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मोबाइल खोने के बाद आपका सबसे बड़ा डर, अब सरकार हरने जा रही है

आसान भाषा में जानिए क्या है सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर.

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एमेजॉन कंपनी ने तीन दिन की सेल के दौरान 750 करोड़ रुपये के फोन बेचने का दावा किया था.
कभी फोन चोरी हुआ है या गुमा है? दुनिया इतनी खराब हो गई है कि गुमा हुआ फोन अब कभी मिलता नहीं है. गुमे हुए फोन के मिसयूज का खतरा अलग रहता है. लेकिन अब सरकार ऐसा प्लान लाई है, जिसके बाद गुमे फोन को खोजना उसका मिसयूज रोकना संभव हो सकेगा. मतलब आपकी सबसे बड़ी चिंता सरकार ने हर ली है, या ये कहिए हरने की कोशिश कर ढ़ेर है. आज आसान भाषा में आपको इसी के बारे में बताएंगे.

अब क्या करने जा रही है सरकार?

सरकार एक रजिस्टर बनाने जा रही है. स्कूल में हाजिरी वाले रजिस्टर जैसा नहीं. पूरा डेटाबेस होगा. नाम दिया गया है, सीईआईआर माने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर. जिसमें सब फ़ोनों के IMEI नंबर दर्ज होंगे. अगर आपका फोन चोरी हुआ या गम हुआ तो आपको टेलीकॉम डिपार्टमेंट को बताना होगा. और उस IMEI नंबर वाला मोबाइल बंद हो जाएगा. ऐसा रजिस्टर बनाने का प्लान 2012 के नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी आने के बाद बना. पुणे में इसका पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया गया. इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 2019-20 के अंतरिम बजट में टेलीकॉम डिपार्टमेंट को 15 करोड़ रुपये भी दिए थे. जिसका नतीज़ा अब आना शुरू हुआ है.

ये IMEI नंबर क्या होता है?

वो वाली ट्रिक तो देखी ही होगी कि *#06# टाइप करो, तो मोबाइल पर एक नंबर आता है. जो नंबर आता है, वो IMEI यानी International Mobile Equipment Identity होती है. हर फोन का अपना यूनिक IMEI नंबर होता है. पूरी दुनिया में वैसा IMEI नंबर किसी और फोन को नहीं दिया जाता. आप सिम कार्ड बदलकर अपना नंबर तो बदल सकते हैं, लेकिन एक फोन का IMEI नंबर कभी नहीं बदला जा सकता. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर सिम का नंबर आत्मा है, तो IMEI नंबर शरीर है. सिंगल सिम वाले फोन में एक IMEI होता है, ड्यूअल वाले फोन में दो IMEI नंबर होते हैं. IMEI नंबर लाने के दो उद्देश्य थे, डिवाइस को एक पहचान देना. दूसरा, उसकी चोरी को रोकना. imei

दुनिया के हर फोन का IMEI नंबर होता है?

न, न, न. यही तो पंगा है. बहुत से नकली फोन बनते हैं, जिनमें IMEI नंबर नहीं होते. भारत में 10 साल पहले चाइनीज फोन स्मगल होकर आते थे. ये फोन खूब सस्ते दामों में मिला करते थे. लेकिन इनमें IMEI नंबर नहीं होते थे. दिक्कत से बचने के लिए 'स्पाइडर बॉक्स' नाम के सॉफ्टवेयर से इनमें IMEI नंबर डाले जाते थे. शुरू-शुरू में सरकार का ध्यान इस पर तब गया जब पुलिस को एक ही IMEI नंबर से चलते कई फोन दिखे. 1 दिसंबर 2009 से टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने बिना IMEI नंबर के फोन्स को बंद करने का फैसला लिया था. लेकिन लोग फिर भी नहीं माने किसी न किसी तरह से धोखाधड़ी की खबरें बाद में भी आती रहीं. बाद में तो ये इतना आम हो गया कि लोग यूट्यूब पर वीडियो डालकर IMEI नंबर बदलना सिखाने लगे. गाजियाबाद में पुलिस ने इसी महीने ऐसे गिरोह को पकड़ा था, जो यूट्यूब पर वीडियो देख के लूटे हुए फोन्स के IMEI नंबर बदलने लगे थे. Social media on smartphone

अब फोन गुमने पर क्या करना होगा?

ये डेटाबेस शुरू होने के बाद जब आपका फोन गुमे तो पुलिस कंप्लेन लिखाइये. तब तक टेलीकॉम डिपार्टमेंट का एक टोल फ्री नंबर भी आ जाएगा. उस पर फोन करिए. उन्हें चोरी या गुमने की सूचना दे दीजिये. वो आपका फोन ब्लैकलिस्ट में डाल देंगे. जिसके बाद उस पर कोई सिम काम नहीं करेगी. एक फायदा ये भी कि उस नंबर के IMEI नंबर को किसी दूसरे काउंटरफिट डिवाइस यानी नकली मोबाइल में भी नहीं डाला जा सकेगा. शुरुआत में इस डेटा बेस में तीन श्रेणियां रखने का प्लान है. एक व्हाइट लिस्ट, एक ग्रे लिस्ट और एक ब्लैक लिस्ट में. व्हाइटलिस्ट में नॉर्मल फोन होंगे, जो हम और आप इस्तेमाल कर रहे होंगे. ग्रे लिस्ट में वो फोन होंगे, जिन पर कोई संदेह होगा. अगर वो मानकों पर खरे नहीं उतर रहे होंगे तो उन पर नजर रखी जाएगी. बाकी ब्लैकलिस्ट होगी, जिसमें गए फोन्स को इस्तेमाल करना संभव नहीं होगा. phone image चोर-लुटेरे शातिर हो गए हैं. तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करने लगे हैं कि एक बार हाथ से गया फोन वापस मिलना बहुत मुश्किल होता है. किसी नौसिखिये के हाथ लगे तभी मिलना संभव होता है. आज कल फोन के टुकड़े-टुकड़े कर उसके पार्ट्स बिक जाते हैं. पर इस पूरी कवायद का एक फायदा ये होगा कि फोन का दुरूपयोग नहीं हो सकेगा.
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