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दवाओं से लेकर कारों तक, इंडिया-EU ट्रेड डील की वो बातें जो आपकी जेब पर डालेंगी सीधा असर

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर लिए हैं. दोनों पक्षों टैक्स में भारी कटौती और छूट देने पर सहमति जताई है. शराब से लेकर दवाओं तक के दाम घटेंगे.

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India EU Trade deal
भारत और EU ने FTA पर हस्ताक्षर कर लिए हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)
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प्रदीप यादव
27 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 01:46 PM IST)
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर लिए हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने टैक्स में भारी कटौती और छूट देने पर सहमति जताई है. यूरोपीय संघ का कहना है कि इस कदम से भारतीय बाज़ार में EU के निर्यात में काफी बढ़ोतरी होगी. ये डील काफी अहम है क्योंकि इसके लिए करीब 20 साल से प्रयास किये जा रहे हैं. यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है. EU के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत को निर्यात किए जाने वाले EU के 90% से ज़्यादा उत्पादों पर शुल्क या तो पूरी तरह हटाए जाएंगे या काफी कम किए जाएंगे. अनुमान है कि इस डील से 2032 तक भारत को EU का निर्यात दोगुना हो सकता है.

इस समझौते में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत को सहयोग देने का प्रावधान भी शामिल है.  इस डील से और रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. EU ने भारत को अगले दो सालों में 50 करोड़ यूरो (करीब 5500 करोड़ रुपये) की सहायता देने की घोषणा भी की है. इसका मकसद भारत  ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम कर सके और अपना फोकस ग्रीन एनर्जी पर बढ़ाए. अभी भारत और ईयू के बीच ट्रेड डील का पूरा ब्यौरा आना बाकी है लेकिन माना जा रहा है कि इस ट्रेड डील से दोनों देशों को काफी फायदा होगा. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर बताती है कि यूरोपीय संघ ने कई प्रमुख घोषणाएं की हैं. आइए इसका ब्यौरा जान लेते हैं

-बीयर पर टैरिफ घटाकर 50% किया जाएगा
-स्पिरिट्स (शराब) पर शुल्क घटाकर 40% किया जाएगा
-वाइन पर टैरिफ 20–30% तक कम किया जाएगा
-मोटर वाहनों पर शुल्क 110% से घटाकर 10% किया जाएगा. हालांकि सालाना 2.5 लाख वाहनों की तय सीमा (कोटा) लागू होगी
-भारत और EU भौगोलिक संकेतक (GI) पर एक अलग समझौते पर बातचीत कर रहे हैं
-ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर शुल्क पूरी तरह खत्म किया जाएगा
-फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पर शुल्क समाप्त किया जाएगा
-EU अपने सभी केमिकल उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा
-मशीनरी पर 44% तक के शुल्क को करीब- करीब खत्म किया जाएगा
-केमिकल्स पर 22% तक की ड्यूटी में बड़ी कटौती होगी
-दवाओं (फार्मास्यूटिकल्स) पर 11% तक के शुल्क घटाए जाएंगे
-एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर टैरिफ खत्म किया जाएगा
-भारत में EU के 90% से अधिक निर्यातित उत्पादों पर शुल्क खत्म या कम होंगे
-MSME/SME बिजनेसमैन के लिए अलग चैप्टर
-छोटे कारोबारों की मदद के लिए SME कॉन्टैक्ट पॉइंट्स

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU के बीच कितना  व्यापार?

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं (Goods) का कुल व्यापार लगभग 136.53 अरब डॉलर रहा. भारतीय करेंसी में आज की तारीख (27 जनवरी 2026 को) यह रकम करीब 12 लाख 53 हजार 737 करोड़ बनती है. इस दौरान भारत ने यूरोपीय संघ को भारतीय मुद्रा में करीब 6 लाख 96 हजार 636 करोड़ रुपये के अल्ले-पल्ले सामान बेचा. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईयू से 60.68 अरब डॉलर (5 लाख 57 हजार 304 करोड़ रुपये) का सामान खरीदा. इसी अवधि में भारत ने यूरोपीय संघ को जितना सामान बेचा, वह उससे खरीदे गए सामान (Goods) से 15.17 अरब डॉलर (1 लाख 39 हजार 277 रुपये) ज़्यादा था, यानी भारत को EU के साथ व्यापार में फायदे में रहा.

सेवाओं (Services) की बात करें तो  वित्त वर्ष 2023-2024 में भारत-EU सेवाओं का व्यापार 7 लाख 62 हजार 915 करोड़ रुपये रहा. इसमें टेलीकॉम, आईटी और बिज़नेस सर्विसेज जैसे क्षेत्र शामिल हैं. EU भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% हिस्सा रखता है. प्रस्तावित एफटीए के तहत आसान बाजार पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मौका बन सकता है. नया टैरिफ अमल में आने से वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, रेनो और स्टेलैंटिस जैसी यूरोपीय कार कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है और महंगी कारें भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं. कारों के अलावा, भारतीय कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर यूरोपीय संघ में फिलहाल करीब 10% शुल्क लगता है.

इन शुल्कों के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय निर्यातक यूरोप के कपड़ा और गारमेंट बाजार में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के साथ मुकाबले कर पाएंगे. इसके अलावा स्किल वर्कर्स की आवाजाही बढ़ेगी. एफटीए के तहत आईटी, इंजीनियरिंग और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को वीजा मिलना आसान हो सकता है. इसके अलावा सेवाओं के निर्यात में मामूली बढ़ोतरी भी भारत की ईयू से होने वाली कमाई को काफी बढ़ा सकती है

खेती -किसानी को कितना फायदा ?

कृषि क्षेत्र भारत-EU एफटीए का सबसे संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है और इसमें ज्यादा शुल्क कटौती की उम्मीद नहीं है. भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों ने ही घरेलू विरोध से बचने के लिए कृषि और डेयरी उत्पादों को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाया है. EU अधिकारियों ने पुष्टि की है कि डेयरी उत्पाद और चीनी इस समझौते से बाहर रखे गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, EU ने बीफ, चीनी और चावल को सुरक्षित रखा है, जबकि भारत ने भी कृषि और डेयरी उत्पादों पर ऊंचे शुल्क बनाए रखे हैं.

इसका मतलब है कि इस समझौते के तहत कृषि उत्पादों की कीमतों या आयात में आम लोगों को कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. इसके अलावा भारत से विदेशी निर्यात होनी वाली  कॉफी, चाय, मसाले, मछली और फल वगैरह का एक्सपोर्ट और बढ़ सकता है. इसके अलावा GI यानी Geographical Indications भी एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. EU अपने वाइन, Cheese और दूसरे खाने-पीने की चीजों के जीआई को लेकर सुरक्षा चाहता रहा है. इसी तरह से भारत ने भी इस पर सतर्क रुख अपनाते हुए अपनी GI जैसे दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल, बनारसी साड़ियां और कोल्हापुरी चप्पल जैसे उत्पादों को लेकर किस हद तक और कैसी सुरक्षा दी जाए, इस पर भारत और EU के बीच कई सालों से बातचीत चल रही है.

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