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वकील ने कहा - "कोर्ट को बाजार मत बनाइए, जज साहब," जज ने कहा - "जेल भेज दूंगा"

एडवोकेट घोष ने कहा - "मुझे पता है जज के साथ कैसे डील करना है."

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कलकत्ता हाई कोर्ट. (calcuttahighcourt.gov.in)

कोर्ट रूम के अंदर जज और वकील के बीच बहस होना आम बात है. लेकिन 18 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta Highcourt) में जो हुआ वो शायद अनोखा माना जाएगा. कोर्ट में पश्चिम बंगाल के शिक्षक घोटाले की सुनवाई चल रही थी. जस्टिस अभीजित गंगोपाध्याय (Abhijeet Gangopadhyay) की बेच केस सुन रही थी. जस्टिस गंगोपाध्याय ने 6 लोगों को सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश होने को कहा गया था. आरोप है कि इन 6 लोगों को अवैध तरीके शिक्षक के तौर पर भर्ती किया गया था. इन छह लोगों में से एक तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल (Anubrat Mondal) की बेटी सुकन्या भी थीं. कोर्ट में मंडल की तरफ से कोर्ट में पक्ष रख रहे थे, सीनियर एडवोकेट अरुनवा घोष. इसी दौरान कोर्ट में जस्टिस गंगोपाध्याय और एडवोकेट अरुनवा घोष के बीच तीखी बहस हो गई. 

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किस बात पर? बात ये कि जस्टिस गंगोपाध्याय ने इस सुनवाई में पत्रकारों को मोबाइल फोन से वीडियो रिकार्डिंग करने की अनुमति दे दी थी. हालांकि पत्रकारों को रिकार्डिंग की ही अनुमति दी थी, किसी तरह की लाइव स्ट्रीम की अनुमति नहीं थी.

इस पर हुआ बवाल. 

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कोर्ट के अंदर क्या कुछ हुआ आप अक्षरश: देख लीजिए.

जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय: (बंगाली में) अरुणाभा दा, हमें देखकर मुस्कुरा भी नहीं रहे हैं, बात करना तो भूल जाइए.

सीनियर एडवोकेट अरुणव घोष: मैं बताता हूं लॉर्डशिप, योर लॉर्डशिप आप बहुत ईमानदार व्यक्ति हैं. लेकिन माइ लॉर्ड, अदालत को बाजार में मत बनाइए.

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जस्टिस गंगोपाध्याय: बाज़ार बना रहे हैं?

एडवोकेट घोष: हां.  एक बाजार मत बनाइए. बार काउंसिल में आपकी बहुत बदनामी हो रही है. यह पत्रकारों के लिए अच्छा हो सकता है लेकिन माइ लॉर्ड, टीवी चलाने पर सुबह से शाम तक आपका चेहरा दिखता है. कृपया ऐसा न करें. कानून के मुताबिक आदेश पारित करें.

जस्टिस गंगोपाध्याय: ओपन कोर्ट की कार्यवाही में न्यायालय की गरिमा को बनाए रखना चाहिए.

एडवोकेट घोष: यह ओपन कोर्ट नहीं है.

जस्टिस गंगोपाध्याय: यह ओपन कोर्ट नहीं है?

एडवोकेट घोष: नहीं, ऐसा नहीं है! बाहर आप देखते हैं कि लोग अंदर आने के लिए लड़ रहे हैं. और पत्रकार... वे तो पहले से ही लड़ रहे हैं... अफवाहें हैं कि वे आपके चैंबर में जाते हैं.

जस्टिस गंगोपाध्याय: कौन? ये अफवाह है? मेरे कक्ष में कौन जाता है?

एडवोकेट घोष : ये पत्रकार जाते हैं.

जस्टिस गंगोपाध्यायः हां! वे मेरे कक्ष में जाते हैं. तो इसमें गलत क्या है?

जस्टिस गंगोपाध्याय: मैं आपसे बात करूंगा. आपके खिलाफ अवमानना चार्ज लगाऊंगा और श्री घोष को जेल भेज दूंगा.

एडवोकेट घोष: मुझे पता है जज के साथ कैसे डील करना है.

एडवोकेट घोष: मुझे भी पता है कि आप जैसे गुंडे से कैसे निपटना है.

दूसरे वकील: मैं आपको 6 साल से देख रहा हूं. आपने एक भी केस में फैसला नहीं सुनाया.

जस्टिस गंगोपाध्याय: एक भी फैसला नहीं सुनाया? आप कुछ नहीं जानते. आप तथ्यों को नहीं जानते हैं.

दूसरे वकील: ये बकवास कर रहे हैं.

जस्टिस गंगोपाध्याय: असंसदीय भाषा का प्रयोग न करें. अब मैं आप पर भी अवमानना ​​​का चार्ज लगाऊंगा.

दूसरे वकील: हां, सही रहेगा. कृपया रूल बता दें.

जस्टिस गंगोपाध्याय: मैं जारी करूंगा.

अन्य वकील:  करने दीजिए उन्हें. उन्हें नियम जारी करने दीजिए. इस मामले को न्यायायिक तौर पर आगे बढ़ाते हैं.

एडवोकेट घोष: लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति है लेकिन वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है.

जस्टिस गंगोपाध्यायः मैंने इसकी इजाजत दे दी है. आज होगी वीडियोग्राफी, आज की कार्यवाही के लिए. मेरा आदेश लिखिए.

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