भारत के रियल एस्टेट की हो गई चांदी, मिडिल ईस्ट संकट के बीच मिल गया बड़ा मौका
दुबई और खाड़ी देशों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई NRI और अमीर निवेशक भारत के रियल एस्टेट में निवेश के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित निवेश की जगह मानने लगे हैं. इससे मिडिल क्लास लोगों को काफी फायदा हो सकता है.

पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत को कई तरह के नुकसान झेलने पड़े हैं जैसे कि कच्चा तेल महंगा हुआ है. शिपिंग लागत बढ़ी है. इसके चलते सरकार को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़े हैं. लेकिन दूसरी तरफ यही संकट भारत के लिए रियल एस्टेट मार्केट के लिए एक मौका भी बनकर उभर रहा है. खासतौर पर दुबई और खाड़ी देशों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई NRI और अमीर निवेशक भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को निवेश के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित जगह मानने लगे हैं.
गोवा-अलीबाग जैसी जगहों में घर की डिमांड बढ़ी-इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के सेकंड होम मार्केट (second home market) में फिर से तेजी आ रही है. इसकी वजह दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट से निवेशक दूरी बना रहे हैं.
-रिपोर्ट में कहा गया है कि गोवा, अलीबाग (मुंबई), हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र और दक्षिण भारत के पर्यटन स्थलों जैसे बाजारों में मांग बढ़ रही है.
-इसकी वजह ये है कि विदेश में रहने वाले हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल (HNI) निवेश के लिए दुबई के बजाय भारत को तरजीह दे रहे हैं. HNI ऐसे लोग होते हैं जिनके पास ज्यादा पैसा और निवेश की क्षमता होती है.
-आमतौर पर जिनकी निवेश योग्य संपत्ति 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 8-9 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा होती है, उन्हें HNI की कैटेगरी में रखा जाता है. ये लोग अक्सर रियल एस्टेट, शेयर बाजार, स्टार्टअप्स, लग्जरी प्रॉपर्टी और बड़े बिजनेस निवेश में पैसा लगाते हैं.
ईरान-इजरायल युद्ध के बाद रियल एस्टेट मार्केट में तेजीनोएडा में अपनी कई हाउसिंग योजनाएं लॉन्च कर चुकी रियल एस्टेट कंपनी बूट्स रियलिटी (BOOTES Reality) के एमडी दीपक राय ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा, “ईरान-इजरायल युद्ध के बाद से एनआरआई और भारत के बड़े शहरों के निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय रियल एस्टेट में तेजी से बढ़ी है. पिछले कुछ महीनों में प्रॉपर्टी को लेकर बातचीत और पूछताछ में 30-40% तक उछाल देखा जा रहा है. भारतीय और विदेशी अब दुबई की तुलना में भारत को ज्यादा सुरक्षित और स्थिर निवेश विकल्प मान रहे हैं. अब भारतीय निवेशकों का भरोसा घरेलू रियल एस्टेट पर बढ़ रहा है. इसकी वजह है कि भारत में बेहतर रिटर्न, मजबूत मांग और लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावनाएं ज्यादा दिखाई दे रही हैं.”
दीपक राय आगे कहते हैं कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का फायदा भारत के रियल एस्टेट , स्टार्टअप और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मिल सकता है. उनका मानना है कि खाड़ी देशों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच एनआरआई और विदेशी निवेशक अब भारत को ज्यादा सुरक्षित और लंबे समय के निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं. इससे भारत में घरों और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग बढ़ सकती है. इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर में विदेशी फंडिंग को रफ्तार मिल सकती है.
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दुबई में प्रॉपर्टी की मांग घटीदुबई के रियल एस्टेट बाजार में कोरोना महामारी के बाद शुरू हुई तेजी के बाद पहली बार कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. एनडीटीवी में प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी वैलूस्ट्रैट के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि खरीदार घटने से मार्च में दुबई के हाउसिंग प्राइस इंडेक्स में 5.9% की गिरावट आई है. ईरान युद्ध के बाद से दुबई की प्रॉपर्टी की मांग में 30 परसेंट की गिरावट आई है.
