RBI की मीटिंग हो रही थी, गवर्नर ने कहा - 'मैं रेपो रेट और बढ़ाने के पक्ष में हूं'
MPC की बैठक में छाया रहा महंगाई का मुद्दा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 6 से 8 जून को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की मीटिंग का ब्यौरा मंगलवार, 21 जून को प्रकाशित किया गया. इस ब्यौरे में बताया गया है कि मीटिंग के दौरान MPC के सभी सदस्यों ने क्या-क्या कहा. मीटिंग में RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा,
'रूस-यूक्रेन युद्ध ने महंगाई बढ़ाई'शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया में महंगाई को बढ़ाने का काम किया है और आने वाले समय में भी महंगाई से राहत मिलने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है. इसलिए मौद्रिक नीति में परिवर्तन करना जरूरी है. यह मांग को कम करने में मदद करेगा.
RBI गवर्नर ये भी कहा,
2023-24 में महंगाई 4 फीसदी होने का अनुमानमीटिंग में मौजूद एमपीसी के अन्य सदस्यों ने भी कहा कि इस निर्णय से मांग निश्चित रुप से कम हो जाएगी और हो सकता है कि महंगाई वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही तक RBI की तय सीमा 6 फीसदी तक आ जाये. सदस्यों ने 2023-24 में महंगाई 4 फीसदी तक होने का भी अनुमान लगाया है.
इसे अनुमान को लेकर RBI के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा,
'MPC की और बैठकें होनी चाहिए'MPC के अन्य सदस्य जयंत वर्मा ने भी मीटिंग में अपने विचार रखे. वर्मा ने कहा,
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में महंगाई को कंट्रोल में लाने के लिए MPC की ऐसी और बैठकें होनी चाहिए.
एमपीसी के अप्रैल और मई के प्रस्तावों में मंहगाई के जोखिम का बार-बार जिक्र किया गया था. जहां तक अनुमानों से संकेत मिलता है 2022-23 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान महंगाई 6 फीसदी की सीमा से ऊपर रहने की संभावना है.
MPC की मीटिंग के अंत में ये बात भी स्पष्ट की गई कि महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट में जो बढ़ोतरी की गई है, उसका मकसद RBI द्वारा निर्धारित महंगाई की अधिकतम तय सीमा को 6 फीसदी तक लेकर आना है.
यह स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे रोहित ने लिखी.

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