5 जुलाई, 2019. नरेंद्र मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेगी. और इस बजट को पेश करने का जिम्मा है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास. 5 जुलाई को बजट पेश करने के दौरान निर्मला सीतारमण वो पहली महिला होंगी, जो बजट पेश करेंगी. इससे पहले इंदिरा गांधी ने भी बजट पेश किया है. लेकिन तब वो प्रधानमंत्री थीं और वित्त विभाग भी उनके ही पास था.

निर्मला सीतारमण दूसरी ऐसी महिला हैं, जो बतौर वित्त मंत्री देश का बजट पेश कर चुकी हैं.
वो तारीख थी 28 फरवरी, 1970 की, जब इंदिरा गांधी ने देश का बजट पेश किया. इस बजट पर सबकी निगाहें थीं, क्योंकि ये चुनावी बजट होने वाला था. 1971 के मार्च में आम चुनाव होने थे और ऐसे में इंदिरा गांधी सरकार का ये आखिरी बजट था. इसी बजट में इंदिरा गांधी ने वो चर्चित नारा दिया था गरीबी हटाओ, जिसके बाद 1971 में इंदिरा गांधी को आम चुनाव में जीत मिली थी.
चुनावी बजट होने के बावजूद इंदिरा गांधी ने कुछ कड़े फैसले लिए थे. बजट 15 पन्नों का था.
# डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बढ़ाया गया था. प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ा था, इम्पोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई गई थी.
# इन्कम टैक्स बढ़ाया गया था. 40 हजार रुपये सालाना की आमदनी से ऊपर इन्कम टैक्स लगाया गया था.
# सामान्य वेल्थ टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी.
# टीवी पर ड्यूटी बढ़ाई गई थी. 20 पर्सेंट लेवी लगा दी गई थी.
# सैलरी वाले लोगों से हर महीने 250 रुपये की कटौती तय की गई थी, जो पहले 5 रुपये ही थी.
# सिगरेट पर ड्यूटी 3 फीसदी से बढ़ाकर 22 फीसदी कर दी गई थी.

5 जुलाई को जब निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था तो लोगों ने उनकी तुलना इंदिरा गांधी से किया था.
और अपने इन कामों की वजह से इंदिरा गांधी ने देश के राजस्व में बढ़ोतरी की थी. एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है. वो दौर 1970 का था और अब 2020 चल रहा है. बहुत सी चीजें बदल गई हैं. देश में आर्थिक उदारीकरण है और इस लिहाज से निर्मला सीतारमण की तुलना इंदिरा से करना किसी भी हाल में ठीक नहीं होगा.
इंदिरा गांधी का वो मंत्री जिसने संजय गांधी को कहा- मैं तुम्हारी मां का मंत्री हूं









