पेट्रोल गाड़ी खरीदने का है प्लान, तो जान लें कि कौन सा इंजन देगा लंबे समय तक साथ
Aspirated Vs Turbocharged Engine: गाड़ी खरीदने का प्लान है और उसमें भी पेट्रोल कार लेने का प्लान है, तो बजट के साथ इंजन भी देखें. गाड़ी की सेहत के पीछे इंजन भी एक बड़ा कारण है, तो जानें इसके बारे में सारी डिटेल.

गाड़ी खरीदने का प्लान है तो पेट्रोल वाली लें या डीडल वाली? ये ऐसा सवाल है जिस पर खूब माथा पच्ची की जाती है. इसके पीछे कई कारण भी हैं, जैसे कि E20 फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज गिरता है. टूट-फूट भी ज्यादा होती है स्पेशली अगर आपकी गाड़ी 2023 से पहले की है. सरकार भी ऐसा मानती है और कई सर्वे भी इस बात की पुष्टि करते हैं. हालांकि, 2023 से बाद की गाड़ियों को फिलहाल तो कोई दिक्कत नहीं मगर जल्द ही E22 से E30 तक का फ्यूल भी बाजार में आएगा, क्योंकि BIS ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए नए मानक जारी कर दिए हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आपको कौन सी पेट्रोल गाड़ी (Buying a Car in 2026) खरीदना चाहिए.
Naturally Aspirated (NA) इंजन ठीक रहेगापता है-पता है, आप क्या कहने वाले हो. नैचुरली एस्पिरेटेड का परफ़ोर्मेंस उतना अच्छा नहीं होता. गाड़ी ऐसे चलती है मानो अलसाई हो. पॉवर भी GDI (Gasoline Direct Injection) इंजन के मुकाबले कम मिलता है. एकदम ठीक बात मगर इसमें टर्बोचार्ज्ड इंजन की तुलना में टूट-फूट कम होती है. GDI या टर्बोचार्ज्ड इंजन के फ्यूल इन्जेक्टर और फ्यूल पंप में दिक्कतें जल्दी आ सकती हैं. कहने का मतलब जहां-जहां से पेट्रोल गुजरेगा, वहां गड़बड़ ज्यादा होगी.
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Naturally Aspirated लंबा चलेगाकारों में आप इसे कछुए वाला इंजन समझ लीजिए. आराम-आराम से चलेगा मगर रेस जीतेगा. ये वही इंजन है जो होंडा की कारों में लगा होता है. होंडा का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि E20 फ्यूल के बाद भी इसकी 15 साल पुरानी गाड़ी को कोई दिक्कत नहीं है. दरअसल जब दुनिया भर की कंपनियां अपनी गाड़ियों की छत काट (सनरूफ बनाना) रही थी. SUV और Compact SUV का गेम कर रही थी,तो इस बीच होंडा अपने इंजन पर काम कर रही थी.
होंडा ने 1 जनवरी 2009 से ही इंजन को रिफाइन करने का काम स्टार्ट कर दिया था. E20 पेट्रोल वाली Honda की पहली कार सेकंड जनरेशन Honda City थी. इसके बाद जितनी भी कार 2009 में मैनुफैक्चर हुई, उन्हें E20 के अनुरूप बनाया गया था. इसमें लगा नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन भले पॉवर कम देता है मगर चलता ज्यादा है.
नैचुरली एस्पिरेटेड और टर्बोचार्ज्ड इंजनहालांकि, ये पहले बताना चाहिए था मगर हमें लगा ज्ञान देने से अच्छा पहले एक तगड़ा उदाहरण बता देते हैं. वर्तमान में लगभग सभी इंजन फोर-स्ट्रोक प्रिंसिपल पर काम करते हैं. फोर स्ट्रोक यानी एक सिलेंडर के अंदर पिस्टन चार बार ऊपर-नीचे होता है. पहले स्ट्रोक में सिलेंडर के अंदर नैचुरल गैस आती है और इसी दौरान फ्यूल इंजेक्टर इसमें फ्यूल डालता है, दूसरे स्ट्रोक में पिस्टन, एयर और फ्यूल के मिक्चर को कम्प्रेस करता है और इसी दौरान स्पार्क प्लग अपने काम करता है. इग्निशन होने के कारण एयर-फ्यूल का मिक्सर एक्सपेंड होता है और पिस्टन नीचे जाता है और इस स्ट्रोक को कंबंशन स्ट्रोक कहते हैं. चौथे स्ट्रोक में गैसेस एग्जॉस्ट वाल्व से बाहर निकलकर वातावरण में मिल जाती है. तो ये होती है नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन की वर्किंग.
नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन में जो एनर्जी प्रोड्यूस होती है, वो काफी मात्रा में बर्बाद हो जाती है. टर्बोचार्ज्ड इंजन में इसी एनर्जी को भी टर्बो चार्जर की मदद से दोबारा यूज किया जाता है. इससे सिलेंडर में ज्यादा एयर भरी जा सकती है. साथ ही, ज्यादा पावर भी प्रोड्यूस होता है, ताकि एनर्जी के लॉस को कम किया जा सके. टर्बोचार्ज्ड इंजन के जरिए छोटे इंजन में भी ज्यादा पावर आउटपुट जनरेट करवाया जा सकता है और छोटा होने की वजह से इसमें फ्यूल की खपत भी कम होती है.
माने पॉवर और माइलेज में टर्बोचार्ज्ड इंजन का पलड़ा भारी है मगर लंबे चलने के मामले में नैचुरली एस्पिरेटेड आगे है. अब आपको तय करना है कि क्या करना चाहिए. हमारे हिसाब से तो नैचुरली एस्पिरेटेड ज्यादा मुफीद चॉइस है.
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