चांदी झूले पर बैठी है, अभी खरीदें या थोड़ा इंतजार करें?
चांदी की कीमतों में जनवरी 2025 में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला. MCX पर 8 जनवरी को भारी गिरावट के बाद 9 जनवरी को भाव में सुधार आया. विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल इंडेक्स रीबैलेंसिंग का असर दिखा है. HSBC का कहना है कि आगे चांदी में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और लंबी अवधि में दबाव रह सकता है.
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चांदी की कीमतों में भारी उठापटक देखने को मिल रही है. 8 जनवरी को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई थी. एमसीएक्स यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर एक ही दिन में चांदी लगभग 10,000 रुपये तक सस्ती हो गई थी. इसी तरह से 8 जनवरी को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर से 12,500 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,43,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई थी. लेकिन शुक्रवार 9 जनवरी को दोपहर 12 बजे के आसपास चांदी का भाव करीब 4,000 रुपये प्रति किलोग्राम चढ़ गया. MCX भारत का प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज है. इस एक्सचेंज में सोना, चांदी, कच्चा तेल जैसी कई कमोडिटी खरीदी और बेची जाती हैं. वहीं, वायदा यानी Futures Contract में किसी निश्चित तारीख पर कोई वस्तु कितने में खरीदी या बेची जाएगी यह तय होता है.
9 जनवरी को दोपहर एक बजे के आसपास चांदी मार्च वायदा 2 लाख 47 हजार रुपये के आसपास था. इससे पहले दिसंबर 2025 में चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला था. इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई में कमी के कारण चांदी की कीमत 83.60 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी. इसका असर भारत में भी कीमतों में देखने को मिला था. दिसंबर में चांदी मार्च वायदा का भाव 2 लाख 59 हजार 322 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इस तरह से देखें तो ऑलटाइम हाई से चांदी अब भी 12 हजार रुपये नीचे हैं.
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जानकारों का कहना है कि चांदी में इस समय तेज उतार-चढ़ाव के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं. दुबई के एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने लल्लनटॉप को बताया कि रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी में मुनाफावसूली देखने को मिली है. साल 2025 के अंत में चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. लेकिन पिछले कई कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. ऐसे में जैसे ही भाव ऊपर जाते हैं निवेशक प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर देते हैं. साथ ही इसके अलावा डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्का बदलाव भी चांदी के भाव को ऊपर-नीचे कर देता है.
वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक और प्रमुख कारण ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स जैसे बड़े इंडेक्स में सालाना वजन बदला जाना है. इन्हें फॉलो करने वाले बड़े फंड्स ने चांदी के कॉन्ट्रैक्ट बेचे, जिससे एक ही दिन में कीमतों पर तेज दबाव आया.
चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के मन में एक बात चल रही है कि आगे चलकर चांदी किस तरह का प्रदर्शन करने वाली है. एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया का कहना है कि चांदी के लिए 75 डॉलर प्रति औंस के आसपास मजबूत सपोर्ट है. अगर ये स्तर कायम रहता है, तो चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है. उनका कहना है कि निकट अवधि में चांदी का भाव फिर उछलकर 80 से 83 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है. भाटिया का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर जाते हैं, ऐसे में चांदी की चमक और बढ़ सकती है.
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सेबी रजिस्टर्ड इंटेलिसिस वेंचर्स (Intelisys Ventures) के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित जैन का कहना है घरेलू और वैश्विक स्तर पर निवेशक चांदी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि एमसीएक्स पर अगर चांदी की साप्ताहिक क्लोजिंग 2 लाख 47 हजार रुपये से नीचे रहती है, तो बाजार में शॉर्ट टर्म करेक्शन आ सकता है. उनका कहना है कि साप्ताहिक चार्ट बताते हैं कि बाजार ओवरबॉट जोन में है, यानी अचानक गिरावट की संभावना बनी हुई है. उनकी सलाह है कि निवेशकों को चांदी में गिरावट पर खरीदारी करना चाहिए. हालांकि लॉन्ग टर्म आउटलुक तेजी का ही है, लेकिन सही समय पर एंट्री लेने से निवेशकों को बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिल सकता है. वहीं, अमित जैन का कहना है कि जो निवेशक फिजिकल चांदी या सिल्वर ETF खरीदना चाहते हैं, उनके लिए मौजूदा स्तर पर थोड़ा इंतजार करना समझदारी हो सकती है.
इसके अलावा दुनिया के जाने-माने बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप ने भी चांदी को लेकर अपना आउटलुक जारी किया है. HSBC की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी में जो तेजी हाल के महीनों में दिखी है, उसकी रफ्तार अब धीमी पड़ सकती है. बैंक ने चेतावनी दी है कि ज्यादा उतार-चढ़ाव के बीच कीमतें ऐसे स्तर पर पहुंच गई हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं लगते. HSBC का पूरा नाम Hongkong and Shanghai Banking Corporation है.
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HSBC का कहना है कि साल 2026 में चांदी में उतार-चढ़ाव रहेगा. HSBC का कहना है कि 2026 में चांदी के सामने कई ऐसी चुनौतियां होंगी, जो इसकी लंबी अवधि की तेजी को सीमित कर सकती हैं. बैंक ने इंटनेशनल मार्केट में साल 2026 के लिए चांदी का औसत भाव अनुमान बढ़ाकर 68.25 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. लेकिन इसके बाद साल 2027 में चांदी का भाव गिरकर करीब 57 डॉलर प्रति औंस आने की संभावना जताई गई है. थोड़ा और ज्यादा अवधि के लिए साल 2029 तक चांदी का भाव और गिरकर लगभग 47 डॉलर प्रति औंस रह सकता है.
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HSBC ने भविष्य में चांदी की कीमतों में गिरावट के कारण भी गिनाए हैं. HSBC का कहना है कि भले ही कमजोर अमेरिकी डॉलर और बड़े निवेशकों की खरीद से फिलहाल सहारा मिल रहा हो, लेकिन उद्योगों में चांदी की मांग कमजोर पड़ रही है. चांदी का भाव बढ़ने से ज्वेलरी की खरीद भी सुस्त बनी हुई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी की सप्लाई लगातार बढ़ रही है. खदानों से उत्पादन बढ़ रहा है.साल 2025 में चांदी की 230 मिलियन औंस की कमी रही थी, लेकिन यह साल 2026 में घटकर 140 मिलियन औंस और 2027 में सिर्फ 59 मिलियन औंस रह सकती है.
पुणे स्थित कमोडिटी समाचार सिक्योरिटीज के को-फाउंडर एवं डायरेक्टर अंकित कपूर ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि कुछ समय के लिए चांदी में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है लेकिन चांदी के फंडामेंटल्स देखें तो अब भी तेजी के हैं. अगर सिल्वर ईटीएफ वगैरा की गह चांदी की हाजिर मांग बढ़ती है तो भाव में जोरदार तेज़ी देखने को मिल सकती है. इंटरनेशनल लेवल पर चांदी में 70 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट है और रेजिस्टेंस 84 डॉलर प्रति औंस का है. उनका कहना है कि अगर चांदी 84 डॉलर का स्तर तोड़ती है तो विदेशी बाजार में चांदी का भाव 113 डॉलर प्रति औंस तक छू सकता है. इस हिसाब से भारतीय बाजार (MCX) पर चांदी का भाव करीब 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार सकता है.
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