
(चार दिसंबर को हुई गोलीबारी के बाद गांववालों ने सुरक्षाबलों की गाड़ियों में आग लगा दी थी: इंडिया टुडे)
क्या हुआ था 4 दिसंबर को? नागालैंड में एक जिला है. मोन नाम से. इसी जिले में आमतौर पर तिरु और ओटिंग गांव के लोग खदान में काम करके शाम तक घर लौट जाते थे. लेकिन उस दिन 6 लोग नहीं लौटे. इनके परिवार वाले और गांव के लोग इन्हें खोजने निकले. कुछ देर बाद ओटिंग में ही एक पिकअप वैन में इन 6 लोगों के शव खून से लिथड़े हुए पड़े मिले. पहले तो कुछ समझ नहीं आया, लेकिन बाद में पता चला कि इनकी मौत सुरक्षाबलों की फायरिंग में हुई है.
इसके बाद तो बवाल मच गया. लोगों ने इकट्ठा होकर सड़क पर हंगामा करना शुरू कर दिया. भीड़ बेकाबू हो गई. सुरक्षा बलों की गाड़ियों में आग लगा दी गई. इसके बाद सुरक्षाबलों ने एक बार फिर फायरिंग कर दी जिसमें कुछ और लोगों की जान चली गई. इस पूरे मालमें में कुल 14 आम नागरिकों की मौत हुई थी. इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में बयान भी दिया था. शाह ने लोकसभा में बताया कि 'गलत पहचान' की वजह से ये घटना हुई. सेना ने संदिग्ध समझ कर फायरिंग की थी.

(फोटो क्रेडिट: संसद टीवी)
क्या है AFSPA? AFSPA यानी आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट. इसे हिंदी में 'सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून' कहते हैं. सरकार इस कानून को आधिकारिक तौर पर देश के उन हिस्सों में लागू करती है, जो अशांत होते हैं. यानी वो इलाके जहां आतंकवाद या उग्रवाद जैसे हालात हों. AFSPA जिन इलाकों में लागू हो जाता है, वहां सेना के पास ये अधिकार होता है कि वो बिना वॉरंट किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी कर सकती है.






















