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सरकार एथेनॉल वाला पेट्रोल तो ला रही, लेकिन फ्यूल स्टेशनों का क्या? हरदीप पुरी ने बताया

हरदीप पुरी ने कहा कि अगर यूरो VI मानक वाले वाहन को E100 के अनुरूप बनाया जा सकता है, तो इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने में भी मदद मिलेगी.

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4 जून 2026 (पब्लिश्ड: 10:09 PM IST)
Ethanol fuel station
एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल से बनाया जाता है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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विदेशों से कच्चा तेल खरीदने की मात्रा को कम करने के लिए सरकार दिल्ली-एनसीआर, पुणे, मुंबई और नागपुर में 50-100 एथेनॉल ईंधन स्टेशन शुरू कर रही है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 4 जून को ये जानकारी दी. हरदीप पुरी ने उम्मीद जताई कि साल 2026 के अंत तक एथेनॉल ईंधन स्टेशनों के इस नेटवर्क को बढ़ाकर 500 कर दिया जाएगा. 

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मारुति सुजुकी के एक कार्यक्रम में पेट्रोलियम मंत्री ने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि साल 2027 के अंत तक भारत में 5,000 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन होंगे.

तेल कंपनियों को 500 करोड़ रोजाना का नुकसान

हरदीप पुरी ने कहा कि अगर यूरो VI मानक वाले वाहन को E100 के अनुरूप बनाया जा सकता है, तो इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने में भी मदद मिलेगी. भारत हर साल विदेशों से करीब 120 अरब डॉलर (करीब 11.48 लाख करोड़ रुपये ) कीमत का कच्चा तेल खरीदता है. कच्चे तेल, गैस और एलपीजी की बिक्री पर हो रहे नुकसान के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अभी भी तेल कंपनियों को अच्छा-खासा नुकसान हो रहा है. सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन औसतन 500-550 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा है.”

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पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने से करीब 2 लाख करोड़ की बचत का दावा 

हरदीप पुरी ने कहा कि फिलहाल देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 परसेंट है. इससे 302 लाख टन कच्चा तेल विदेशों से मंगाने की जरूरत नहीं पड़ रही. इससे सरकार को 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. 

हरदीप पुरी ने बताया कि अगर बाजार में आने वाले आधे नए (दोपहिया और चार पहिया) वाहन फ्लेक्स-फ्यूल मानकों के अनुरूप हों, तो भारत 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग को पूरा कर सकता है. यह किसानों के लिए 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है. एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल से बनाया जाता है.

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद ऐसे ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है जो पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं.

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