दुबई के लैंड डिपार्टमेंट के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली रिसर्च कंपनी REIDIN के अनुसार, मार्च में दुबई में आवासीय घरों की बिक्री का मूल्य फरवरी 2026 की महीने की तुलना में लगभग 20 परसेंट घटकर 37.2 अरब दिरहम (करीब 97 हजार 500 करोड़ रुपये) रह गया. इस अवधि में लेन-देन की संख्या लगभग 16,000 से घटकर लगभग 13,000 रह गई.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के एक रिपोर्ट बताती है कि 18 मई को दुबई का शेयर बाजार लगातार 7 दिनों से गिर रहा है. इस दौरान रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई. कारोबार के दौरान वहां का सबसे बड़ा रियल एस्टेट समूह एम्मार प्रॉपर्टीज (Emaar Properties) का शेयर 3 परसेंट से ज्यादा लुढ़क गया.
मनीकंट्रोल की एक खबर में बताया गया है कि साल 2025 में दुबई के रियल एस्टेट बाजार में करीब 187 अरब डॉलर (करीब 18 लाख करोड़ रुपये) की रिकॉर्ड प्रॉपर्टी बिक्री हुई. इस दौरान 2.15 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी से जुड़े सौदे हुए. इसमें लग्जरी प्रॉपर्टी की बिक्री और भारतीयों समेत विदेशी निवेशकों की बढ़ती खरीदारी का बड़ा योगदान रहा. ब्रोकरों के मुताबिक दुनिया में तनाव या युद्ध के समय दुबई को निवेश के लिए सुरक्षित जगह माना जाता है. 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी बड़ी संख्या में रूसी और यूक्रेनी निवेशकों ने दुबई में प्रॉपर्टी खरीदी थी.
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इन शहरों में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ सकती है?बूट्स रियलटी के एमडी दीपक राय बताते हैं कि दुबई में रियल एस्टेट की मांग कमजोर पड़ने और मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता का फायदा भारत के कई बड़े शहरों को मिल सकता है. उनका कहना है कि दिल्ली एनसीआर खासतौर से NCR रीजन में नोएडा और गाजियाबाद को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि यहां एक्सप्रेसवे, मेट्रो और नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के चलते तेजी से हाउसिंग डिमांड बढ़ रही है. इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट और इसके आसपास (मथुरा- वृंदावन), बेंगलुरू , हैदराबाद और पुणे जैसे आईटी और स्टार्टअप हब शहर एनआरआई निवेशकों की पहली पसंद बन सकते हैं, क्योंकि यहां नौकरी, किराये और प्रॉपर्टी रिटर्न की संभावनाएं मजबूत हैं. वहीं, मुंबई के कुछ इलाकों में लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग की मांग बढ़ सकती है.
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भारत में घर खरीदारों को मिलेंगे मौके, रोजगार को भी बढ़ावानिवेश सलाहकार विनोद रावल ने लल्लनटॉप से कहा कि दुबई के रियल एस्टेट मार्केट का का रुख भारत की ओर मुड़ने पर इसका सीधा फायदा भारत के घर खरीदारों और रोजगार बाजार दोनों को मिल सकता है. रियल एस्टेट सेक्टर में नई पूंजी आने से कई शहरों में नए हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट लॉन्च हो सकते हैं. इससे घरों की सप्लाई बढ़ेगी और खरीदारों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे. बड़े डेवलपर्स बेहतर सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स लाएंगे, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी भी सुधर सकती है.
विनोद रावल आगे बताते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े निर्माण, सीमेंट, स्टील, इलेक्ट्रिकल, फर्नीचर, पेंट, ट्रांसपोर्ट और होम डेकोर जैसे कई उद्योगों में नौकरियां बढ़ सकती हैं. इस तरह से मिडिल ईस्ट संकट से पैदा हुई अनिश्चितता भारत के लिए प्रॉपर्टी बाजार में निवेश और रोजगार दोनों के लिहाज से अवसर में बदल सकती है.
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