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बजट 2026: सोना-चांदी ने आसमान फाड़ दिया, लेकिन सरकार झटका दे सकती है

सरकार सोना-चांदी के बढ़ते आयात को लेकर चिंतित है. उसके पास इसे नियंत्रित करने के कुछ सीमित उपाय हैं.

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सोने-चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. (फोटो क्रेडिट: PTI)
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प्रदीप यादव
29 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 29 जनवरी 2026, 07:17 PM IST)
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सोना-चांदी की कीमतें आसमान फाड़ चुकी हैं. इसके बावजूद इनके आयात में कमी नहीं आई है. बल्कि इन धातुओं का इम्पोर्ट लगातार बढ़ ही रहा है. ऐसे में आशंका है कि आगामी बजट में सरकार सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा दे.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी है. इसके मुताबिक सरकार सोना-चांदी के बढ़ते आयात को लेकर चिंतित है. लेकिन उसके पास इसे नियंत्रित करने के कुछ सीमित उपाय हैं. साल 2025 में सोने का आयात एक साल पहले की तुलना में 1.6% बढ़कर 58.9 अरब डॉलर (करीब 5 लाख 51 हजार 620 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया. इसी तरह से चांदी का आयात 44% उछलकर 9.2 अरब डॉलर पहुंच गया. भारतीय मुद्रा में ये रकम 84 हजार 600 करोड़ रुपये बनती है.

सोना-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ेगी?

रिकॉर्ड कीमतों की वजह से सोने के आयात की कुल वैल्यू तेजी से बढ़ सकती है, इसकी मात्रा भले ही न बढ़े. इससे व्यापार घाटा और रुपये की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी है. ट्रेड और उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार आने वाले हफ्तों में सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है. 

साल 2012 और साल 2013 में तेजी से गिरते रुपये को स्थिर करने के लिए सरकार ने सोने के आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की थी. उस समय तस्करी रोकने के मकसद से दोनों धातुओं पर आयात शुल्क 15% से घटाकर 6% कर दिया गया था. हाल ही में फिर रुपये के कमजोर होने से ट्रेडर्स को नई ड्यूटी बढ़ोतरी की आशंका है.

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सोने और चांदी के आयात पर ही निशाना क्यों?

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है. साथ ही दुनिया में सबसे ज्यादा चांदी की खपत भारत में ही होती है. लेकिन भारत में सोने की खानें बहुत कम हैं. जो हैं उनमें नाममात्र का खनन होता है. इसके चलते सोने की लगभग पूरी मांग आयात से पूरी होती है. इसी तरह चांदी की जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा विदेशों से आता है. पिछले साल भारत ने अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 10वां हिस्सा इन धातुओं के आयात पर खर्च किया है.

सोना मुख्य रूप से आभूषण और निवेश के लिए खरीदा जाता है. सरकार इस तरह की मांग को गैर-जरूरी मानती है. इसे कम करने के लिए वो कई बार आयात शुल्क बढ़ा चुकी है, ताकि खरीदारों के लिए यह महंगा हो सके. दिल्ली विश्वविद्यालय में माता सुंदरी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) सिद्धार्थ राठौर का कहना है कि सरकार अगर आयात शुल्क बढ़ाती है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे कि व्यापार घाटा कम करना, रुपये की गिरावट को थामना. इम्पोर्ट ड्यूटी सरकार के लिए टैक्स इकट्ठा करने का एक बड़ा जरिया भी है. कीमतें बढ़ने पर ड्यूटी से मिलने वाला राजस्व भी बढ़ सकता है. इससे राजकोषीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है.

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ड्यूटी बढ़ाने से सोने की कीमतों पर क्या असर होगा?

एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने बताया कि सोने पर आयात शुल्क (ड्यूटी) बढ़ने से आमतौर पर घरेलू बाजार में सोने की कीमतें और महंगी हो जाती हैं. इसका मतलब सोने की ज्वेलरी, सिक्के और गोल्ड बार खरीदना पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है. वहीं चांदी भी महंगी हो सकती है.

हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने कई बार आयात शुल्क बढ़ाकर सोना आयात कम करने की कोशिश की है, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली. अगस्त 2013 में जब आयात कर 2% से बढ़ाकर 10% किया गया, तब भी मांग स्थिर रही. साल 2006 की शुरुआत में सोने का भाव करीब 8,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था. 

फिलहाल वायदा बाजार में सोने के दाम 29 जनवरी को 1 लाख 80 हजार रुपये के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. इस वजह से जानकारों का कहना है कि 4-6 पर्सेंट की नई ड्यूटी बढ़ोतरी से खरीदारों पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना कम है.

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