The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Business
  • Earn Rs 6 lakh or Rs 12 lakh? See how your gratuity changes with 50% basic pay

बेसिक पे 50% होने से आपकी ग्रेच्युटी कितनी बढ़ेगी?

रिवाइज वेज के मुताबिक बेसिक पे कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए. लेकिन कई कंपनियां बेसिक कम रखते हुए भत्तों को बढ़ा देती हैं. आमतौर पर कंपनियां बेसिक पे सैलरी का 30-40 परसेंट तक रखती हैं. बेसिक पे में किसी तरह की कम-बेशी आपकी भविष्य के फायदे नुकसान कम कर देती है.

Advertisement
pic
14 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 08:39 PM IST)
Gratuity
आमतौर पर कंपनियां बेसिक पे सैलरी का 30-40 परसेंट तक रखती हैं (फोटो क्रेडिट: Business today)
Quick AI Highlights
Click here to view more

आपकी सैलरी स्ट्रक्चर में एक छोटा सा बदलाव आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा फर्क ला सकता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि नए बेसिक पे रूल लागू होने से ग्रेच्युटी पर साफ बदलाव देखने को मिल सकता है. आइए जानते हैं नए नियम लागू होने से आपकी ग्रेच्युटी पर क्या असर होगा?

50% बेसिक पे नियम क्या है?

रिवाइज वेज के मुताबिक बेसिक पे कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए. लेकिन कई कंपनियां बेसिक कम रखते हुए भत्तों को बढ़ा देती हैं. आमतौर पर कंपनियां बेसिक पे सैलरी का 30-40 परसेंट तक रखती हैं. बेसिक पे में किसी तरह की कम-बेशी आपकी भविष्य के फायदे-नुकसान कम कर देती है. रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेच्युटी की गणना मूल वेतन पर की जाती है.

अगर आप 6 लाख रुपये कमाते हैं तो क्या होगा?

जो व्यक्ति सालाना 6 लाख रुपये कमाता है, उसके लिए यह बदलाव काफी मामूली है. मान लीजिए कंपनी की बेसिक सैलरी कुल वेतन का 40% होती है. 50,000 रुपये की मासिक सैलरी में बेसिक करीब 20,000 रुपये बनता है. इस आधार पर ग्रेच्युटी का सालाना योगदान लगभग 13,846 रुपये बनता है. अगर बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 50% कर दिया जाए, यानी 25,000 रुपये प्रति माह, तो ग्रेच्युटी बढ़कर करीब 17,308 रुपये सालाना हो जाती है. कुल मिलाकर लगभग 3,462 हर साल का इजाफा होता है. यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं मानी जाएगी. सीधे शब्दों में कहें तो यह बदलाव धीरे-धीरे असर दिखाता है और शॉर्ट टर्म में ज्यादा महसूस नहीं होता.

अगर आप 12 लाख कमाते हैं तब क्या गणित होगा?

12 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्ति के लिए इस बदलाव का असर 6 लाख के मुकाबले कुछ ज्यादा होगा. मौजूदा व्यवस्था में, जहां आमतौर पर बेसिक सैलरी कुल वेतन का 40% के आसपास होती है. 1 लाख रुपये की मासिक सैलरी में बेसिक करीब 40,000 रुपये बैठेगी. इस आधार पर ग्रेच्युटी का सालाना योगदान लगभग 23,076 रुपये बनता है. अगर बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 50% कर दिया जाए, यानी 50,000 रुपये प्रति माह, तो ग्रेच्युटी बढ़कर करीब 28,846 रुपये सालाना हो जाती है. इसका मतलब है कि कुल मिलाकर लगभग 5,770 रुपये प्रति साल की बढ़ोतरी होती है, जो कि बहुत ज्यादा नहीं मानी जाएगी.

ये भी पढ़ें: पहले से अप्रूव्ड लोन लेने जा रहे हैं? ये काम की जानकारी मुसीबत से बचा लेगी

ज्यादा सैलरी वाले लोग इस अंतर को ज्यादा महसूस क्यों करते हैं?

इसका कारण बहुत साफ है. आपका मूल वेतन जितना कम होगा, उसे 50% तक बढ़ाने पर एडजस्टमेंट उतना ही अधिक होगा. इसलिए पहले से तय किया गया मूल वेतन जितना कम होगा, उसका असर उतना ही ज्यादा होगा. यही कारण है कि मोटी सैलरी पाने वाले, जिनके भत्ते आमतौर पर अधिक होते हैं, उन्हें यह बदलाव अधिक साफ तरीके से देखने को मिल सकता है.

लंबी अवधि में कितना फायदा-नुकसान ?

इस बदलाव का असली फायदा लंबे समय में दिखता है. अभी भले ही सैलरी में बदलाव छोटा लगे, लेकिन समय के साथ इसका असर बढ़ता जाता है. अगर कोई कर्मचारी 10 साल तक कंपनी में काम करता है, तो कंपनी को उसकी ग्रेच्युटी के लिए लगभग 25% ज्यादा राशि अपने खातों में अलग से रखनी पड़ती है. 

सरल शब्दों में, आज बेसिक सैलरी जितनी ज्यादा होगी, भविष्य में मिलने वाली ग्रेच्युटी उतनी ही बड़ी होगी. आने वाले दिनों में, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे फायदों में अधिक योगदान से आपकी टेक-होम सैलरी में थोड़ी गिरावट आ सकती है. लेकिन इसके बदले में आपको भविष्य में अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी. हालांकि कर्मचारियों को शायद इसकी आदत पड़ने में थोड़ा समय लगे, लेकिन लंबी अवधि में ऐसा करना फायदेमंद होगा. 

वीडियो: नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट को लेकर अखिलेश यादव ने योगी सरकार से क्या कहा?

Advertisement

Advertisement

()