कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. वहीं, दूसरी ओर उनके अपने राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में इसी मुद्दे पर प्रोटेस्ट कर रहे लोगों को पुलिस डिटेन कर रही थी. इसे लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठने लगे हैं. मामला बढ़ने पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार घिर गए, तो उन्होंने पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है. राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी पुलिस को शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट में रुकावट नहीं डालने के निर्देश दिए हैं.
कांग्रेस के सीएम दिल्ली में प्रोटेस्ट कर रहे, उधर इनकी पुलिस SIR के विरोधियों पर जुल्म कर रही
बेंगलुरु में पुलिस पर SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और पत्रकारों से बदसलूकी करने के आरोप लगे. मामला चर्चा में आने के बाद सीएम डीके शिवकुमार ने इस पर जांच रिपोर्ट मांगी है.

सोमवार, 12 अक्टूबर को लेफ्ट विंग स्टूडेंट्स और युवा संगठनों के साथ 'माई वोट, माई राइट' ग्रुप ने कर्नाटक के कई इलाकों में प्रोटेस्ट का ऐलान किया था. प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक मार्च निकालकर ज्ञापन देना था.
प्रोटेस्टर्स-पत्रकारों से कथित बदसलूकीइंडिया टुडे से जुड़े अविनाश कटील के इनपुट के मुताबिक, प्रोटेस्टर्स केआर सर्कल के पास जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें CEO ऑफिस की तरफ बढ़ने से पहले ही डिटेन कर लिया. सीनियर पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को भी पुलिस की कथित सख्ती का सामना करना पड़ा. बेंगलुरु पुलिस ने कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों को डिटेन किया.
सीनियर जर्नलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट आकार पटेल भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे. आरोप है कि पुलिसवालों ने कई प्रदर्शनकारियों को धक्का देकर बसों में बैठाया. इनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स थे. जबकि, कई पुलिसवाले सादे कपड़ों में थे.
बेंगलुरु में प्रोटेस्ट के दौरान मीडिया के लोगों के साथ भी बदसलूकी के आरोप लगे. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों को धमकाया गया और मौके से वापस चले जाने को कहा गया. तीन फोटोग्राफरों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई, जबकि वे बार-बार बता रहे थे कि वे प्रेस से हैं.
बेंगलुरु पुलिस के सेंट्रल डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अक्षय एम हकाय ने कहा कि प्रोटेस्टर्स ने बगैर इजाजत के प्रदर्शन किया था. उन्हें फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा गया, लेकिन वे नहीं माने. इसके बाद उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने संयम बरता था और पत्रकारों के साथ टकराव अनजाने में हुआ.
CM DK बोले- 'दोहरा मापदंड नहीं चलेगा'पुलिस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों और मीडिया के खिलाफ कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है. उन्होंने कहा,
"अगर फोर्स का गैर-जरूरी इस्तेमाल हुआ है या ज्यादती हुई है, तो जवाबदेही तय की जाएगी."
मंगलवार, 13 अक्टूबर को सीएम डीके शिवकुमार ने X पर पोस्ट किया,
"शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार हमारे लोकतंत्र का मूल अधिकार है. हम दिल्ली में तो अपने लिए ये अधिकार मांगें और बेंगलुरु में दूसरों को इससे रोकें, ऐसा नहीं हो सकता... कर्नाटक को भी उन्हीं लोकतांत्रिक मानकों पर खरा उतरना होगा, जिनकी हम देश के बाकी हिस्सों से उम्मीद करते हैं. कोई दोहरा मापदंड नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "मैं साफ कर देना चाहता हूं कि चुनाव आयोग से असहमति, मेरी सरकार से असहमति या मुझसे व्यक्तिगत असहमति किसी के भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को कम नहीं करती."
प्रियांक खरगे ने पुलिस को दिए निर्देशगृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी कहा कि उन्होंने पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं रोकने के निर्देश दिए हैं. 13 अक्टूबर को उन्होंने X पर लिखा,
"कल बेंगलुरु पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ जैसा बर्ताव किया, उसकी समीक्षा की जाएगी. शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतंत्र का मूल अधिकार है. इसका सम्मान किया जाना चाहिए, इसकी रक्षा की जानी चाहिए और इसे कभी दबाया नहीं जाना चाहिए. मैंने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में रुकावट ना डाली जाए."

उन्होंने आगे कहा, "हमारी जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल बनाना भी है, जहां हर नागरिक बिना किसी डर के खुलकर और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जता सके. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं है. ये ऐसा अधिकार है, जिसकी रक्षा कानून-व्यवस्था को करनी चाहिए."
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प्रोटेस्टर्स ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे वोटरों के नाम मनमाने ढंग से हटाए जा सकते हैं और वोट का अधिकार छिन सकता है. उन्होंने SIR रद्द करने, जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट बहाल करने और भविष्य में मनमाने ढंग से वोटरों के नाम हटाने की कोशिश को रोकने की मांग की. उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध जारी रहेगा.
वीडियो: ‘ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर जाएंगे’, प्रोटेस्टर्स ने दिल्ली पुलिस को दौड़ाया!













