चुनाव आयोग को वोटिंग वाले राज्यों में कम से कम 80 पर्सेंट लोगों के लिए वैक्सीन की दोनों डोज दिलाने पर जोर देना चाहिए. भयंकर महामारी के बीच चुनाव कराने का यही एकमात्र सुरक्षित तरीका है. बाकी सब बेकार की बातें हैं. कोविड उपयुक्त व्यवहार के लिए दिशा-निर्देश का कोई पालन नहीं करता है.
mygov.in के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 13 करोड़ पांच लाख से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज जबकि करीब 7 करोड़ 69 लाख लोगों को दूसरी डोज लगी है. अलग-अलग गैर आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यूपी की जनसंख्या 22 से 24 करोड़ है. इस लिहाज से देखें तो अब तक यहां की 33 फीसदी आबादी ही पूरी तरह वैक्सीनेट हो पाई है. वहीं 3 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले पंजाब में 1.73 करोड़ से ज्यादा लोगों को पहली लग चुकी है. लेकिन डबल वैक्सीनेशन वाले लोगों का आंकड़ा एक करोड़ से भी कम है. यहां अब तक 96 लाख 70 हजार 41 लोगों को दोनों डोज लगी हैं, जो कुल आबादी का 50 फीसद भी नहीं है. उत्तराखंड जरूर इस मामले में बेहतर स्थिति में दिखता है. यहां एक करोड़ दस लाख से ज्यादा की आबादी है, जिनमें से लगभग 79 लाख को पहली और 65 लाख से ज्यादा लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं. अगले कुछ हफ्तों में अगर राज्य में वैक्सीनेशन ड्राइव को और तेज किया जाए तो यहां की 80 फीसदी आबादी का टीकाकरण होना संभव है. लेकिन गोवा और मणिपुर के आंकड़े इससे अलग हैं. डेढ़ करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या वाले गोवा में 13 लाख 16 हजार से ज्यादा लोगों को पहला और 11 लाख 17 हजार से अधिक लोगों को दूसरा टीका लगा है. वहीं 31 लाख की जनसंख्या वाले मणिपुर में 13 लाख 32 हजार से कुछ ही ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन हुआ है. डबल डोज का आंकड़ा तो 10 लाख ही है. साफ है ये दोनों राज्य भी 80 पर्सेंट लोगों के कंप्लीट वैक्सीनेशन से काफी दूर हैं. सभी राज्यों की डिटेल आप यहां देख सकते हैं.
इस बीच देशभर में वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर केंद्र सरकार नए-नए दावे कर रही है. कोलकाता में चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (CNCI) के दूसरे परिसर के उद्घाटन कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि भारत में 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है. बताया कि सिर्फ 5 दिन में डेढ़ करोड़ से ज्यादा बच्चों को वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है.














