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रेंट एग्रीमेंट 2025 आया, अब ना मनमानी डिपॉजिट चलेगा ना अचानक किराया बढ़ेगा

New rent rules 2025 के आते ही रीलबाज पूरा किराया देने को तैयार हो गए हैं. बोले तो सब अपने हिसाब से नियम-कानून बता रहे. 60 दिन में रेंट एग्रीमेंट ऑनलाइन (new Rent Agreement Act 2025) रजिस्टर करने से लेकर सिक्‍योरिटी डिपॉजिट पर खूब बातें हो रहीं. समझते हैं.

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The biggest change is that all rent agreements must now be digitally stamped and registered online within 60 days of signing.
New rent rules 2025 का पूरा गुणा-गणित
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सूर्यकांत मिश्रा
1 दिसंबर 2025 (Updated: 4 दिसंबर 2025, 08:03 AM IST)
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किरायेदार और मकान मालिक गणित की समांतर रेखाओं (Parallel lines) जैसे हैं. जो साथ-साथ में तो चलती है मगर मिलती नहीं, वैसे ही किरायेदार और मकान मालिक का मामला भी है. ये साथ में होते हुए भी कभी मिलते नहीं है. इनके बीच के झगड़े कभी खत्म ही नहीं होते हैं. बात कब खिड़की-दरवाजे से होते हुए कोरट पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता. इसका अंदाजा सरकार को भी है इसलिए वो रेंट एग्रीमेंट एक्ट 2025 लेकर (new Rent Agreement Act 2025) आई है. लेकिन इसके आते ही रीलबाज भी अपना भाड़ा वसूलने को तैयार हो गए हैं. फिजूल का ज्ञान बांट रहे हैं.

इसलिए हमें लगा कि New rent act 2025 पर बात कर लेना चाहिए. आपको जानना चाहिए कि क्या वाकई में रेंट एग्रीमेंट एक्ट 2025 मनमाने तरीके से किराये में बढ़ोतरी रोकेगा.क्या सिक्‍योरिटी मनी और कागज-पत्री का प्रोसेस आसान बनाएगा.

रेंट एग्रीमेंट ऐक्ट 2025

# 60 दिन का समय: एक मकान मालिक और किरायेदार के बीच की सबसे बड़ी कड़ी याने रेंट एग्रीमेंट के लिए 60 दिन की समय सीमा तय की गई है. फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल स्‍टैंप मारा हुआ और ऑनलाइन रजिस्‍टर्ड रेंट एग्रीमेंट हर किरायेदार के पास 60 दिनों के भीतर होना ही चाहिए. रजिस्‍ट्रेशन न कराने पर राज्‍यों के आधार पर ₹5,000 से शुरू होने वाला जुर्माना लग सकता है.

आगे बढ़ने से पहले एक बात और समझ लीजिए. रेंट एग्रीमेंट एक्ट 2025 जैसा कोई नोटिफिकेशन नहीं है. मॉडल टेनेंसी एक्ट (MTA) 2021 पर आधारित ये नियम कोई वैधानिक कानून नहीं हैं. चूंकि भूमि और किरायेदारी राज्य सूची की प्रविष्टि 18 के अंतर्गत आते हैं, इसलिए एमटीए केवल एक नमूना है, और प्रत्येक राज्य को अपने अधिकार क्षेत्र में इन नियमों को लागू करने के लिए नए कानून बनाने होंगे या अपने मौजूदा किराया नियंत्रण अधिनियमों में संशोधन करना होगा. सरकार ने राज्यों से अपने डिजिटल सिस्टम को अपग्रेड करने का भी अनुरोध किया है ताकि रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन वेरीफिकेशन जल्दी हो सके. माने मकान मालिक और किरायेदार को इसका फायदा तभी होगा जब राज्य सरकार इसको लागू करे. 

# सिक्‍योरिटी डिपॉजिट अपने आप में दर्द है. अभी तलक मकान मालिक अपने मन मुताबिक डिपॉजिट वसूलते थे मगर अब इसकी लिमिट भी तय की गई है. घर भाड़े पर दिया है तो 2 महीना और अगर कमर्शियल प्रॉपर्टी है तो 6 महीने का डिपॉजिट लिया जा सकता है. माने किराये से घर लेने के लिए अब लोन लेने की जरूरत नहीं होगी.

# सिक्‍योरिटी डिपॉजिट के बाद दूसरा दर्द है किराया बढ़ोतरी. मकान मालिक इसमें भी अपनी मर्जी चलाते हैं. लेकिन आगे से ऐसा नहीं होगा. किराया सिर्फ 12 महीने पूरे होने के बाद और मकान माल‍िक द्वारा 90 दिन का लिखित नोटिस दिए जाने पर ही बदला जा सकता है.  

ये भी पढ़ें: Rent Agreement 11 महीने का ही क्यों बनता है? आज सब किरायेदार कहेंगे 'अरे दादा!'

# मकान मालिक हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि कभी भी घर में घुस जाओगे. मतलब आप समझ ही गए होंगे. नया एक्ट इसमें किरायेदार की मदद करेगा. किराये के कमरे या घर में जांच के लिए आने से पहले मकान मालिक को कम से कम 24 घंटे पहले लिखित नोटिस देना होगा.  

# किराये के घर या प्रॉपर्टी में मरम्मत भी एक बड़ा कारण है विवाद का. नए एक्ट में इसके लिए भी प्रबंध है. अगर जरूरी मरम्‍मत की रिपोर्ट की जाती है तो मकान मालिक को कानूनी तौर पर 30 दिनों के अंदर उन्‍हें पूरा करना होगा. नहीं तो किरायेदार किराये से खर्च से काट सकता है.

# अभी के अभी घर खाली करो: ये अब नहीं हो पाएगा क्योंकि किराये से निकालने की इजाज़त सिर्फ़ रेंट ट्रिब्यूनल के आदेश से और सिर्फ़ कानूनी तौर पर बताए गए आधार पर ही की जाएगी, मकान मालिक अपनी मर्जी से ये काम नहीं होगा. रेंट ट्रिब्यूनल को फाइल करने की तारीख से 60 दिनों के अंदर किराएदारी के झगड़ों का फ़ैसला करना ज़रूरी है. इसमें किरायेदार को हटाने जैसा विवाद भी शामिल है.

# किरायेदारों को किराये की प्रॉपर्टी पर रहने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन करवाना होगा. मकान मालिक ने अगर ज़बरदस्ती निकाला, डराया या धमकाया,बिजली या पानी का कनेक्शन काटा तो कानूनी तौर पर सजा का प्रावधान है.

किराये के भुगतान के लिए भी एक्ट आया है. 5,000 से अधिक मासिक किराये के लिए डिजिटल पेमेंट करना होगा. किराया अगर 50 हजार रुपये प्रति माह ज्‍यादा है तो अब धारा 194-आईबी के तहत टीडीएस लागू होगा.

कुल जमा बात यह है कि रेंट एग्रीमेंट एक्ट 2025 किरायेदार और मकान मालिक के बीच के झगड़ों को कम करेगा. एक तरफ किरायेदार को सिक्‍योरिटी डिपॉजिट और किराये में बढ़ोतरी जैसी चीजों का सामना नहीं करना पड़ेगा तो मकान मालिक के पास डॉक्‍यूमेंट और डिजिटल रिकॉर्ड होंगे. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और आसाम जैसे राज्यों ने MTA 2021 को अपना लिया है. उम्मीद है बाकी राज्यों में भी ये लागू हो जाएगा. 

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