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देश को आर्थिक संकट से निकालेगा RBI, इतना पैसा देगा कि केंद्र की झोली फट जाएगी

बिजनेस टुडे टीवी को सूत्रों ने बताया कि RBI सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सरप्लस ट्रांसफर कर सकता है. इस मनी ट्रांसफर को अंतिम रूप देने के लिए RBI बोर्ड की बैठक इस सप्ताह के अंत में होने वाली है.

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19 मई 2026 (अपडेटेड: 19 मई 2026, 06:48 PM IST)
RBI surplus transfer
आरबीआई बॉन्ड पर ब्याज, विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर ट्रेडिंग वगैरा से हर साल अरबों रुपये कमाता है. (फोटो क्रेडिट: PTI)
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तेल और आर्थिक संकट की आशंकाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. RBI इस सप्ताह अपने सालभर के भारी मुनाफे में से खर्च और जरूरी रिजर्व निकालने के बाद बचा हुआ बड़ा हिस्सा (सरप्लस) केंद्र सरकार को देने की तैयारी कर रहा है.

RBI का सरप्लस क्या होता है?

RBI बॉन्ड पर ब्याज, विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर ट्रेडिंग वगैरा से हर साल अरबों रुपये कमाता है. अपने खर्च और इमरजेंसी फंड अलग रखने के बाद जो पैसा बचता है, यही सरप्लस फंड होता है. यह पैसा सरकार को ट्रांसफर किया जाता है. बिजनेस टुडे टीवी को सूत्रों ने बताया कि RBI सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सरप्लस ट्रांसफर कर सकता है. इस मनी ट्रांसफर को अंतिम रूप देने के लिए RBI बोर्ड की बैठक इस सप्ताह के अंत में होने वाली है.

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बिजनेस टुडे टीवी से बातचीत में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में RBI और सरकारी कंपनियों से डिविडेंड व मुनाफे के जरिए जितनी कमाई का अनुमान लगाया है, उससे भी ज्यादा पैसा मिल सकता है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में करीब 3.16 लाख करोड़ मिलने का अनुमान लगाया है. सरकारी सूत्रों ने बिजनेस टुडे टीवी को बताया कि RBI की तरफ से उम्मीद से ज्यादा डिविडेंड मिलने से सरकार को काफी राहत मिल सकती है. 

सरकारी सूत्रों ने कहा है कि अगर RBI उम्मीद से ज्यादा पैसा सरकार को ट्रांसफर करता है, तो इससे सरकार को वैश्विक अनिश्चितताओं (दुनिया भर में चल रही ऐसी परिस्थितियां जिनके बारे में साफ अंदाजा न हो और जिनसे अर्थव्यवस्था, व्यापार पर असर पड़ सकता है) से निपटने में मदद मिलेगी. सरकार के पास अतिरिक्त पैसा आ जाएगा तो उसके लिए अपने बढ़ते खर्च संभालना आसान होगा. साथ ही सरकार को ज्यादा कर्ज लेने की जरूरत कम पड़ सकती है. 

दुनिया में इस समय काफी अनिश्चितता है, खासकर ईरान युद्ध (Iran War) की वजह से. इससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो रहा है. तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल (Import Bill) बढ़ता है और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है.

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