एक था राजा और एक थी रानी. बचपन की कहानियां ऐसे ही शुरू हुआ करती थीं. कहानी का सुखद अंत हो तो कहते थे, दोनों मिल गए खतम कहानी. और दुखद अंत हो तो, दो मर गए. खतम कहानी. आज बात होगी एक ऐसे की क़िस्से की. जिसमें राजा रानी हैं. एक रियासत है. मौत का षड्यंत्र है. नागा साधु हैं. कोर्ट में चल रही धुआं धार दलीलें हैं. और एक जज है जो अपना फैसला सुनाकर वकालत को ही अलविदा कह देता है.
तारीख: जिस राजा की चिता लगाई, वो नागा साधु बनकर लौटा!
एक ऐसा मामला जिसका राम जेठमलानी जैसे दिग्गज वकील अपने लेक्चर्स में उदाहरण देते थे.
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आज हम सुनाएंगे कहानी एक कोर्ट केस की. ऐसा कोर्ट केस जिसने 16 साल तक बंगाल में हंगामा मचाए रखा. एक ऐसा मामला जिसका राम जेठमलानी जैसे दिग्गज वकील अपने लेक्चर्स में उदाहरण देते थे. जो छात्रों के लिए केस स्टडी है और बंगाल के बच्चों को जिसे दादा नानी की कहानी के तौर पर सुनाया जाता है.
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