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ITR फाइलिंग की ये 10 गलतियां फंसा देंगी

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि आयकर विभाग बैंकों, टीडीएस स्टेटमेंट, क्रेडिट कार्ड लेनदेन और अन्य रिपोर्टिंग स्रोतों से मिली जानकारी का मिलान करके रिटर्न की खामियों का पता लगा सकता है.

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24 जून 2026 (पब्लिश्ड: 07:11 PM IST)
income tax return mistakes
30 दिन में रिटर्न वेरीफाई करना जरूरी है (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)
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ITR फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है. 31 जुलाई रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख है. इनकम टैक्स की वेबसाइट (incometax.gov.in) के मुताबिक अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर चुके हैं. हर साल बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स कुछ आम लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं.

इस वजह से कई लोगों को नोटिस, जुर्माना या रिफंड मिलने में देरी की समस्या आती है. आइए जानते हैं कि टैक्सपेयर्स कौन सी 10 गलतियां करते हैं जो आगे चलकर आपके लिए मुश्किल पैदा कर सकती हैं.

सही फॉर्म न चुनना

आमतौर पर टैक्सपेयर्स पहली गलती ये करते हैं कि वे सही फॉर्म का चयन नहीं करते. अगर कोई टैक्सपेयर अपनी कमाई के हिसाब से सही ITR फॉर्म की जगह गलत फॉर्म दाखिल करता है, तो आयकर विभाग उसके आईटीआर को अमान्य घोषित कर सकता है. 

गलत फॉर्म के चयन से इनकम टैक्स रिटर्न को दोबारा भरना पड़ सकता है. इस वजह से आपको रिफंड मिलने में देरी हो सकती है. उदाहरण के लिए ITR-1 (सहज) उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिनकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है. इस कमाई का बड़ा जरिया सैलरी, घर का किराया वगैरा होते हैं.

कमाई छुपाना 

कई बार कुछ टैक्सपेयर्स अपनी कमाई छुपाते हैं. इसलिए ध्यान रहे कि सभी तरह की आय का जिक्र आईटीआर भरते समय करें. इनकम और कमाई की संपत्तियों की घोषणा करना न भूलें. अपनी इनकम को कम बताना आपको मुश्किल में डाल सकता है. 

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि आयकर विभाग बैंकों, टीडीएस स्टेटमेंट, क्रेडिट कार्ड लेनदेन और अन्य रिपोर्टिंग स्रोतों से मिली जानकारी का मिलान करके रिटर्न की खामियों का पता लगा सकता है.

गलत क्लेम करना

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 3 साल में बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों को आयकर विभाग ने नोटिस भेजे हैं. डिपार्मटमेंट ने साल 2025 में बड़ी तादाद में मैसेज भेजकर करदाताओं से अपने 2024-25 के रिटर्न को रिवाइज करने की बात कही. विभाग ने पाया कि कई टैक्सपेयर्स ने मकान किराया भत्ता (HRA) क्लेम, दान की गलत रसीद लगाकर टैक्स रिफंड लिया.

AIS और फॉर्म 26 AS का मिलान जरूरी

फॉर्म 16, एआईएस और फॉर्म 26एएस के बीच फर्क होने से गलत रिपोर्टिंग हो सकती है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है.

ड्यू डेट के बाद रिटर्न दाखिल करने में देरी 

आमतौर पर नौकरी करने वाले लोग और पेंशन पाने वाले लोग आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म भरते हैं. इन फॉर्म को भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. इस ड्यू डेट के बाद रिटर्न दाखिल करना वित्तीय रूप से नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, जिन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है. 

रिटर्न वेरीफाई न करना

इनकम टैक्स रिटर्न भरने में कुछ लोग एक और बड़ी गलती कर देते हैं. वह है रिटर्न वेरीफाई न करना. टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल कहते हैं कि रिटर्न तभी मान्य होगा जब आप 30 दिन के भीतर आयकर रिटर्न का सत्यापन पूरा करेंगे. ऐसा न करने पर रिटर्न अमान्य घोषित हो सकता है.

गलत बैंक खाता देना

कई बार लोग रिटर्न भरते समय अपना बैंक खाता नंबर या IFSC कोड गलत भर देते हैं. ऐसा होने पर रिफंड अटक सकता है. विवरण भरते समय रीचेक करें कि जो खाता आप दे रहे हैं वह ठीक है कि नहीं.

ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में कंफ्यूजन 

इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कुछ लोग एक बड़ी गलती ये कर देते हैं कि वे गलत टैक्स रिजीम चुनते हैं. गलत टैक्स रिजीम चुनने से टैक्स देनदारी बढ़ सकती है. साथ ही टैक्स की बचत भी नहीं हो पाती है. रिटर्न दाखिल करने से पहले न्यू टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम में अपने टैक्स की गणना कर लें. कई बार बिना तुलना किए रिजीम चुनने से जरूरत से ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है.

कैपिटल गेन की जानकारी जरूर दें 

कई टैक्सपेयर्स को कैपिटल गेन का खुलासा करना बोझिल लगता है. कैपिटल गेन में शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी वगैरा बेचने से होने वाली कमाई को शामिल किया जाता है. इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी सही जानकारी देना बेहद जरूरी है. 

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान कोई जमीन-जायदाद बेची है जिससे आपको फायदा हुआ तो उसे रिटर्न में जरूर दिखाएं. कैपिटल गेन की जानकारी छिपाने पर आपका रिटर्न अमान्य हो सकता है. ये भी हो सकता है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको नोटिस भी भेज दे.

पुरानी कंपनी की इनकम न छुपाएं  

अगर आपने वित्तीय वर्ष के दौरान नौकरी बदली है तो मौजूदा कंपनी और पिछले कंपनी ये दोनों नियोक्ता अलग-अलग फॉर्म 16 जारी करेंगे. दोनों कंपनियों की तरफ से आपको कितनी सैलरी मिली और कितना टैक्स काटा गया इसकी जानकारी आईटीआर में देनी जरूरी है. आप पुरानी कंपनी से फॉर्म 16 मांग सकते हैं.

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