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चुप्पेचाप बैठो, अब हाथ नहीं आएगा माल्या

माल्या तो बस एक केस है. भगोड़े पहले भी रहे हैं. भागे हुए कैसे वापस लाए जाते हैं? इसकी यहां की गई है पड़ताल.

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फोटो - thelallantop
माल्या बैंकों का 900 करोड़ रुपया लेकर इंग्लैंड निकल लिए हैं. अब उन्हें वापस भारत लाना मुश्किल लग रहा है. ऐसे बहुत सारे लोग होते हैं जो ऐसे किसी मामले में फंस जाने पर भाग लेते हैं. और ऐसे किसी भी भगोड़े को जो किसी देश में वॉन्टेड हो और भाग गया हो, उसे पकड़ के वापस ले आना कहलाता है 'प्रत्यर्पण कराना.' आइए जानते हैं क्या है प्रत्यर्पण का इतिहास? और क्या है किसी भागे हुए को वापस भारत लाने का सिस्टम? असल में भारत से भागे किसी अपराधी को भारत लाना हो तो उसे भारतीय प्रत्यर्पण कानून, 1962 के हिसाब से ही वापस लाया जा सकता है. इसमें दो तरह के समझौते होते हैं. पहले समझौते के हिसाब से कसूरवार दोनों ही देशों में अपराधी माना जाता है. दूसरे समझौते के हिसाब से अगर दो देशों में समझौता हो गया है. तो जिस देश से समझौता हुआ है वो दूसरे देश के कानून के हिसाब से ही कार्रवाई करेगा. मान लो भारत और इंग्लैंड में समझौता हुआ है तो भारत के कानून के हिसाब से ही इंग्लैंड भी भगोड़े पर कार्रवाई करेगा. भारत का 42 देशों से पहला वाला समझौता है. जिसके हिसाब से अगर भारत का कोई अपराधी जो वॉन्टेड है और ऐसे किसी देश में छिपकर बैठा है जिससे भारत का समझौता है तो ये देश उसको पकड़कर भारत को वापस कर देंगे. और ऐसे ही भारत की 9 देशों के साथ प्रत्यर्पण की व्यवस्था, यानी दूसरा वाला समझौता है. भारत 2002 से 2015 तक ऐसे 60 अपराधियों को कामयाबी से प्रत्यर्पण करवा चुका है. पर अब भी केवल इंग्लैंड में ही 131 लोगों के केस फंसे हुए हैं. अभी तक जिन देशों से सबसे ज्यादा सफल प्रत्यर्पण कराये गए हैं उनमें यूएई पहले नंबर पर है. वहां से अब तक 17 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया है. जो वहां भागकर गए लोगों का 28 फीसदी है. अमेरिका दूसरे नंबर पर है जहां से अब तक 11 लोगों को पकड़कर लाया गया है. तीसरे नंबर पर है कनाडा जहां से 4 लोग पकड़े गए हैं. साल के हिसाब से देखें तो पिछले साल यानी 2015 में सबसे ज्यादा 8 भगोड़े पकड़े गए. जिन 60 लोगों को पकड़कर लाया गया उनमें से 10 क़त्ल कर भागे हुए थे. 6 आतंकवादी थे. 5 के ऊपर साजिश करने का मामला था. 4 धोखाधड़ी करके भागे थे. 3 मुंबई बम ब्लास्ट के मुजरिम थे और 3 बच्चों का यौन शोषण कर भागे थे. पिछले 14 सालों में भारत वापस लाये गए सबसे बड़े भगोड़े हैं- 1. अबु सलेम का पुर्तगाल से प्रत्यर्पण कराया गया. सलेम 1993 के मुंबई ब्लास्ट का आरोपी था. 2. छोटा राजन का इंडोनेशिया से प्रत्यर्पण कराया गया. हत्या, फिरौती और ड्रग की तस्करी के आरोप में उसकी तलाश थी. 3. देविंदर पाल सिंह भुल्लर को जर्मनी से पकड़ा गया. 1993 के दिल्ली के कार बॉम्बिंग केस में उसकी तलाश थी. 4. 2007-08 बम ब्लास्ट केस के आरोपी यासीन भटकल का प्रत्यर्पण नेपाल से कराया गया. बड़े खिलाडी जो खुद को प्रत्यर्पण से बचा ले जाने में सफल रहे- 1. रवि शंकरन- ये इंग्लैंड में है. भारतीय सेना वॉर रूम लीकेज केस, 2006 में इसकी तलाश थी. 2. टाइगर हनीफ- इंग्लैंड में है. 1993 के गुजरात बम धमाकों को लेकर भारत को इसकी खोज थी. 3. नदीम सैफी- इंग्लैंड में छिपा हुआ है. 1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या का आरोपी था. वो भगोड़े जिनका आज भी भारत को बेसब्री से इंतज़ार है- 1. ललित मोदी- इंग्लैंड में रह रहे हैं. मनीलॉड्रिंग के केस में फंसे हुए हैं. 2. दाऊद इब्राहिम- 1993 के बम ब्लास्ट का आरोपी है. कहां है, कोई नहीं जानता. माना जाता है कि पाकिस्तान में कहीं छिपकर रह रहा है. 3. हाफिज सईद- 26/11 मुंबई धमाकों का आरोपी है और पाकिस्तान में रह रहा है. 4. डेविड कोलमैन हेडली- 26/11 मुंबई हमलों का आरोपी है. इस वक्त अमेरिका में है. प्रत्यर्पण में क्या-क्या प्रॉब्लम आती है? अगर भगौड़ा किसी ऐसे देश में भागा हो जिससे भारत की कोई प्रत्यर्पण संधि न हो. तो प्रत्यर्पण तभी हो सकता है जब दोनों देशों में बहुत दोस्ताना हो. फिर जिस देश में भगोड़ा छिपा है, उस देश के कानून उस पर लागू होते हैं. इससे भी उसके प्रत्यर्पण में प्रॉब्लम आती है.

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