IT, हेल्थ से लेकर एग्रीकल्चर तक, Budget 2026 में किस सेक्टर को क्या मिला?
Budget 2026 में किस सेक्टर को क्या मिला? जानिए हेल्थ, एग्रीकल्चर, IT, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर, से लेकर रेलवे, शिक्षा और टूरिज्म सेक्टर के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बड़े ऐलान.

केंद्रीय बजट 2026 आ चुका है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को सदन के पटल पर देश के सामने बजट पेश किया. बजट में छोटी-बड़ी कई घोषणाएं हुईं. स्वास्थ्य, एग्रीकल्चर, IT से लेकर अलग-अलग सेक्टर्स के लिए वित्त मंत्री ने कई ऐलान किए. आइए जानते हैं सेक्टर वाइज कि किस क्षेत्र को बजट में क्या मिला.
स्वास्थ्यबजट में सरकार ने हेल्थ सेक्टर पर फोकस करने की कोशिश की है. भारत को दवाइयों का मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए बायोफार्मा SHAKTI स्कीम की घोषणा की गई है. वित्त मंत्री ने बताया कि इसके तहत सरकार अगले 5 साल में 10,000 करोड़ निवेश करेगी. इससे भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में डेवलप किया जाएगा. साथ ही 3 नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) बनाने की घोषणा की गई है. वहीं मौजूदा 7 संस्थानों को अपग्रेड करके एक बायोफार्मा-केंद्रित नेटवर्क बनाने का ऐलान किया गया है.
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्सबजट में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी अहम घोषणाएं हुई हैं. वित्त मंत्री ने India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 नाम का नया प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की है. इसके तहत भारत अपनी खुद की चिप‑मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन बनाने और उसे मजबूत करने का काम करेगा. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार इससे जुड़ी स्कीम पर 40,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
वित्त मंत्री ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है. इनमें रेयर अर्थ मिनरल के खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा.
टेक्सटाइलवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए भी कुछ घोषणाएं की हैं. उन्होंने बताया कि सिल्क, वूलेन और जूट जैसे नेचुरल फाइबर और ऑर्टिफिशियल फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना लॉन्च की जाएगी. इसके अलावा चैलेंजिंग मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाने की घोषणा की गई है. साथ ही खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की घोषणा की गई है.
MSMEबजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro, Small and Medium Enterprises, MSMEs) को लेकर भी अहम घोषणाएं हुई हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये का डेडिकेटेड SME विकास फंड बनाने का ऐलान किया है. इसके तहत छोटे और मझौले उद्योगों को अपना बिजनेस बढ़ाने, नई टेक्नोलॉजी अपनाने में सरकार मदद करेगी. साथ ही आत्मनिर्भर भारत फंड में 2000 करोड़ के निवेश की घोषणा की गई है. इसके तहत छोटे बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके अलावा TReDS के ज़रिए 7 लाख करोड़ रुपये तक फंडिंग उपलब्ध कराने का ऐलान किया गया है. इसके जरिए छोटे बिजनेस बड़ी कंपनियों से जल्दी पेमेंट निकलवा सकेंगे. साथ ही सरकार ने छोटे शहरों में ‘कॉरपोरेट मित्र’ कैडर तैनात करेगी. ये लोग छोटे बिजनेस को गाइड करेंगे और सरकारी कागजात से जुड़े कामों में बिजनेस की सहायता करेंगे.
इंफ्रास्ट्रक्टरबजट में इंफ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए भी घोषणाएं की गई हैं. वित्त मंत्री ने बताया कि फाइनेंसियल ईयर 2026-27 में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा. इसके अलावा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन फेज के दौरान जोखिम को कम करने और प्राइवेट डेवलपर्स का भरोसा मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड स्थापित करेगी.
इसके अलावा वित्त मंत्री ने पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है. अगले 5 साल में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) बनाए जाएंगे. वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम बनाने की घोषणा भी की गई है.
