अभी देश में उम्मीद का माहौल है. जब ये स्टोरी लिखी जा रही है तो भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान पाकिस्तान से वापस आने वाले हैं. वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक दिन पहले उनको शांति के प्रयास के तहत भारत को सौंपने की बात की है. ये आज का माहौल है. पिछले एक महीने में अलग अलग माहौल रोज बना है. पर अपन बात करते हैं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की. बॉलीवुड की. उड़ी- द सर्जिकल स्ट्राइक झामफाड़ चली. 45 करोड़ की लागत से बनी फिल्म ने साढ़े तीन सौ करोड़ कमाए. अब भी चल रही है. विक्की कौशल की ब्रांड वैल्यू बढ़ गई. फिल्मकारों ने एक बार फिर पब्लिक की नब्ज पकड़ ली. पता चला कि अब देशभक्ति फिल्में सिर्फ 26 जनवरी-15 अगस्त के लिए नहीं बनतीं. लोग तिरंगा, क्रांति, बॉर्डर से आगे बढ़ना चाहते हैं. और इधर महीने भर में जो रोज माहौल बदला, इसने फिल्म इंडस्ट्री के लिए फसल लहलहा दी. अगली फिल्मों के प्लॉट मिल गए. बस नाम फाइनल करना है. ये कहानी उन्हीं नामों पर है.

उड़ी फिल्म ने फिल्मकारों की देशभक्ति जगा दी है.
कौन कौन से टाइटल
पुलवामा की नेशनल ट्रैजिडी हो या सर्जिकल स्ट्राइक 2, बॉलीवुड ने सबसे कमाई करने का प्लान बना लिया है. हफिंगटन पोस्ट के मुताबिक 26 फरवरी एयरफोर्स और चुरू की रैली के लिए ही नहीं, IMPPA के लिए भी बड़ा दिन था. IMPPA यानी इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स असोसिएशन. अंधेरी, मुंबई में स्थित इसका ऑफिस खासा बिजी था. क्योंकि इसके सामने प्रोडक्शन हाउसेज के लोगों की लाइन लगी थी. तकरीबन पांच प्रोडक्शन हाउस के लोग टाइटल रजिस्टर कराने की कवायद में लगे थे. ये नाम थे सर्जिकल स्ट्राइक 2.0, पुलवामा, पुलवामा अटैक्स, बालाकोट आदि. ट्रेड मैगजीन कंप्लीट सिनेमा के मुताबिक इस दिन पुलवामा अटैक, पुलवामा: द सर्जिकल स्ट्राइक, वॉर रूम, हिंदुस्तान हमारा है, पुलवामा टेरर अटैक, द अटैक्स ऑफ पुलवामा, विद लव, फ्रॉम इंडिया और एटीएस- वन मैन शो जैसे टाइटल रजिस्टर किए गए. इनमें से कुछ टी सीरीज और अबंडेंशिया एंटरटेनमेंट ने लिए हैं.

अभिनंदन टाइटल भी रजिस्टर्ड हो गया है
टाइटल का पंगा और धंधा
अब सोचो कि इतनी जल्दी में क्यों है ये लोग? तो मसला ये है कि टाइटल रजिस्टर कराना भी एक छोटी मोटी इंडस्ट्री है. वहां IMPPA के दफ्तर में एक फार्म पर अपने इच्छित टाइटल ऑप्शन्स, ढाई सौ रुपए और 18 परसेंट जीएसटी देना पड़ता है. और टाइटल मिल जाता है. प्रोडक्शन हाउस ये टाइटल लेते हैं और उन पर फिल्में बनाते हैं. कुछ टाइटल डंप हो जाते हैं. कुछ लोग टाइटल रजिस्टर करा लेते हैं और प्रोडक्शन हाउसेज को मोटी रकम में बेचते हैं, वक्त आने पर. कुछ दिन पहले प्रीतीश नंदी और अनुराग कश्यप का पंगा हुआ था टाइटल को लेकर. प्रीतीश नंदी ने 'वुमनिया' टाइटल रजिस्टर करा लिया था. ये शब्द कायदे से पहली बार अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर के 'ओ वुमनिया' गाने में सुना गया. अनुराग कश्यप ने जब हरियाणा की लेडी शूटर्स पर फिल्म बनाने और उसका टाइटल वुमनिया रखने का सोचा तो प्रीतीश नंदी ने उनसे वो टाइटल देने के लिए 2 करोड़ रुपए मांगे. अनुराग कश्यप ने इसको एक्सटॉर्सन कहा. और अपनी फिल्म का नाम 'सांड की आंख' रख लिया. तो ये धंधा भी होता है फिलिम लाइन में.

