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भारत की जीडीपी का नया आंकड़ा आ गया, क्या रही ग्रोथ रेट?

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले आर्थिक विकास दर धीमी पड़ी है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. दूसरी तिमाही में विकास दर 8.4% रही थी.

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27 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 10:54 PM IST)
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दूसरी तिमाही में विकास दर 8.4% रही थी (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही एक अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर धीमी होकर 7.8% रह गई. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (1 जुलाई 2025 से 30 सितंबर 2025) के मुकाबले तीसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर धीमी पड़ी है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. दूसरी तिमाही में विकास दर 8.4%  रही थी.

हालांकि, शुक्रवार 27 फरवरी को जारी जीडीपी आंकड़े नई सीरीज के हिसाब से जारी हुए हैं. सरकार ने इसके लिए 2022-23 को नया बेस ईयर (आधार वर्ष) बनाया है. पहले जीडीपी मापने के लिए आधार वर्ष 2011-12 का इस्तेमाल होता था. किसी देश की जीडीपी अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था का साइज बढ़ रहा है. वहीं अगर घटती है तो मतलब है कि आर्थिक गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं.

सरकारी आंकड़ों में वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी अनुमानों में भी संशोधन किया गया है. वित्त वर्ष 2025-2026 (FY26) के लिए पूरे साल के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया गया है, जबकि पहले यह 7.1% था. इस तरह से देखें तो पहले के मुकाबले अब अर्थव्यवस्था के ज्यादा तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. सांख्यिकी मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमानों में, सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.6% आंकी है, जो पहले अग्रिम अनुमान 7.4% से ज्यादा है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर शिवाजी लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं, “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10 परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ के अलावा, सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन भी मजबूत संकेत दे रहा है. 21 सितंबर से जीएसटी की दरों में बदलाव और तीसरी तिमाही में त्योहारी मांग बढ़ने से काफी लाभ मिला है. इसके अलावा कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए लगता है कि जीडीपी ग्रोथ रेट सरकार और आरबीआई के अनुमान के आसपास रहने का अनुमान है. "

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