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पाकिस्तान में श्रीलंकाई नागरिक की बर्बर हत्या पर PM इमरान खान क्या बोले?

अब तक 118 गिरफ्तार, श्रीलंका के पीएम ने कहा-घटना दिल दहलाने वाला.

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Sialkot Lynching की हर तरफ आलोचना हो रही है. श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने इस मामले में न्याय की मांग की है. (फोटो: ट्विटर)
पाकिस्तान के सियालकोट में श्रीलंका के नागरिक की बर्बर लिंचिंग और फिर उसके शव को जला देने की घटना की श्रीलंका की संसद ने निंदा की है. श्रीलंका की संसद में सरकार और विपक्ष के नेताओं ने घटना की निंदा की और पाकिस्तान से मृतक नागरिक के  लिए न्याय देने की मांग की. साथ ही साथ पाकिस्तान में रह रहे श्रीलंका के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की. इस बीच श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने ट्वीट किया,
"पाकिस्तान में कट्टरपंथी भीड़ ने जिस तरह से प्रियंथा कुमारा पर जानलेवा और बर्बर हमला किया, उसे देखकर स्तब्ध हूं. मेरी संवेदनाएं प्रियंथा की पत्नी और उनके परिवार के साथ हैं. श्रीलंका और यहां के नागरिकों को विश्वास है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के अपने वादे पर खरे उतरेंगे."
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने उन्होंने कहा,
"सियालकोट की फैक्ट्री में भीड़ ने जिस तरह से श्रीलंकाई नागरिक पर हमला किया और फिर उसे जला दिया, ये पाकिस्तान के लिए एक शर्मनाक दिन है. मैं खुद इस पूरे घटनाक्रम की जांच को देख रहा हूं. कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. जो भी इस बर्बर हत्या के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी. गिरफ्तारियां हो रही हैं."

 

कट्टरपंथी पार्टी के समर्थकों ने की लिंचिंग यह पूरा घटनाक्रम तीन दिसंबर का है. आरोपियों का संबंध कट्टरपंथी पार्टी तहरीक एक लब्बैक पाकिस्तान से है. पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में इस पार्टी पर से प्रतिबंध हटाया है. इससे पहले इस पार्टी के समर्थकों ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में विरोध प्रदर्शन किए थे. पार्टी की मांग थी कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून मामले में फ्रांस का बहिष्कार किया जाए और उसके राजनयिक को देश से निकाल दिया जाए. भारी विरोध प्रदर्शन के बाद ही पाकिस्तान सरकार ने प्रतिबंध हटाया था और पार्टी के जेल में बंद करीब डेढ़ हजार सदस्यों को रिहा किया था.
पाकिस्तान के शीर्ष अखबारों में से एक डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए श्रीलंकाई नागरिक की उम्र 40 साल थी. श्रीलंका के कैंडी से संबंध रखने वाले कुमारा सियालकोट के वजीराबाद रोड स्थित एक गारमेंट फैक्ट्री में मैनेजर थे. रिपोर्ट के अनुसार, उनकी फैक्ट्री की दीवार पर तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान पार्टी के समर्थकों ने पोस्टर लगा दिया था. जिसमें पार्टी के एक प्रमुख नेता की तस्वीर थी और कुरान की आयतें भी छपी हुई थीं. कुमारा ने पोस्टर दीवार से हटा दिया था. ऐसा करते हुए उन्हें आसपास के मजदूरों ने देख लिया और फिर ये बात पूरे इलाके में फैल गई.
फैक्ट्री के बाहर इकट्ठा कट्टरपंथी भीड़. (फोटो: ट्विटर)
फैक्ट्री के बाहर इकट्ठा कट्टरपंथी भीड़. (फोटो: ट्विटर)

देखते ही देखते कुमारा के ऊपर ईशनिंदा के आरोप लगने लगे और उन्हें एक उन्मादी भीड़ ने घेर लिया. भीड़ हमलावर होने लगी. कुमारा के साथ काम करने वाले एक शख्स ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हुई. धार्मिक नारे लगाते हुए भीड़ ने कुमारा की हत्या कर दी और उनके शव को आग के हवाले कर दिया. इसका वीडियो भी शूट किया. इस बीच पुलिस को घटनाक्रम की जानकारी मिली और कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस फोर्स को तैनात किया गया. सौ से अधिक गिरफ्तार फिलहाल इस मामले में सियालकोट पुलिस ने 118 लोगों को गिरफ्तार किया है. पंजाब प्रांत के इंस्पेक्टर जनरल राओ सरदार अली खान ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से 13 मुख्य आरोपी हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग सीसीटीवी कैमरा फुटेज की जांच की जा रही है. इनके आधार पर और लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.
पाकिस्तान में इस समय ईशनिंदा के हजारों मामले दर्ज हैं. ज्यादातर देश के अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ दर्ज हैं. इनमें हिंदू, ईसाई, सिया और अहमदिया मुसलमान आते हैं. इनमें से अधिकतर मामलों में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है. अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले ईशनिंदा कानून का सबसे अधिक प्रयोग किया है. 'हम क्या हो गए हैं' इस बीच पाकिस्तान में भी इस बर्बरता की आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यर्ताओं से लेकर आम लोग और सेलिब्रिटी अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. एक्ट्रेस माहिरा खान ने ट्वीट किया,
"शर्मनाक! मैं बेहद गम और गुस्से में हूं. इमरान खान, आपसे उम्मीद है कि आप इस मामले में न्याय करेंगे. जवाब देंगे और हमारे देश को इस आतंक से मुक्ति दिलाएंगे."
पाकिस्तान की पत्रकार यूसरा असकरी ने ट्वीट करते हुए सवाल किया, 'हम क्या हो गए हैं.'


शान नाम के एक यूजर ने ट्वीट किया,
"वो 11 साल पहले पाकिस्तान आए थे और राजको इंडस्ट्रीज में जनरल मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे. उन्होंने पाकिस्तान की सेवा की. जितना हो सका, उतना योगदान दिया. आज उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. दुखद"

इस्लामी स्कॉलर तारिक जमील ने इस घटना की निंदा की. उन्होंने कहा कि रसूल के नाम पर की गई ये बर्बर हत्या अफसोसजनक है. उन्होंने इस्लामिक स्कॉलर्स से अपील करते हुए कहा कि वे कट्टरवाद को नियंत्रित करने में मदद करें.

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