The Lallantop

'ऑनलाइन क्लास' सुनने में अच्छा आइडिया लगता है, मगर इन लड़कियों का दम घोंट रहा है

लॉकडाउन के दौरान कैसे पढ़ रही हैं लड़कियां, सुनकर रूह कांपती है.

Advertisement
post-main-image
गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों के लॉकडाउन के दौरान स्ट्रगल को लेकर लिखी गई संज्ञा उपाध्याय की पोस्ट फेसबुक पर काफी शेयर की जा रही है. (तस्वीर: फेसबुक/Pexels)
संज्ञा उपाध्याय दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक गर्ल्स कॉलेज में हिंदी पढ़ाती हैं. खुद किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ी हैं. बच्चों के लिए लिखती हैं, और फोटोग्राफी का शौक है इनको. इन्होंने लॉकडाउन के दौरान हो रहे अपने अनुभव लिखे हैं.  जिसमें इन्होंने बताया है कि किस तरह ऑनलाइन लर्निंग लड़कियों के लिए मुश्किल साबित हो रही है. उनकी ये पोस्ट हम आपको उनकी इजाज़त से यहां पढ़वा रहे हैं.


अपनी क्लास के ठीक समय पर ऑनलाइन होती हूं. क्लास चल रही है. और अब जब क्लास ख़त्म होने में पांच मिनट बाक़ी हैं, एक लड़की जॉइन करती है. मैं इतनी देरी का सबब पूछती हूं . वह सबकी उपस्थिति में कहती है, नेटवर्क प्रॉब्लम.
दस मिनट बाद वॉट्सऐप पर उसका मैसेज आता है
मैम, सॉरी, मैं ऑनलाइन क्लास नहीं कर सकूंगी. यह सुबह घर के काम का टाइम होता है.
मैं पूछती हूं कि अगर तुम कॉलेज में होतीं इस वक़्त, तो भी घर का काम हो रहा होता न? वह जवाब देती है कि हो रहा होता, लेकिन अब मैं घर में हूं. और जब मैं घर में हूं,  तो घर का काम करने के बजाय एक घंटा कोने में बैठी मोबाइल हाथ में लिए क्या कर रही हूं, यह बात कोई नहीं समझता. घर में होने का मतलब घर का काम करना है.

(1)

Advertisement
मैम, मेरी बेटी बहुत छोटी है, मुझे उसे देखना होता है. क्लास नहीं कर सकूंगी.

एक लड़की मैसेज करती है मैं कहती हूं, अभी तो सब घर में हैं. कोई भी देखभाल कर लेगा बच्ची की.
वह कहती है, नहीं मैम. घर में हूं, तो मेरे सिवा कोई नहीं देखेगा उसे.
Girl Sitting Near Pillars 2090592 700 एक लड़की के लिए घर पर रहकर पढ़ाई करना कितना मुश्किल हो रहा है, ये अनुभव बताते हैं. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

(2)

Advertisement
मैम ब्रेल में किताबें नहीं हैं यहां घर में. और घर में मेरे लिए किताब पढ़ देने की फ़ुरसत नहीं है किसी के पास. क्या करूं?

एक दृष्टिहीन लड़की फ़ोन करके कहती है, मैं रातों की ख़ामोशी में उसके लिए कुछ रिकॉर्डिंग करती हूं. कुछ अन्य छात्राओं से कहती हूं . वे उसे रिकॉर्डिंग भेजती हैं.

(3)

मैम मैं अब और क्लास नहीं कर सकूंगी. मेरा मोबाइल रीचार्ज नहीं हो सकता. पापा ने मना कर दिया है, पैसे नहीं हैं.

Advertisement
एक लड़की मैसेज करती है: मैं नंबर लेकर रीचार्ज कराती हूं. तो एक के पिता फ़ोन पर कहते हैं, हमारी बेटी को बिगाड़ो मत. मेरी बात सुने बिना फ़ोन काट देते हैं.

(4)

मैम, एक ही कमरे का घर है. क्लास के वक़्त सब वहीं होते हैं. कोई भी किसी काम के लिए कह दे, तो मना नहीं कर सकती और ध्यान भी बंटता है, इसलिए...

