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उत्तराखंड: बीच कैबिनेट मीटिंग में मंत्री ने दिया इस्तीफा, बोले- मुझे भिखारी सा बना दिया

चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सिरदर्द बने हरक सिंह रावत.

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हरक सिंह रावत उत्तराखंड के पिछले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे. (फोटो: आजतक)
यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अब चुनाव होने से ज्यादा समय नहीं बचा है. यूपी राजनीतिक तौर पर हरदम ही चर्चा में रहता है. पंजाब में पहले अमरिंदर-सिद्धू और फिर सिद्धू-चन्नी के बीच विवाद ने इस चुनावी राज्य को भी अच्छी खासी फुटेज दे दी. गोवा शांत था, तो ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर के साथ मिलकर वहां 'खेला' शुरू कर दिया और गोवा को भी सुर्खियां मिलने लगीं. मणिपुर छोटा राज्य है और नॉर्थ ईस्ट स्टेट है, इसलिए मीडिया की नजरों से दूर ही रहता है. अब बचा उत्तराखंड. बीजेपी ने जब से अपने तीसरे सीएम पुष्कर सिंह धामी को कुर्सी सौंपी, तब से सब शांत ही था. लेकिन पहले हरीश रावत का ट्विटर पर दर्द छलक आया और अब बीजेपी में नया बवाल मच गया. ये सियासी गर्मागर्मी इस बात की तस्दीक कर रही है कि इस पहाड़ी राज्य में भी चुनाव आने वाले हैं, नज़रअंदाज़ करने की कोशिश मत करिएगा. क्या है बीजेपी का नया सिरदर्द? 24 दिसंबर को उत्तराखंड सचिवालय में कैबिनेट की बैठक चल रही थी. बैठक में मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे. सरकार के कामकाज को लेकर प्रस्तावों पर चर्चा चल रही थी. तभी मंत्री हरक सिंह रावत तमतमाते हुए खड़े हुए. उन्होंने इस्तीफा दिया और बाहर निकल गए. हरक ने कहा,
'मेरी खुद की सरकार कोटद्वार में एक मेडिकल कॉलेज स्वीकृत करने का प्रस्ताव लगातार लटका रही है.'
Harak Singh Rawat 2 क्यों नाराज़ हुए हरक सिंह रावत? हरक सिंह रावत काफी समय से कोटद्वार में एक मेडिकल कॉलेज बनवाना चाहते हैं. वो कोटद्वार से ही विधायक हैं. लेकिन सरकार उनके इस प्रस्ताव को पास नहीं कर रही थी. आज तक से बात करते हुए रावत ने कहा,
'अपने क्षेत्र के लिए 5 साल से एक मेडिकल कॉलेज मांग रहा था, लेकिन इन लोगों ने मुझे भिखारी बना दिया.'
आजतक की खबर के मुताबिक रावत इतने ज्यादा नाराज़ थे कि उनकी आंखे नम हो गईं और वो रोने लगे. दूसरी तरफ, चुनाव से ठीक पहले हरक सिंह रावत का इस्तीफा बीजेपी के लिए सिरदर्द बन गया है. हालांकि, पार्टी कह रही है कि सब ठीक है. उत्तराखंड में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने हरक सिंह रावत के मंत्री पद से इस्तीफे की खबरों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी में सब कुछ ठीक है. वहीं दूसरी ओर इंडिया टुडे से जुड़े दिलीप सिंह राठौर की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि कोई कहीं नहीं जा रहा. हरक सिंह रावत की चिंताएं दूर कर दी गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक उमेश शर्मा काऊ को ही रावत को मनाने की जिम्मेदारी दी गई थी. उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी नेता अनिल बलूनी और सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मिलकर हरक सिंह रावत के मुद्दे को सुलझा दिया है. हालांकि, हरक सिंह रावत ने इस बात की तस्दीक की है कि वे अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं और अपने फैसले पर टिके हुए हैं. उन्होंने आज तक से फोन पर हुई बातचीत में बताया,
"मैं अपने निर्णय पर टिका हुआ हूं. कल रात एक विधायक मुझसे मिलने आए थे. उन्होंने कोशिश की थी कि मैं मुख्यमंत्री से बात करूं, लेकिन मैंने बात नहीं की."
कौन हैं हरक सिंह रावत? हरक सिंह रावत 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड के कोटद्वार से विधायक चुने गए. सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद से नवाज़े गए. उनको वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा मिला. लेकिन बड़ी बात ये है कि रावत पहले पहले कांग्रेस में थे. ये वही नेता हैं जिन्होंने 2016 में उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. और बागी होकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. अब चर्चा ये चल रही है कि क्या हरक दोबारा कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो हाल ही में अपनी पार्टी से रूठने वाले हरीश रावत के लिए परिस्थितियां फिर से असहज हो सकती हैं.

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