अनुराग कश्यप और प्रितीश नंदी में हुई 'वुमनिया' को लेकर लड़ाई.
ट्रैजिडी से कमाई
'आइस एज 2' का हिंदी डब्ड वर्जन देखा था. उसमें बाढ़ की वजह से सब जीव मरने वाले होते हैं तो गिद्ध कहता है- एक अच्छी खबर है, तुममे से जितने ज्यादा लोग मरेंगे उतना हमें खाना मिलेगा. जानवरों को परेशान होते देखकर बोला "मैंने कब कहा कि खबर तुम्हारे लिए अच्छी है." ये वैसा ही है जैसे महामारी फैलने पर अस्पतालों की पौ बारह हो जाती है. अब पुलवामा हमले की ट्रैजिडी को लीजिए. हमारे 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए. उनके परिवार इस ट्रैजिडी से कभी नहीं निकल पाएंगे. जनता की भावनाएं उनके लिए कितनी कंक्रीट हैं ये तभी पता चल गया था जब एयर स्ट्राइक से सारा दुख भूलकर नाच रहे थे. पता कीजिएगा कि इन नाचने वालों में कितने लोग शहीदों के परिवारों से है. सच ये है कि दुख का अहसास वही कर सकता है जिस पर वो बीत रहा होता है. कुछ समय बाद पुलवामा अटैक के ऊपर फिल्म बनेगी. उसका अच्छा रिव्यू देने वालों को यूनेस्को सर्टिफाइड देशभक्त और निगेटिव रिव्यू देने वालों को देशद्रोही कहा जाएगा. निगेटिव कहा है, सच्चा नहीं. फिल्मों पर सच्चा रिव्यू इतना लंबा हो जाता है कि उतनी देर में आदमी फिल्म देख आए.

10 रुपए की भावना से लेकर वोट तक.
अब इससे पहले कि बॉलीवुड को लेकर आप एक्स्ट्रा निगेटिविटी से भर जाएं, ये जान लीजिए कि ट्रैजिडी से कमाई सब कर रहे हैं. वो भी जिनके लिए पायलट को वापस लाना पायलट प्रोजेक्ट है और बूथ मजबूत करना रिस्पॉन्सिबिलिटी. वो झटका चिकन वाला भी जो पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगवाकर लेग पीस पर 10 रूपए की छूट दे रहा है. वो बर्गर वाले भी एयर स्ट्राइक भुनाने के लिए 20 परसेंट डिस्काउंट पर अपना माल बेचना चाहते हैं. और वो छोटे नेता भी जो सर्जिकल स्ट्राइक के पोस्टर लगवाकर मुख्यधारा की राजनीति में आना चाहते हैं. आपकी देशभक्ति की कीमत, आपकी भावनाओं की कीमत 10 रुपए की छूट और 20 परसेंट के डिस्काउंट और 300 रुपए के टिकट पर चल रही है. अंत में इन सब सेल्समैनों से स्टैंड अप कॉमेडियन कुनाल कामरा का एक सवाल पूछना चाहूंगा. ब्रो पाकिस्तान नहीं होता तो तू देशभक्त होता क्या?





















