The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Business
  • Property deals under Rs 20 lakh? PAN may not be needed from April 1 2026

20 लाख से कम की प्रॉपर्टी डील पर पैन कार्ड की जरूरत खत्म, 1 अप्रैल से लागू होगा नया रूल

फिलहाल 10 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री में पैन नंबर देना जरूरी होता है

Advertisement
pic
27 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 27 फ़रवरी 2026, 10:39 PM IST)
PAN
फिलहाल 10 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री में पैन नंबर देना जरूरी होता है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
Quick AI Highlights
Click here to view more

प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए राहत की खबर है. आयकर विभाग ने नए नियमों का मसौदा पेश किया है. इसके तहत 20 लाख रुपये से कम कीमत की प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) की जरूरत खत्म हो जाएगी. अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप ले लेता है तो यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा. इंडिया टुडे की एक खबर में यह जानकारी दी गई है. यह कदम प्रस्तावित नए आयकर ढांचे के तहत जारी किए गए मसौदा इनकम टैक्स 2026 (Draft Income Tax Rules, 2026) का हिस्सा है.

लिमिट दोगुनी हो सकती है

मौजूदा समय में किसी भी तरह की प्रॉपर्टी जैसे कि मकान, फ्लैट या प्लॉट खरीदने या बेचते समय पैन नंबर का जिक्र करना अनिवार्य है. अभी नियम यह है कि अगर आप 10 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत में मकान, फ्लैट या प्लॉट खरीदते या बेचते हैं तो उस लेनदेन में पैन नंबर देना जरूरी होता है. ड्रॉफ्ट रूल्स के मुताबिक यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये हो सकती है. इसका मतलब है कि 20 लाख रुपये से कम की प्रॉपर्टी से जुड़े लेनदेन के लिए अब पैन देना अनिवार्य नहीं होगा. 

हालांकि, 20 लाख रुपये या उससे अधिक के सौदों के लिए पैन कार्ड की जानकारी पहले की तरह देनी जरूरी होगी.

ये भी पढ़े: प्रॉपर्टी से मोटा पैसा बनाना चाहते हैं तो दिल्ली-मुंबई का मोह छोड़िए, मालामाल करने वाले शहर ये हैं

सरकार यह प्रस्ताव क्यों दे रही है?

पिछले कुछ साल में प्रॉपर्टी के दाम काफी बढ़े हैं. ऐसे में सरकार चाहती है कि मौजूदा समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पैन कार्ड को लेकर जारी पुराने नियम में कुछ ढील दी जाए. रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार के इस फैसले से प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों को खासतौर से छोटे शहरों में संपत्ति खरीदने वालों को कुछ राहत मिल सकती है. इन लोगों को कागजी कार्रवाई से कुछ निजात मिल सकती है. 

टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्डा का कहना है कि पैन नंबर देने से इनकम टैक्स विभाग यह देख पाता है कि किसी व्यक्ति ने जो प्रॉपर्टी खरीदी है, वह उसकी घोषित आय (कमाई) के अनुसार है या नहीं. इससे बड़े प्रॉपर्टी से जुड़े सौदों पर नजर रखी जाती है और टैक्स चोरी की संभावना कम होती है .

वीडियो: शराब घोटाले से बरी होने के बाद रो पड़े केजरीवाल, मीडिया से क्या बोले?

Advertisement

Advertisement

()