रेलरेलवे सेक्टर को लेकर भी बजट में बड़ी घोषणा हुई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने यानी 7 नई बुलेट ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है. ये ट्रेनें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच चलेंगी. मालूम हो कि दिल्ली से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर पहले से काम चल रहा है. प्रोजेक्ट का काफी हिस्सा बनकर भी तैयार हो चुका है.
शिक्षावित्त मंत्री ने प्रमुख इंडस्ट्रीयल और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने की घोषणा की है. यानी जहां फैक्ट्रियां और लॉजिस्टिक हब हैं, वहीं उनके आस‑पास बड़े एजुकेशन टाउन बसाए जाएंगे. इसके अलावा वित्त मंत्री ने हर जिले में लड़कियों के लिए 1 हॉस्टल बनाने की घोषणा की है.
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टूरिज्मवित्त मंत्री ने बजट में बताया है कि नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी में अपग्रेड किया जाएगा. इसके अलावा वित्त मंत्री ने 10,000 टूरिस्ट गाइडों को अपस्किल करने की पायलट योजना का ऐलान किया है. यह IIM की मदद से किया जाएगा. इसके तहत 20 बड़े पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों को ट्रेनिंग दी जाएगी. वित्त मंत्री ने National Destination Digital Knowledge Grid बनाने की भी घोषणा की है. इसके तहत भारत के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन की जाएगी. इसमें हर महत्वपूर्ण जगह का डिजिटल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो, इतिहास, मैप, जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध होगी. इसके अलावा वित्त मंत्री ने लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 पुरातात्विक स्थलों को कल्चरल हब के रूप में विकसित करने का ऐलान किया है.
एग्रीकल्चरवित्त मंत्री ने एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए बजट में जो घोषणाएं की हैं, उनके मुताबिक किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई पहल की जाएगी. इसके अलावा 500 तालाब, झीलें और अमृत सरोवर को एक साथ एक योजना के तहत विकसित करने का ऐलान किया गया है. जिससे पानी की उपलब्धता और खेती दोनों को मजबूत मिले. वित्त मंत्री ने कहा है कि सरकार ऐसी फसलों को बढ़ावा देगी, जिनकी कीमत और डिमांड ज्यादा है और जिनसे किसानों को अच्छी आमदनी मिलती है. इनके तहत नारियल, चंदन, कोको, और काजू जैसे फसलों को विशेष सपोर्ट दिया जाएगा. साथ ही नारियल का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भी विशेष योजना लाने का ऐलान किया गया है.
ITIT सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खास घोषणाएं की हैं. इनके तहत सरकार ने आईटी और सॉफ्टवेयर सर्विसेंज को एक ही कैटेगरी में जोड़ने का ऐलान किया है. इससे फायदा यह होगा कि सभी IT-संबंधित सर्विसेज के लिए एक ही नियम लागू होंगे. कंपनियों को अलग-अलग कैटेगिरी की जटिलता नहीं झेलनी होगी. इसके अलावा सरकार ने तय किया है कि इन आईटी सर्विसेंज के लिए 15.5% का कॉमन सेफ हार्बर मार्जिन होगा. यानी यदि कंपनी अपने विदेशी क्लाइंट्स से कम से कम 15.5% प्रॉफिट मार्जिन दिखाती है, तो इनकम टैक्स विभाग उसे बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के स्वीकार कर लेगा.
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इसके अलावा पहले सिर्फ 300 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली कंपनियां Safe Harbour का फायदा ले सकती थीं. अब यह लिमिट बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गई है. सरकार ने Safe Harbour को पूरी तरह ऑटोमेटेड और नियम-आधारित सिस्टम से मंजूरी देने का ऐलान किया है. इसके तहत मंजूरी जल्द मिलेगी और एक बार मिलने पर 5 साल तक वैलिड रहेगी. कुल मिलाकर सरकार सरकार आईटी और आउटसोर्सिंग सेक्टर के लिए टैक्स और ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों को बहुत आसान, ऑटोमेटेड और तेज़ बनाना चाहती है, जिससे विवाद कम हों, बिजनेस को स्थिरता मिले और विदेशी निवेश बढ़े.
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