मैम ब्रेल में किताबें नहीं हैं यहां घर में. और घर में मेरे लिए किताब पढ़ देने की फ़ुरसत नहीं है किसी के पास. क्या करूं?
एक दृष्टिहीन लड़की फ़ोन करके कहती है, मैं रातों की ख़ामोशी में उसके लिए कुछ रिकॉर्डिंग करती हूं. कुछ अन्य छात्राओं से कहती हूं . वे उसे रिकॉर्डिंग भेजती हैं.
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मैम मैं अब और क्लास नहीं कर सकूंगी. मेरा मोबाइल रीचार्ज नहीं हो सकता. पापा ने मना कर दिया है, पैसे नहीं हैं.
एक लड़की मैसेज करती है: मैं नंबर लेकर रीचार्ज कराती हूं. तो एक के पिता फ़ोन पर कहते हैं, हमारी बेटी को बिगाड़ो मत. मेरी बात सुने बिना फ़ोन काट देते हैं.
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मैम, एक ही कमरे का घर है. क्लास के वक़्त सब वहीं होते हैं. कोई भी किसी काम के लिए कह दे, तो मना नहीं कर सकती और ध्यान भी बंटता है, इसलिए...
एक लड़की क्लास शुरू होने के तीन-चार मिनट बाद ही चली जाती है. शाम को फ़ोन पर फुसफुसाती आवाज़ में कहती है
कुछ लड़कियों के लिए कॉलेज आना ही उनके पूरे दिन का सबसे आज़ाद समय होता है. जहां वो लाद दी गई जिम्मेदारियों से दूर रह पाती है, थोड़ी देर के लिए ही सही. लॉकडाउन ने वो भी छीन लिया है. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)
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उसी समय भाई की भी ऑनलाइन क्लास है. एक ही स्मार्ट फ़ोन है परिवार में. तो भाई का हक़ पहला है.
एक लड़की मैसेज करती है, मैम, मैं इतने बजे वाली क्लास नहीं कर सकूंगी. मैं कारण पूछती हूं , तो वह बताती है
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एक लड़की अपनी सहेली से मैसेज भिजवाती है कि मैम से मेरे पापा के फ़ोन पर बात कराना. वे फ़ोन नहीं दे रहे मेरा. कह रहे हैं, सारा दिन फ़ोन लिए बैठी रहती है.
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मैम, हम ख़ुद पढ़ लेंगे. गांव में नेटवर्क की बहुत समस्या होती है.
एक लड़की शुरू में ही कह गयी थी,
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एक लड़की गांव से आकर अपने भाइयों के साथ यहां महानगर में रहती है, पर उसके पास फ़ोन नहीं है. क्योंकि लड़की के पास फ़ोन नहीं होना चाहिए उसके भाइयों के मुताबिक़. वह क्लास नहीं कर सकती.
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मैम, मैं असाइनमेंट मेल नहीं कर सकती. आपको फ़ोन पर पढ़कर सुना दूं?
एक लड़की फ़ोन करके कहती है, मैं सुन लेती हूं .
एक लड़की...
एक लड़की...
इस एक लड़की को एक मत जानिए. जाने कितनी लड़कियां इस एक में शामिल हैं.
संज्ञा लिखती हैं कि एक लड़की के पीछे न जाने ऎसी कई लड़कियों की कहानी है जो हम तक पहुंच नहीं पाती. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)ऑनलाइन पढ़ने-पढ़ाने के पक्ष में तर्क देने वाले यह समझ ही नहीं पाएंगे, या शायद अच्छी तरह समझते होंगे कि कौन ऐसी शिक्षा लेने में सक्षम है. अभी थोड़े दिन पहले हम महंगी शिक्षा के ख़िलाफ़ मुफ़्त शिक्षा के लिए लड़ रहे थे. अब यह एक नया मोर्चा बन रहा है.
मैं चूंकि लड़कियों को पढ़ाती हूं , इसलिए उनकी समस्याएं लिख दीं. निश्चित ही, लड़कों की भी समस्याएं होंगी.लेकिन लड़कियों की पढ़ाई के रास्ते में कितनी कितनी कितनी बाधाएं हैं, इसका अंदाज़ा लगाएं.
कॉलेज आने के लिए बाहर निकलना उनके लिए कितने कामों का प्रबंधन करके निकलना है, यह समझिए. घर लौटकर उसी बचे समय में उन्हें घर की सब जिम्मेदारियां पूरी करनी होती हैं. पढ़ाई भी करनी होती है, असाइनमेंट भी बनाना होता है. कितनी लड़कियां दो लेक्चर के बीच गैप में यह काम करती हैं कि घर में समय नहीं मिलेगा. और वैसे भी, कॉलेज के लिए घर से बाहर निकलना सांस लेने जैसा नहीं क्या?
और अब जब वे घर में हैं, तो कितने परिवार उनकी ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर संजीदा और संवेदनशील हैं? उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिवेश उन्हें इस तरह की पढ़ाई की कितनी सहूलियत देते हैं?
कितने सवाल हैं और अनसुने हैं.
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