एक लड़की क्लास शुरू होने के तीन-चार मिनट बाद ही चली जाती है. शाम को फ़ोन पर फुसफुसाती आवाज़ में कहती है Woman In Brown Sleeveless Dress And Blue Jeans Standing On 906106 700 कुछ लड़कियों के लिए कॉलेज आना ही उनके पूरे दिन का सबसे आज़ाद समय होता है. जहां वो लाद दी गई जिम्मेदारियों से दूर रह पाती है, थोड़ी देर के लिए ही सही. लॉकडाउन ने वो भी छीन लिया है. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

(5)

उसी समय भाई की भी ऑनलाइन क्लास है. एक ही स्मार्ट फ़ोन है परिवार में. तो भाई का हक़ पहला है.

एक लड़की मैसेज करती है, मैम, मैं इतने बजे वाली क्लास नहीं कर सकूंगी. मैं कारण पूछती हूं , तो वह बताती है

(6)

एक लड़की अपनी सहेली से मैसेज भिजवाती है कि मैम से मेरे पापा के फ़ोन पर बात कराना. वे फ़ोन नहीं दे रहे मेरा. कह रहे हैं, सारा दिन फ़ोन लिए बैठी रहती है.

(7)

मैम, हम ख़ुद पढ़ लेंगे. गांव में नेटवर्क की बहुत समस्या होती है.

एक लड़की शुरू में ही कह गयी थी,

(8)

एक लड़की गांव से आकर अपने भाइयों के साथ यहां महानगर में रहती है, पर उसके पास फ़ोन नहीं है. क्योंकि लड़की के पास फ़ोन नहीं होना चाहिए उसके भाइयों के मुताबिक़. वह क्लास नहीं कर सकती.

(9)

मैम, मैं असाइनमेंट मेल नहीं कर सकती. आपको फ़ोन पर पढ़कर सुना दूं?

एक लड़की फ़ोन करके कहती है, मैं सुन लेती हूं .
एक लड़की...
एक लड़की...
इस एक लड़की को एक मत जानिए. जाने कितनी लड़कियां इस एक में शामिल हैं.
Woman In Brown Scoop Neck T Shirt 796557 700 संज्ञा लिखती हैं कि एक लड़की के पीछे न जाने ऎसी कई लड़कियों की कहानी है जो हम तक पहुंच नहीं पाती. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

ऑनलाइन पढ़ने-पढ़ाने के पक्ष में तर्क देने वाले यह समझ ही नहीं पाएंगे, या शायद अच्छी तरह समझते होंगे कि कौन ऐसी शिक्षा लेने में सक्षम है. अभी थोड़े दिन पहले हम महंगी शिक्षा के ख़िलाफ़ मुफ़्त शिक्षा के लिए लड़ रहे थे. अब यह एक नया मोर्चा बन रहा है.
मैं चूंकि लड़कियों को पढ़ाती हूं , इसलिए उनकी समस्याएं लिख दीं. निश्चित ही, लड़कों की भी समस्याएं होंगी.
लेकिन लड़कियों की पढ़ाई के रास्ते में कितनी कितनी कितनी बाधाएं हैं, इसका अंदाज़ा लगाएं.
कॉलेज आने के लिए बाहर निकलना उनके लिए कितने कामों का प्रबंधन करके निकलना है, यह समझिए. घर लौटकर उसी बचे समय में उन्हें घर की सब जिम्मेदारियां पूरी करनी होती हैं. पढ़ाई भी करनी होती है, असाइनमेंट भी बनाना होता है. कितनी लड़कियां दो लेक्चर के बीच गैप में यह काम करती हैं कि घर में समय नहीं मिलेगा. और वैसे भी, कॉलेज के लिए घर से बाहर निकलना सांस लेने जैसा नहीं क्या?
और अब जब वे घर में हैं, तो कितने परिवार उनकी ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर संजीदा और संवेदनशील हैं? उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिवेश उन्हें इस तरह की पढ़ाई की कितनी सहूलियत देते हैं?
कितने सवाल हैं और अनसुने हैं.


वीडियो: ये इंडियन हीरो विदेश में दिन-रात मेहनत कर कोरोना की वैक्सीन टेस्ट कर रही हैं

Advertisement