महाराष्ट्र के सोलापुर में गुलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) की बीमारी से एक पेशेंट की मौत की खबर सामने आई है. यह इस बीमारी से होने वाली पहली मौत है. खबरों के मुताबिक इस बीमारी की चपेट में अभी तक 100 से भी ज़्यादा लोग आ चुके हैं. इसे लेकर अभी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
GBS बीमारी से महाराष्ट्र में पहली मौत! एक्टिव केसों की संख्या 101 पहुंची, इनमें 19 बच्चे
सोलापुर में गुलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) की बीमारी से एक पेशेंट की मौत की खबर सामने आई है. इस बीमारे की चपेट में अभी तक 100 से भी ज़्यादा लोग आ चुके हैं. 50 से 80 साल की उम्र के 23 लोग इस बीमारी की चपेट में हैं.


टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित शख्स को इन्फेक्शन पुणे में हुआ था. इसके बाद उसने सोलापुर की यात्रा की थी. पुणे में GBS के 16 पेशेंट वेंटिलेटर पर हैं. वहीं, लक्षणों वाले करीब 19 पेशेंट्स की उम्र नौ साल है. 50 से 80 साल की उम्र के 23 लोग इस बीमारी की चपेट में हैं. पुणे कलस्टर में 9 जनवरी को हॉस्पिटल में एडमिट पेशेंट को GBS पॉजिटिव पाया गया था. भारत में यह इस बीमारी का पहला केस था. अब पुणे में इस बीमारी से ग्रसित लोगों की संख्या 101 हो गई है.
गुलियन बैरे सिंड्रोम (Guillain Barre Syndrome) या GBS एक डिसऑर्डर है, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है. पुणे में 59 लोगों को गुलियन बैरे सिंड्रोम हुआ है. 59 में से 12 लोग वेंटिलेटर पर हैं. महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने एक टीम का गठन किया है, जो इस बीमारी के फैलने का कारण पता लगाएगी.
गुलियन बैरे सिंड्रोम क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर मधुकर त्रिवेदी ने. गुलियन बैरे सिंड्रोम एक रेयर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है यानी आमतौर पर इसके मामले नहीं देखे जाते हैं. गुलियन बैरे सिंड्रोम में पेरीफेरल नर्व्स ( Peripheral Nervous System) डैमेज हो जाती हैं. इस वजह से हाथ-पैरों में कमज़ोरी आने लगती है. GBS के बारे में जानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. अगर समय रहते GBS की जांच कर इलाज किया जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है.
इन वजहों से होता है
- हमारे शरीर की इम्यूनिटी जो हमें बीमारियों से बचाती है, गलती से हमारी पेरीफेरल नर्व्स पर हमला बोल देती हैं.
- पेरीफेरल नर्व्स के डैमेज होने से नर्वस सिस्टम में सूजन आ जाती है.
- इस वजह से हाथ-पैरों में कमज़ोरी आने लगती है.
- गुलियन बैरे सिंड्रोम किस कारण से होता है, उसके बारे में अभी तक ठीक से कुछ पता नहीं चल पाया है.
- लेकिन ऐसा माना जाता है कि ज्यादातर मामलों में GBS किसी वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण ही होता है.
- पिछले कुछ बरसों में कोरोना वायरस और ज़ीका वायरस (Zika virus) जैसे वायरल इंफेक्शन GBS के प्रमुख कारण रहे हैं.
- आमतौर पर कैम्पाइलोवैक्टर (Campylobacter) बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण लगने वाले दस्त के बाद गुलियन बैरे सिंड्रोम की समस्या हो सकती है.
ये हैं GBS के लक्षण
- गुलियन बैरे सिंड्रोम में अचानक से हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होने लगती है.
- आमतौर पर पहले पैरों में कमजोरी महसूस होती है फिर हाथों में भी ऐसा होता है. साथ ही कुछ मरीजों को गर्दन में भी कमजोरी महसूस होती है.
- कुछ मामलों में मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है, ऐसे में उन्हें वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ सकती है.
- GBS के लक्षण कुछ घंटों से लेकर 3-4 दिनों तक दिखाई दे सकते हैं. कई बार 1 से 2 हफ्तों तक भी ये लक्षण दिखते हैं.
- अगर समय रहते GBS का इलाज नहीं किया गया तो ये खतरनाक और जानलेवा भी हो सकता है.
दो तरीकों से होता है इलाज
- पहला तरीका है इंट्रावीनस इम्युनोग्लोबुलिन (Intravenous Immunoglobulin) या IVIG.
- दूसरा तरीका है प्लाज्माफेरेसिस (Plasmapheresis).
सही जांच के बाद ही हॉस्पिटल में इन दोनों तरीकों से मरीज का इलाज किया जाता है. इसलिए ये जरूरी है कि अगर हाथ-पैरों में कमज़ोरी महसूस हो रही है, खासकर किसी इंफेक्शन या दस्त के बाद. और कमजोरी बढ़ती ही जा रही है, तो तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं ताकि समय रहते GBS का इलाज हो सके.
(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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