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नकली पैर की वजह से एयरपोर्ट पर बार-बार रोके जाने से दुखी सुधा चंद्रन ने PM मोदी से क्या अपील की?

इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर अपनी परेशानी बताई है.

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एक्ट्रेस और भरतनाट्यम डांसर सुधा चंद्रन ने अपनी शिकायत वीडियो के जरिए पीएम मोदी तक पहुंचाई है.
ऐक्ट्रेस और भरतनाट्यम डांसर सुधा चंद्रन दुखी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना ये दुख जाहिर किया है. सुधा चंद्रन ने कहा है कि वो लंबे समय से एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चेक के दौरान होने वाले व्यवहार से दुखी हैं. सुधा चंद्रन सालों पहले ऐक्सिडेंट में अपना एक पैर गवां बैठी थीं. उन्हें आर्टिफिशल पैर लगवाना पड़ा था. लेकिन जब भी वो ट्रैवल करती हैं तो एयरपोर्ट पर उन्हें रोक लिया जाता है. उन्हें अपना आर्टिफिशल लिंब उतारने के लिए कहा जाता है. इस बारे में बताते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम पर कहा,
'बहुत आहत हूं. हर बार इस तरह की ग्रिलिंग से बहुत दुख होता है. उम्मीद करती हूं कि मेरा मैसेज सेंट्रल गवर्नमेंट अथॉरिटी तक पहुंचे और वो जल्द से जल्द कोई एक्शन लें.
और क्या कहा? सुधा चंद्रन वीडियो में कहती हैं,
ये बहुत ही पर्सनल चीज है जो मैं हमारे प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बताना चाहती हूं. मेरी केंद्र और राज्य सरकारों से अपील है. मेरा नाम सुधा चंद्रन है. मैं पेशे से एक ऐक्ट्रेस और प्रोफेशनल डांसर हूं. मैंने आर्टिफिशल लिंब के साथ डांस करके इतिहास रचा. अपने देश को गौरवान्वित किया. 
लेकिन जब भी मैं प्रोफेशनल विजिट पर जाती हूं तो मुझे हर बार एयरपोर्ट पर रोका जाता है. जब मैं सिक्यॉरिटी और CISF ऑफिसर्स से रिक्वेस्ट करती हूं कि प्लीज मेरे आर्टिफिशल लिंब के लिए ETD टेस्ट (एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर) कर दीजिए, तो वो फिर भी मुझे मेरा आर्टिफिशल लिंब उतारकर उन्हें दिखाने के लिए कहते हैं.
मोदी जी क्या ये इंसानियत के तौर पर संभव है? क्या हमारा देश इसी के बारे में बात कर रहा है? क्या एक महिला दूसरी महिला को इसी तरह इज्जत देती है? मोदी जी मैं आपसे रिक्वेस्ट करती हूं कि जिस तरह आप सीनियर सिटीजन को कार्ड देते हैं, ताकि वो कह सकें कि सीनियर सिटीजन हैं, उसी तरह हम लोगों के लिए भी कुछ इंतजाम करें.'
सरकार ने दिलाया भरोसा सुधा चंद्रन की इस अपील पर सरकार की प्रतिक्रिया भी आई. उसकी तरफ से सिविल एविएशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा,
मुझे ये सुनकर दुख हुआ सुधा जी. ये परेशान करने वाला है. इससे किसी को नहीं गुजरना चाहिए. मैं व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को देखूंगा और इसे ठीक करने की कोशिश करूंगा.
कौन हैं सुधा चंद्रन? सुधा चंद्रन कई चर्चित टीवी सीरियल्स में काम कर चुकी हैं. वे एक शानदार भरतनाट्यम डांसर भी हैं. छोटी थीं, तभी से ऐक्ट्रेस बनना चाहती थीं. डांस करना भी पसंद था. सुधा ये दोनों बनने का सपना लेकर आगे बढ़ रही थीं, कि तभी कुछ ऐसा हुआ कि उनका सपना चकनाचूर होकर बिखरने लगा. 16 साल की थीं, तब एक्सीडेंट हो गया. इस हादसे की वजह से उन्होंने अपना एक पैर खो दिया. पूरी कहानी सुधा ने एक इंटरव्यू में बताई थी.
