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E20 फ्यूल ने गिराया आधी से ज्यादा गाड़ियों का माइलेज, पर नया आदेश दे सकता है बड़ी राहत

E20 lower mileage: लोकल सर्कल्स (Local Circles) द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहन वाले आधे मालिकों ने पुष्टि की है कि 2025 में E20 पेट्रोल अनिवार्य होने के बाद उन्हें कम माइलेज मिल रहा है. लेकिन जल्द ही सरकार पेट्रोल पंप मालिकों को एक आदेश दे सकती है, जिससे नई कार खरीदने वाले लोगों को राहत मिलेगी.

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28 मई 2026 (अपडेटेड: 28 मई 2026, 05:19 PM IST)
50% older vehicle owners reports mileage drop
E20 फ्यूल से जुड़ा चौकाने वाला सर्वे
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अगर आपके पास साल 2023 से पहले खरीदी हुई कार है तो आपके थोड़ा और दुखी होने का टाइम आ गया है. वैसे दुखी तो आप 2023 के बाद खरीदी हुई गाड़ी को लेकर भी होंगे मगर कुछ सालों के बाद. वैसे ऐसा कुछ महीने में भी हो सकता है क्योंकि BIS ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए नए मानक जारी कर दिए हैं. खैर अभी के वापस E20 फ्यूल पर आते हैं. खबर ये है कि साल 2023 के पहली खरीदी गई हर दूसरी गाड़ी के माइलेज में तगड़ी (50% older vehicle owners reports mileage drop) गिरावट है. माने 50 फीसदी गाड़ियों का माइलेज गिरा है.

लोकल सर्कल्स (LocalCircles) द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहन वाले आधे मालिकों ने पुष्टि की है कि 2025 में E20 पेट्रोल अनिवार्य होने के बाद उन्हें कम माइलेज मिल रहा है.

टूट-फूट भी बढ़ गई है

आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि 2023 से आने वाली पेट्रोल गाड़ियों को E20 फ्यूल के हिसाब से बनाया गया है. अब बात उससे पहले वाली गाड़ियों की. लोकल सर्कल्स ने अपने सर्वे में 50 हजार से ज्यादा वाहन मालिकों से बात की है. सर्वे में 301 जिलों के पेट्रोल गाड़ी के यूजर्स शामिल थे. इसमें से 45 टियर वन जिलों माने महानगरों से, 29 फीसदी टियर 2 जिलों से और 26 फीसदी 3,4, 5 टियर जिलों से थे. माने देश भर के गाड़ी मालिकों या यूजर्स से उनके E20 फ्यूल के अनुभव के बारे में पूछा गया. 

50 फीसदी यूजर्स ने पिछले 9 महीने के दौरान माइलेज में गिरावट महसूस की है. 29 फीसदी यूजर्स ने बताया कि उनकी गाड़ी में इस दौरान टूट-फूट भी ज्यादा हुई है. 2022 से उससे पहले की ऐसी गाड़ियों में इंजन, फ्यूल टैंक, कार्बोरेटर में गड़बड़ी के चलते उनको रिपेयर के लिए देना पड़ा है. सर्वे के अनुसार, वाहन मालिकों ने इंजन के अधिक गर्म होने, इंजन के ढंग से न चलने, कोल्ड स्टार्ट होने में कठिनाई, एक्स्ट्रा वाइब्रेशन और ऐक्सेलरैशन में गिरावट आने जैसी शिकायतें की हैं.

सरकारी दावे से इतर है सच्चाई

E20 फ्यूल से माइलेज में गिरावट को लेकर सरकार का दावा 1-6 फीसदी का है, मगर सर्वे के मुताबिक असल में गिरावट ज्यादा है. इथेनॉल मिक्स पेट्रोल या E20 पेट्रोल पारंपरिक पेट्रोल से अलग होता है. इथेनॉल नमी को अधिक आसानी से सोख लेता है. इसमें ऊर्जा की मात्रा कम होती है, और यह वाहनों में रबर और प्लास्टिक के उन हिस्सों को धीरे-धीरे प्रभावित कर सकता है जिन्हें असल में उच्च इथेनॉल मिक्स के लिए डिज़ाइन ही नहीं किया गया है.

ये भी पढ़ें: E20 पेट्रोल आपकी गाड़ी की माइलेज कितनी गिराएगा? हर सवाल का जवाब यहां है

भारत में पिछले 15 सालों में बिके वाहनों में से 80 फीसदी E5 या E10 फ्यूल के हिसाब से बने हैं. ऐसे में E20 पेट्रोल उनको एकदम ही रास नहीं आ रहा है. अभी तो इस पेट्रोल को अनिवार्य हुए महज कुछ महीने हुए हैं. आगे वक्त गुजरने पर असल पिक्चर दिखना चालू होगी. वैसे 2022 या 23 के बाद की गाड़ियों को भी निकट भविष्य में इसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. शायद 2023 के बाद की गाड़ियों को इस किस्म की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े. क्यों, ऊपर तो लिखा था.

अब राहत की बात

खबर लिखते-लिखते पता चला कि सरकार ग्राहकों को उनकी गाड़ी के मुताबिक पेट्रोल चुनने का ऑप्शन दे सकती है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक सरकार ने पेट्रोलियम कंपनी से कहा है कि वो E20, E22, E25, E27 और E30 के हिसाब से पंप पर अलग-अलग नोजल लगाने की व्यवस्था करे. अगर वाकई ऐसा हुआ तो कम से कम नई गाड़ियों में दिक्कत नहीं होगी. 

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