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कार में पर्दे लगाने पर कटता चालान, तो भी कंपनियां लगाकर दे रहीं, वजह जान लीजिए

Car Window Curtain Rules: सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार किसी भी कार के फ्रंट और बैक ग्लास में न्यूनतम 70 फीसदी की विजिबिलिटी होना अनिवार्य है. जिसका अर्थ यह है कि कम से कम 70 प्रतिशत बाहरी लाइट कार के अंदर जानी चाहिए. वहीं साइड के शीशों के लिए यह नियम 50 प्रतिशत का है. फिर कार कंपनियां क्यों पर्दे लगाकर दे रही हैं.

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18 जून 2026 (अपडेटेड: 18 जून 2026, 03:42 PM IST)
Is Car Window Curtain Legal in India
कार में पर्दे लगाने का क्या नियम है
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# गाड़ी चालक: मेरी गाड़ी में पर्दे कंपनी ने लगाकर दिए हैं. फैक्ट्री फिट हैं. चालान नहीं बनता.
# ट्रैफिक पुलिस वाले अंकल: भाई साब, चालान तो आपका कटेगा, क्योंकि गाड़ी के कांच पर किसी भी किस्म की फिल्म लगाना, कवर करना, पर्दे लगाना गैर कानूनी है. आप चाहो तो कार कंपनी पर केस ठोक दो.

ये संवाद पढ़कर आप समझ ही गए होंगे कि क्या मामला है. आए दिन इस किस्म के वीडियो सोशल मीडिया का पर्दा फाड़ते हैं. सवाल उठता है कि जब देश में गाड़ी के कांच पर फिल्म लगाना एकदम मना है तो फिर कार कंपनियां Retractable Car Window Curtain लगाकर क्यों देती हैं. क्या इसके लिए कंपनी पर केस कर सकते हैं. आज इससे पर्दा उठा देते हैं.

पर्दे के पीछे का नियम

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में कारों के काले शीशे को लेकर एक फैसला सुनाया था. न्यायालय के नियमों के अनुसार किसी भी कार के फ्रंट और बैक ग्लास में न्यूनतम 70 फीसदी की विजिबिलिटी होना अनिवार्य है. जिसका अर्थ यह है कि कम से कम 70 प्रतिशत बाहरी लाइट कार के अंदर जानी चाहिए. वहीं साइड के शीशों के लिए यह नियम 50 प्रतिशत का है, यानी शीशों से कम से कम 50% लाइट अंदर जानी चाहिए.  

ये भी पढ़ें: अब 37 लाख की गाड़ी, 3 लाख नकद दो... टोयोटा डीलर ने थमाई थी सस्ती कार, महीनों बाद पकड़ी चोरी

इसलिए फिल्म तो छोड़िए, सन-शेड्स भी लगाना गैर कानूनी है. अगर आपकी गाड़ी में टिनटेड ग्लास लगे हैं, तो वो भी फैक्ट्री से लगे होने चाहिए. टिनटेड ग्लास माने ऐसे कांच जिसमें हल्का सा डार्क कलर होता है.

तो फिर कंपनियां पर्दे फिट करके क्यों दे रही हैं?

गाड़ी में लगकर आने वाले पर्दे आपकी खड़ी हुई गाड़ी को धूप से बचाने के लिए हैं. आपकी प्राइवसी को बचाने के लिए हैं. माने जो आपकी गाड़ी खुली पार्किंग में खड़ी है तो लगा लीजिए. इसके अलावा कहीं और लगाए तो चालान बनेगा ही. कंपनी पर केस करने से भी कुछ नहीं होगा, क्योंकि उसने तो नियम और शर्तों वाला दस्तखत आपसे पहले ही करवा लिया है.

वैसे Z प्लस सुरक्षा वाले लोगों पर चलती गाड़ी में पर्दे लगाने का नियम लागू नहीं होता है. अगर आपके पास इस कैटेगरी की सिक्योरिटी है तो फिर कोई दिक्कत नहीं. अगर नहीं है, तो फिर पर्दा हटा दीजिए. 

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