हालांकि सरकार ये साफ संकेत भी दे रही है कि ओमिक्रॉन को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश के शीर्ष मेडिकल रिसर्च संस्थान इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि लोगों को इस नए वेरिएंट को गंभीरता से लेने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि लोगों को गैर जरूरी यात्रा और सम्मेलन का हिस्सा नहीं बनना चाहिए. साथ ही साथ त्योहारों के दौरान भी सावधानी बरतनी चाहिए. तेजी से फैल रहा है ओमिक्रॉन दूसरी तरफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन वेरिएंट के फैलने की रफ्तार डेल्टा वेरिएंट से बहुत अधिक है और ये जल्द ही इसको पीछे छोड़ देगा.

WHO के मुताबिक Omicron Variant डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले बहुत तेजी से फैल रहा है.
इस बीच हांग कांग यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च में पाया गया है कि डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले, ओमिक्रॉन वेरिएंट 70 फीसदी तेजी से फैलता है. ये बताती है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट किस तरह से श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है. हालांकि, इस स्टडी में ये भी पता चला है कि ओमिक्रॉन लोगों को गंभीर रूप से बीमार नहीं करता.
यहां साफ कर दें कि इस स्टडी का पियर रिव्यू अभी नहीं हुआ है. मतलब मेडिकल फील्ड के एक्सपर्ट्स ने इस स्टडी का मूल्यांकन नहीं किया है. इस मूल्यांकन या समीक्षा के बाद ही कोई मेडिकल रिसर्च स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े किसी जर्नल में प्रकाशित होता है.
वहीं एक दूसरी स्टडी में वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन वेरिएंट पर बूस्टर डोज के बारे में अपने निष्कर्ष को साझा किया है. अमेरिका स्थित मैसाच्यूसेट जनरल हॉस्पिटल की तरफ से की गई स्टडी में पता चला है कि बूस्टर डोज लेने से ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ जाती है. बताया गया है कि सामान्य डोज इस वेरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं हैं. इस अध्ययन के परिणाम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कई मेडिकल एक्सपर्ट कोरोना संकट से निपटने के लिए लोगों को बूस्टर डोज देने के लिए कह रहे हैं.





















