SIR के खिलाफ राहुल गांधी और 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है. इस पर सुनवाई होती, लेकिन उससे पहले ही कुछ ऐसा हुआ कि 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई टल गई. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 14 खामियां मिली हैं. यानी जब तक ये खामियां दूर नहीं होंगी, तब तक विपक्ष की याचिका सुनवाई के लिए लिस्टेड नहीं होगी.
राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, 200 रुपये फीस भी कम, सुनवाई फंस गई
SIR के खिलाफ राहुल गांधी और 10 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है. कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में 14 खामियां निकाली हैं. ये खामियां क्या हैं, क्या कहा गया है इस याचिका में, और किन-किन नेताओं ने इसे दायर किया है? सब जानिए.

कोर्ट रजिस्ट्री ने कहा कि याचिका में कई जरूरी दस्तावेज या तो अधूरे हैं या सही तरीके से नहीं लगाए गए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की धुंधली कॉपी दी गई है. और कोर्ट को 220 रुपए कोर्ट फीस भी कम मिली है.
इसके अलावा राहुल और खड़गे को छोड़कर बाकी 9 लोगों के वकालतनामे पर साइन भी नही हैं. वकालतनामा एक ऐसा कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई क्लाइंट अपने वकील को अदालत में अपनी तरफ से केस लड़ने, पैरवी करने और कानूनी कार्यवाही करने का लिखित अधिकार देता है.
इन सबके बीच पुराने फैसले की कॉपी नहीं लगाई गई है. याचिका में कई तकनीकी और डॉक्यूमेंट से जुड़ी भी कई खामियां हैं. रजिस्ट्री ने साफ कहा है कि धुंधले डॉक्यूमेंट और बाकी कमियों को ठीक करने के बाद ही केस को सुनवाई के लिए लिस्टेड किया जाएगा.
किन मुद्दों पर दायर की याचिका?दरअसल, राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने याचिका दाखिल की है. इसमें SIR कराने के चुनाव आयोग के फैसले को अवैध घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही याचिका में अदालत से SIR की पूरी प्रक्रिया की कानूनी वैधता की जांच करने का अनुरोध किया गया है. सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया के जरिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उनके निर्धारित उद्देश्य से हटकर किया है. कानूनी भाषा में इसे ‘कलरेबल एक्सरसाइज ऑफ़ पावर’ कहा जाता है.
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के अधिकारों, वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रोसेस और चुनाव आयोग के डिजिटल डेटाबेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग भी की गई है. इस याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग ने SIR लागू करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लिए?
याचिका में जुलाई 2026 के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलावों को गैरकानूनी बताया गया है. चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET और ERONET की स्वतंत्र तकनीकी जांच मांगी गई है. पंजाब का उदाहरण देते हुए याचिका में कहा गया है कि 13 अगस्त 2026 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जून के लगभग 2.14 करोड़ वोटर्स की तुलना में 20.66 लाख नाम कम थे.
इसके अलावा 12.80 लाख वोटरों की पुरानी लिस्ट से मैपिंग नहीं हो सकी. उनसे डॉक्यूमेंट मांगे गए. अंतिम लिस्ट 12 अक्टूबर को प्रकाशित होनी निर्धारित थी. याचिका में वैलिड वोटरों को पर्याप्त समय और प्रभावी उपाय न मिलने की आशंका जताई गई है. याचिका का दायरा SIR तक सीमित नहीं है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की वर्क प्रोसेस की भी जांच की मांग हुई है.
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याचिकाकर्ता कौन-कौन हैं?लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाकर्ताओं ने PIL दाखिल की है. इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रमुख याचिकाकर्ता, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दूसरे याचिकाकर्ता हैं.
इसके अलावा टीएमसी से सौगत रॉय, सपा से अखिलेश यादव, आरजेडी से तेजस्वी यादव, शिवसेना यूबीटी से संजय राउत, सीपीएम से एमए बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा से महुआ माजी, एनसीपी (शरद पवार गुट) से सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से ईटी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं. वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की जिम्मेदारी वकील प्रसन्ना एस. को दी गई है.
12 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था. हालांकि उन्हें 500 मीटर पहले रोक दिया गया था. इसके बाद SIR में गड़बड़ी के खिलाफ विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. यह पहली बार था, जब विपक्षी नेताओं ने किसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला.
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