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RBI की मीटिंग हो रही थी, गवर्नर ने कहा - 'मैं रेपो रेट और बढ़ाने के पक्ष में हूं'

MPC की बैठक में छाया रहा महंगाई का मुद्दा

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23 जून 2022 (अपडेटेड: 23 जून 2022, 05:25 PM IST)
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शक्तिकांत दास ने कहा कि अगर मंहगाई पर काबू पाना है तो रेपो रेट में इजाफा करना पड़ेगा (फ़ाइल फोटो: आजतक)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 6 से 8 जून को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की मीटिंग का ब्यौरा मंगलवार, 21 जून को प्रकाशित किया गया. इस ब्यौरे में बताया गया है कि मीटिंग के दौरान MPC के सभी सदस्यों ने क्या-क्या कहा. मीटिंग में RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा,

अधिक महंगाई मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है. इसलिए महंगाई के मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रेपो रेट (Repo Rate) में वृद्धि करने का यही सही समय है. इसलिए मैं रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की वृद्धि के लिए वोट करता हूं. जो महंगाई को कम करने में मदद करेगा और आपूर्ति की समस्या को हल करने में भी सहायक साबित होगा.

'रूस-यूक्रेन युद्ध ने महंगाई बढ़ाई'

शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया में महंगाई को बढ़ाने का काम किया है और आने वाले समय में भी महंगाई से राहत मिलने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है. इसलिए मौद्रिक नीति में परिवर्तन करना जरूरी है. यह मांग को कम करने में मदद करेगा.

RBI गवर्नर ये भी कहा,

हमारे पास महंगाई पर काबू पाने और अर्थव्यवस्था को गति देने की दोहरी चुनौती है.

2023-24 में महंगाई 4 फीसदी होने का अनुमान

मीटिंग में मौजूद एमपीसी के अन्य सदस्यों ने भी कहा कि इस निर्णय से मांग निश्चित रुप से कम हो जाएगी और हो सकता है कि महंगाई वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही तक RBI की तय सीमा 6 फीसदी तक आ जाये. सदस्यों ने 2023-24 में महंगाई 4 फीसदी तक होने का भी अनुमान लगाया है. 

इसे अनुमान को लेकर RBI के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा,

वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए यह अनुमान बिल्कुल व्यवहारिक है. अभी कुछ समय के लिए दुनिया भर में हेडलाइन मुद्रास्फीति का स्तर उच्च बना रहेगा. जिसमें खाद्य पदार्थ और ईंधन को भी जोड़ा जाता है. इसलिए देखने वाली बात मुद्रास्फीति की दिशा क्या है? न कि उसका स्तर जो कि अभी कुछ समय के लिए ऊंचा बना रहेगा. यदि हेडलाइन मुद्रास्फीति वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कम होने लगती है, तो रेपो दर के परिणाम बेहतर हो सकेंगे.

'MPC की और बैठकें होनी चाहिए'

MPC के अन्य सदस्य जयंत वर्मा ने भी मीटिंग में अपने विचार रखे. वर्मा ने कहा,

अप्रैल और जून के बीच MPC ने रेपो रेट में 90 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है. लेकिन इसी अवधि के दौरान वित्त वर्ष 2022-23 के लिए रिजर्व बैंक की महंगाई का अनुमान 100 बेसिस पॉइंट से बढ़कर 5.7 फीसदी से 6.7 फीसदी हो गया है. इसलिए वास्तविक रेपो रेट कमोबेश वहीं बनी हुई है जितनी अप्रैल में थी.

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में महंगाई को कंट्रोल में लाने के लिए MPC की ऐसी और बैठकें होनी चाहिए.

एमपीसी के अप्रैल और मई के प्रस्तावों में मंहगाई के जोखिम का बार-बार जिक्र किया गया था. जहां तक अनुमानों से संकेत मिलता है 2022-23 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान महंगाई 6 फीसदी की सीमा से ऊपर रहने की संभावना है.

MPC की मीटिंग के अंत में ये बात भी स्पष्ट की गई कि महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट में जो बढ़ोतरी की गई है, उसका मकसद RBI द्वारा निर्धारित महंगाई की अधिकतम तय सीमा को 6 फीसदी तक लेकर आना है.


यह स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे रोहित ने लिखी.

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