नियम तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. सीलिंग अभियान 30 जून के बाद फिर से शुरू होगा.

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