दाल के लिए दुकानदार ने 165 रुपये ज्यादा ले लिए थे. गुजरात के अहमदाबाद का एक शख्स इसके लिए 10 साल तक मुकदमा लड़ता रहा. अब उसके संघर्ष का फल मिल गया है. कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए दुकानदार पर 50 हजार का जुर्माना ठोका है. साथ ही 165 रुपये वापस लौटाने का भी आदेश दिया है लेकिन 7 फीसदी ब्याज के साथ. यानी 10 साल की अवधि में 165 रुपये पर 7 फीसदी के हिसाब से ब्याज लगाकर दुकानदार को पैसे वापस करने होंगे.
'एक्सट्रा 165 रुपये' के खिलाफ 10 साल कोर्ट में लड़ा शख्स, दुकानदार को सबक सिखा के छोड़ा
गुजरात के अहमदाबाद में एक शख्स ने 10 सालों तक दाल पर लिए गए ज्यादा रुपयों के लिए केस लड़ा. आरोपी दुकानदार ने उनसे Maximum Retail Price ( MRP) से 165 रुपये ज्यादा लिए थे. कोर्ट का फैसला शख्स के पक्ष में आया.


दुकानदार पर केस करने वाले ग्राहक का नाम शशिकांत रावल है. इंडिया टुडे से जुड़े बृजेश दोषी की रिपोर्ट के मुताबिक, रावल ने साल 2016 में अहमदाबाद के कालूपुर में एक थोक विक्रेता मेघराज नानकराम ओम की दुकान से 5 किलो दाल खरीदी थी. पैकेट पर MRP 675 रुपये छपी थी, लेकिन दुकानदार ने रावल से 840 रुपये वसूले थे. यानी प्रति किलो दाल पर 33 रुपये ज्यादा लिए थे. लेकिन रावल एक जागरूक ग्राहक निकल गए. उन्हें कंज्यूमर अधिकारों की सब जानकारी थी.
फिर क्या था. रावल ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दुकानदार के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. मामला कंज्यूमर कोर्ट में चला गया. कोर्ट में यह पूरा मामला 10 सालों तक खिंच गया. शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि दुकानदार उपभोक्ता कल्याण कोष में 1 लाख 50 हजार रुपये जमा करे और उसे अलग से मुआवजा भी दे.
मामले की सुनवाई के दौरान दुकानदार ने अपने बचाव में दलील दी और कहा कि उसने (दुकानदार) गलती से MRP से ज्यादा कीमत वसूली थी. यह उसकी पहली गलती थी, इसलिए उसे माफी दे दी जाए और केस को रद्द कर दिया जाए.
कंज्यूमर कोर्ट में उपभोक्ता संरक्षण एवं कार्रवाई समिति के अध्यक्ष मुकेश पारिख भी रावल के साथ रहे. उन्होंने उपभोक्ता आयोग के सामने तर्क दिया कि दुकानदार ने ग्राहकों के साथ गलत और अनैतिक व्यवहार किया है. साथ ही बेलगाम मुनाफाखोरी की है. इसलिए उसे दंडित किया जाना जरूरी है.
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दोनों पक्षों का तर्क सुनने के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने रावल के पक्ष में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने दुकानदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही रावल को साल 2016 में शिकायत दर्ज करने की तिथि से 7 फीसदी इंटरेस्ट समेत वसूले गए अधिक 165 रुपये और 2 हजार रुपये का अलग से कानूनी खर्च भी देने का आदेश दिया.
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