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पेट्रोल-डीजल की तरह CNG ऑटोमैटिक कारों की ज्यादा वैराइटी क्यों नहीं मिलती?

CNG AMT CAR: सीएनजी कारें हमेशा डिमांड में रहती हैं. वजह है इसका कम खर्चीला होना. माने इसे चलाने की लागत फ्यूल से तो सस्ती ही पड़ती है. लेकिन नई CNG कार खरीदने जाएं, तो ऑटोमैटिक गियरबॉक्स (AMT) में ऑप्शन बहुत ही कम मिलेंगे.

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मार्केट में बहुत कम CNG ऑटोमैटिक कार के ऑप्शन हैं. ( फोटो-इंडिया टुडे)
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रितिका
17 नवंबर 2025 (पब्लिश्ड: 06:34 PM IST)
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कुछ साल पहले तक भारत में ऑटोमैटिक कारों का मिलना एक बड़ी बात थी. एक तो ऑप्शन कम और कीमत बहुत ज्यादा. मगर अब ऐसा नहीं रहा. ऑटो कंपनियां अपने कार मॉडल्स के ऑटोमैटिक वर्जन निकाल रही हैं. तकरीबन हर बजट में ऑटोमैटिक कार मिल जाएगी. पेट्रोल हो या डीजल, ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मिल ही जाता है. लेकिन CNG में बहुत दिक्कत है.

उदाहरण के लिए हाल ही में लॉन्च हुई Hyundai Venue 2025 के डीजल वर्जन में भी अब ऑटोगियर शिफ्ट है. मगर CNG के साथ ऐसा नहीं है. यहां बहुत से ऑप्शन तो दूर, गिनती के भी नहीं हैं. लेकिन क्यों?

CNG यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस, पेट्रोल और डीजल से सस्ती पड़ती है. इस वजह से कई लोगों का झुकाव इस ऑप्शन की तरफ होता है. लेकिन इसके बाद भी कई ऑटो कंपनियां मार्केट में CNG ऑप्शन में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन नहीं ला रही हैं. चलिए वजह जान लेते हैं.

ट्यूनिंग-टॉर्क

CNG कार कम पावर और टॉर्क जनरेट करती है. जिससे कार को स्पीड पकड़ने में थोड़ा समय लगता है. इस बात से कई लोग वाकिफ होंगे. दूसरी तरफ है ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, जिसे काम करने के लिए कई सेंसर्स की जरूरत होती है. AMT में इन सेंसर्स से मिलने वाले डेटा, जैसे- RPM, स्पीड, इंजन लोड, कार के एंगल के आधार पर एक गियर से दूसरे में शिफ्ट होता है. ऐसे में जब इसे CNG के साथ मिलाया जाता है, तो चीजें बदल जाती हैं. 

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टाटा कंपनी ही ऑटोमैटिक में CNG ऑप्शन देती है. (फोटो-टाटा मोटर्स)

दरअसल, AMT के सभी सेंसर्स के डेटा का CNG के साथ तालमेल बिठाने के लिए इसे फिर से ट्यून करना होगा. माने कि CNG-ऑटोमैटिक कॉन्फिगरेशन के लिए इन सभी सेंसर के डेटा को CNG और पेट्रोल दोनों ट्यूनिंग के माकूल बनाने के लिए फिर से ट्यून करना पड़ेगा. इसलिए ये सेटअप काफी महंगा भी पड़ता है.

इसके अलावा ऑटोमैटिक गियरबॉक्स को स्मूद तरीके से चलाने के लिए ज्यादा टॉर्क चाहिए होता है. CNG में ये टॉर्क नहीं मिलता, जिस वजह से गाड़ी धीमी, झटकेदार या ओवरहीट कर सकती है. वैसे, CNG गाड़ी में सीएनजी से पेट्रोल पर स्विच करने का ऑप्शन, तो लोगों के पास रहेगा ही रहेगा. यानी पावर चाहिए, तो पेट्रोल पर आ जाइए.

महंगा पड़ना

CNG किट और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का सेटअप कंपनी के लिए महंगा पड़ेगा. ठीक बात. लेकिन जब ये शोरूम में आएगी, तब ये ग्राहकों के लिए भी महंगी पड़ेगी. क्योंकि इसकी कीमत मैनुअल के मुकाबले ज्यादा होगी. माने कि अगर मैनुअल CNG वेरिएंट के लिए आपको 80 हजार रुपये एक्स्ट्रा देने पड़ रहे हैं, तो AMT के लिए लगभग 2 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं. जैसे कि Tata Tiago CNG (मैनुअल) की एक्स-शोरूम कीमत 5.48 लाख रुपये है. वहीं, Tata Tiago CNG (ऑटोमैटिक) का एक्स-शोरूम प्राइस 7.22 लाख रुपये है.

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इसके अलावा CNG+ ऑटोमैटिक कॉम्बिनेशन से कार का वजन भी ज्यादा हो जाता है. दरअसल, ऑटोमैटिक सेटअप, मैनुअल की तुलना में थोड़ा भारी होता है. ऊपर से CNG टैंक्स तो होते ही भारी हैं. इससे कार पर थोड़ा ज्यादा भार पड़ जाता है.

पहली AMT+CNG कार Tata Tiago

भारत में सबसे पहली सीएनजी+ऑटोमैटिक कार लाने वाली कंपनी टाटा मोटर्स है. टाटा ने Tiago और Tigor में ऑटोमैटिक के साथ सीएनजी ऑप्शन देकर उन लोगों को राहत दी, जो ऑटोमैटिक में सीएनजी ऑप्शन तलाश रहे थे. वहीं, Nissan Magnite रेट्रोफीट सीएनजी किट के तौर पर अवेलेबल है. ग्राहक Nissan Retrofitment Centres से इसे ऑटोमैटिक Magnite में फिट करवा सकते हैं.

बाकी, आफ्टरमार्केट से ऑटोमैटिक कारों में CNG किट लगवाने का ऑप्शन तो लोगों के पास पहले से ही है. लेकिन यहां एक पेंच है, अगर आपने आफ्टरमार्केट से ऑटोमैटिक कार में CNG किट लगवाई, तो कार की वारंटी रद्द हो सकती है. रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) भी कार्रवाई कर सकता है. 

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