जंग और मौसम की वजह से बढ़ेगी महंगाई... RBI गर्वनर ने साफ-साफ 'भविष्य' बता दिया!
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सप्लाई चेन में आई रुकावटें इतनी जल्दी खत्म नहीं होंगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था यानी सामान को एक जगह से दूसरी जगह तक सही समय पर पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया सामान्य होने में समय लग सकता है. ऐसे में इसका असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर में तेल और गैस के कीमतों में उछाल और इनपुट लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में आरबीआई गर्वनर के हवाले से कहा गया है कि पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बढ़ने और इस साल अलनीनो की संभावना के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है. इनपुट लागत बढ़ने का मतलब जब किसी चीज को बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल, मजदूरी, बिजली, ईंधन और उसका ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है. वहीं, जब समुद्र का पानी ज्यादा गर्म होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. सूखा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
महंगाई के साथ ग्रोथ पर भी असरआरबीआई गवर्नर ने कहा कि सप्लाई चेन में आई रुकावटें इतनी जल्दी खत्म नहीं होंगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था यानी सामान को एक जगह से दूसरी जगह तक सही समय पर पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया सामान्य होने में समय लग सकता है. ऐसे में इसका असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ सकता है. इससे विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है. वहीं दूसरी ओर महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा.
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उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है और ऐसे वैश्विक झटकों को झेलने में सक्षम है. हालांकि, मौद्रिक नीति के नजरिए से यह एक ‘सप्लाई शॉक’ है यानी अचानक सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों की वजह से पैदा हुआ दबाव है. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर इस तरह के अस्थायी झटकों को हटा दिया जाए, तो महंगाई अभी काबू में है.
8 अप्रैल को हुई हालिया मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में आरबीआई ने नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर बरकरार रखा था. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत की आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) 2025-26 के 7.6% से घटकर 2026-27 में 6.9% हो जाएगी. वहीं दूसरी ओर, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर औसतन 4.6% रहने का अनुमान है.
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