1981 का साल था. मई का महीना था. सुधा अपनी फैमिली के साथ चेन्नई से तिरुचिरापल्ली जा रही थीं. सुधा की फैमिली प्रॉपर इसी सिटी से थी. बाद में सब जाकर मुंबई में बस गए थे, लेकिन तिरुचिरापल्ली जाते रहते थे. ऐसी ही एक यात्रा के दौरान उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया.
सुधा ने टाइम्स नाउ में दिए इंटरव्यू में कहा था,
मैं बहुत यंग थी. मुझे याद है कि हम सब बातें कर रहे थे, और जो अगला पल मुझे याद है वो ये कि हम सब सड़क पर इधर-उधर पड़े हुए थे. ड्राइवर का सिर मेरी गोद पर था. वो आखिरी सांसें ले रहा था. मुझसे पानी मांग रहा था. वो बच नहीं सका.”
एक्सीडेंट में सुधा के एक पैर में फ्रैक्चर हो गया था. उन्हें इलाज के लिए पास के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. रात का वक्त था. अस्पताल में डॉक्टर नहीं थे, इंटर्न्स थे. सुधा के टखने में एक छोटा सा कट था, लेकिन किसी ने वो कट देखा नहीं, और पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया. दो हफ्ते तक सुधा के पैर में प्लास्टर रहा. बाद में पिता उन्हें दूसरे अस्पताल लेकर गए. जहां उनका प्लास्टर काटा गया. लेकिन तब तक प्लास्टर ऑफ पेरिस लगने की वजह से उस छोटे से कट में रिएक्शन हो चुका था. इसकी वजह से डॉक्टरों ने सुधा का पूरा पैर काटने का फैसला किया.
सुधा का सपना डांसर बनना था, लेकिन एक पैर वो खो चुकी थीं. हालांकि उसके बाद भी उन्होंने डांसर बनने का सपना नहीं छोड़ा. डॉक्टरों ने उन्हें प्रोस्थेटिक लेग लगाए, जिन्हें जयपुर फुट भी कहा जाता है. सुधा ने नकली पैर के साथ ही डांस करने का फैसला किया. एक्सीडेंट के बाद साल 1984 में सुधा एक बार फिर मंच पर पहुंचीं और जमकर डांस किया. वो कहती हैं कि उनके परिवार ने, दोस्तों ने, डॉक्टरों ने इतना साथ दिया कि वो एक पल के लिए ये भूल गई थीं कि उनका एक पैर अब नहीं है. शानदार एक्टिंग करियर डांसिंग के साथ-साथ एक्टिंग का भी तगड़ा शौक था, इसलिए फिल्मों में किस्मत आजमाई. पहली फिल्म थी मयूरी. तेलुगू फिल्म थी. डांसिंग पर ही ये फिल्म बनी थी. 1985 में आई थी. इसी फिल्म का रीमेक हिंदी में भी बना. 1986 में ‘नाचे मयूरी’ टाइटल के साथ. इसमें भी सुधा ही लीड रोल में थीं. फिल्म का गाना ‘झूम-झूम-झूम-झूम… नाच मयूरी’ काफी फेमस हुआ था. इसमें सुधा ने जबरदस्त डांस करके अपनी डांसिंग का लोहा मनवा दिया था.
फिर तो डांसिंग के साथ-साथ एक्टिंग का सफर भी बढ़िया से चल पड़ा. कई सारे टीवी सीरियल्स में सुधा ने काम किया. बहुत से सीरियल्स में निगेटिव रोल भी प्ले किया. स्टार प्लस के सीरियल ‘कहीं किसी रोज’ में रमोला सिकंद का रोल लोग भूले नहीं भूलते. नागिन सीरियल के पहले, दूसरे और तीसरे सीजन में सुधा ने निगेटिव रोल प्ले किया था. इसके अलावा स्टार प्लस के सीरियल ‘ये हैं मोहब्बतें’ में भी सुधा निगेटिव रोल में ही थीं. इन सीरियल्स के अलावा सुधा ने तुम्हारी दिशा, के स्ट्रीट पाली हिल्स, कस्तूरी जैसे सीरियल्स में भी काम किया है.

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