इस मुकाबले से पहले श्रीकांत सिर्फ एक बार लो कीन येव से भिड़े थे. कॉमनवेल्थ गेम्स के इस मैच में श्रीकांत ने सीधे सेटों में इस खिलाड़ी के खिलाफ शानदार जीत हासिल की थी. श्रीकांत इस जीत के साथ ही इस बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी भी बन गए हैं. उनसे पहले साल 1983 में प्रकाश पादुकोण, 2019 में बी साईं प्रनीत और 2021 में में ही लक्ष्य सेन ने भी यहां मेडल जीता है.
सिल्वर मेडल के साथ खत्म हुआ किदांबी श्रीकांत का BWF वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सफर
फाइनल में सिंगापुर के खिलाड़ी ने हराया.
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किदांबी श्रीकांत. फोटो: AP/PTI
भारत के स्टार किदांबी श्रीकांत ने BWF वर्ल्ड चैम्पियनशिप फाइनल में सिल्वर मेडल जीत लिया है. किदांबी को फाइनल में सिंगापुर के लो कीन येव से हार का सामना करना पड़ा है. वर्ल्ड रैंकिंग में 15वें नंबर पर मौजूद श्रीकांत को 22वीं रैंकिंग वाले सिंगापुर के खिलाड़ी ने 15-21, 20-22 से हराया. ये मुकाबला महज़ 42 मिनट ही चल सका. लो कीन येव के खिलाफ श्रीकांत की ये पहली हार है. हालांकि इस हार के बावजूद वो पुरुषों की वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं.
इससे पहले शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में भारत की ओर से दो सितारे आपस में भिड़े थे. किदांबी के साथ युवा स्टार लक्ष्य सेन का मुकाबला हुआ. इस मैच को किदांबी ने 21-17, 14-21 और 21-17 से जीता. इस जीत के साथ ही वो BWF वर्ल्ड चैम्पियनशिप फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी भी बने थे. साल 2017 में चार सुपरसीरीज़ टाइटल जीतने वाले भारत के इस पूर्व वर्ल्ड नंबर वन खिलाड़ी ने 2017 के बाद से कोई खास कमाल नहीं किया था. वो लगातार खराब फॉर्म से जूझते रहे. लेकिन इस बड़े टूर्नामेंट में शानदार जीत के साथ किदांबी एक बार फिर से फॉर्म में लौट आए हैं. वहीं दूसरी तरफ 24 साल के लो कीन यीव ने सिंगापुर को उसका पहला मेन्स सिंगल्स का वर्ल्ड चैम्पियनशिप गोल्ड मेडल जिताया है. सिंगापुर का बैडमिंटन इतिहास बेहद खास है लेकिन इस जीत से पहले उनके पास मेंस सिंगल्स का गोल्ड मेडल नहीं था.
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इस मुकाबले से पहले श्रीकांत सिर्फ एक बार लो कीन येव से भिड़े थे. कॉमनवेल्थ गेम्स के इस मैच में श्रीकांत ने सीधे सेटों में इस खिलाड़ी के खिलाफ शानदार जीत हासिल की थी. श्रीकांत इस जीत के साथ ही इस बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी भी बन गए हैं. उनसे पहले साल 1983 में प्रकाश पादुकोण, 2019 में बी साईं प्रनीत और 2021 में में ही लक्ष्य सेन ने भी यहां मेडल जीता है.











