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बिहार कांग्रेस के विधायक JDU को BJP से भी 'बड़ी' बनाने वाले हैं?

बिहार में मकर संक्रांति का त्योहार सियासी बदलाव का भी वाहक रहा है. इस दौरान गठबंधन और नेताओं के पाला बदलने की पुरानी रवायत रही है. इस बार मकर संक्रांति के दही चूड़ा भोज ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी है. पार्टी के विधायकों के पाला बदलने की खबरें आने लगी हैं.

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बिहार कांग्रेस में टूट की खबरें चलने लगी हैं (इंडिया टुडे)

सूर्य के उत्तरायण होते ही बिहार में राजनीति की ग्रह दशा बदलने लगती है. मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज से कई बार बिहार में सियासी बदलाव की पटकथा लिखी गई है. साल 2017 में राबड़ी आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में शामिल होने के बाद नीतीश कुमार एनडीए के साथ हो लिए थे. वहीं साल 2018 में जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के घर भोज में शामिल हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी लगभग महीने भर बाद पार्टी तोड़ जदयू में चले गए.

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दही-चूड़ा भोज के बहाने एक बार फिर से बिहार कांग्रेस खबरों में हैं. 12 जनवरी को पार्टी ने सदाकत आश्रम में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था. इसमें सभी छोटे बड़े नेताओं ने शिरकत की. लेकिन पार्टी के सभी 6 विधायक इस भोज से नदारद रहे. जाहिर सी बात है, खबर बननी थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें तो बाजी कांग्रेस के हाथ से फिसलती दिख रही है. पार्टी के सभी छह विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू के संपर्क में बताए जा रहे हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि ये विधायक ‘पंजा’ छोड़कर ‘तीर चलाने’ की तैयारी में हैं. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में बिना प्रतिनिधित्व के रह जाएगी. वहीं जदयू बीजेपी को पीछे छोड़कर सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी. 

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नवंबर 2025 में हुए बिहार चुनावों में एनडीए के खाते में 202 सीटें आईं. इसमें बीजेपी को 89 और जदयू को 85 सीटें मिली. वहीं महागठबंधन सिर्फ 35 सीट जीत पाया. इनमें राजद के खाते में 25 सीटें आईं. कांग्रेस 61 सीटों पर लड़कर सिर्फ 6 सीट जीत सकी. मनिहारी विधानसभा से मनोहर प्रसाद सिंह, वाल्मिकि नगर से सुरेंद्र प्रसाद, चनपटिया से अभिषेक प्रसाद, अरररिया से आबिदुर रहमान, किशनगंज से मोहम्मद कमरुल होदा और फारबिसगंज से मनोज बिस्वान कांग्रेस के टिकट से जीतने में सफल रहे.

जदूय से जुड़े एक सीनियर नेता ने बताया कि कांग्रेस विधायकों में पार्टी के कामकाज को लेकर काफी असंतोष है. उन्होंने दावा किया कि अपनी पार्टी के कामकाज से नाखुश कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में हैं और अगले कुछ दिनों में वो जदयू का दामन थाम लेंगे.

कांग्रेस में ‘ऑल इज नॉट वेल’ के संकेत पिछले कुछ दिनों से मिलने भी लगे हैं. पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पिछले कई दिनों से सभी छह विधायक संगठन से जुड़े कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं. इसकी बानगी पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित दही-चूड़ा भोज में देखने को मिली.

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने 8 जनवरी को 'मनरेगा (MGNREGA) बचाओ अभियान' के तहत पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी. लेकिन पार्टी के दो विधायक सुरेंद्र प्रसाद और अभिषेक रंजन इस बैठक से गायब रहे. पार्टी सूत्रों के मुताबिक अभिषेक रंजन तो पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं.

कांग्रेसी खेमे से जुड़े एक नेता ने माना है कि पार्टी के कुछ विधायक एनडीए नेताओं के संपर्क में हो सकते हैं. लेकिन पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं ने इन बातों को खारिज किया है. कांग्रेस विधायक दल (CLP) के पूर्व नेता शकील अहमद खान ने कहा, 

इन अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है. हमें पूरा यकीन है कि हमारे विधायक कहीं नहीं जा रहे. अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में व्यस्त होने के चलते वो लोग दही-चूड़ा भोज में नहीं आ पाए.

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी पार्टी विधायकों के पाला बदलने की खबरों को अफवाह करार दिया है. उन्होंने बताया,

 पहले भी इस तरह की खबरें चलती रही हैं. एनडीए के कुछ नेताओं में छपास की बीमारी है. इसी कारण वो ये सब बोलते रहते हैं. कांग्रेस के विधायक पार्टी के साथ हैं, वो कहीं नहीं जा रहे हैं.

अखिलेश प्रसाद भले ही पार्टी में टूट की खबरों को सिरे से खारिज कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस तोड़कर जदयू में आए एक वरिष्ठ नेता कथित तौर पर पार्टी में अपना नंबर बढ़ाने के लिए कांग्रेसी विधायकों को तोड़ने की कवायद में लगे हैं. लल्लनटॉप के पॉलिटिकल एडिटर पंकज झा ने बताया, 

नीतीश सरकार में मंत्री और पुराने कांग्रेसी रहे एक नेता कांग्रेस के विधायकों के संपर्क में हैं और सरकार का हिस्सा बनने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

बिहार में 2 फरवरी से बजट सत्र शुरू हो रहा है. लेकिन अब तक कांग्रेस पार्टी विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है. वहीं दूसरी तरफ बजट सत्र से पहले कांग्रेस में टूट की खबरें पटना के सियासी गलियारे में तैरने लगी हैं. पाला बदलने वाले विधायकों के नाम और संख्या भी बताई जाने लगी है. अब देखना होगा कि बिहार चुनाव में बुरी तरह से परास्त हुई कांग्रेस अपने विधायकों को रोक पाती है या नहीं.

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