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तीन दिन से छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज में बत्ती गुल, टॉर्च जलाकर पढ़ रहे छात्र

छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज परिसर में 3 दिन से लाइट नहीं है. बिजली गुल होने के कारण हॉस्टल में रहने वाले छात्र और स्टॉफ के परिवार को अंधेरे में दिन-रात गुजारना पड़ रहा है.

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मेडिकल कॉलेज में परेशान होते छात्र

छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पिछले 3 दिनों से बत्ती गुल है. लाइट न होने की वजह से हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. फाइनल प्रैक्टिकल एग्जाम होने के बावजूद भी मेडिकल कॉलेज में बिजली नहीं है. छात्रों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पढ़ने या फिर कहीं दूसरी जगह जाकर पढ़ने की सलाह दे दी गई. मेडिकल कॉलेज के एक स्टूडेंट ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया, 

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शनिवार (2 जुलाई) की सुबह से लाइट नहीं आ रही है. हॉस्टल और कॉलेज में लाइट आ नहीं रही है. इसके साथ ही पानी की भी दिक्कत है. पीने के पानी की भी 24 घंटे व्यवस्था नहीं है. सेकेंड ईयर छात्रों के प्रैक्टिकल भी चल रहे हैं. पूरे समय छात्र गर्मी में बैठे रहते हैं. लाइट न होने की वजह से पढ़ाई के लिए पूरा समय नहीं दे पाते हैं. 

मेडिकल कॉलेज के एक फैकल्टी मेम्बर ने नाम ना छापने की शर्त पर लल्लनटॉप को बताया कि मेंटेनेंस न होने की वजह से छात्रों के साथ-साथ मरीजों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया,

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कॉलेज में मेंटेनेंस की प्रॉब्लम काफी पुरानी है. लाइट इस प्रॉब्लम का एक पार्ट है. मेडिकल टीचर एसोसिएशन और कैंपस में रहने वाले लोग लगातार हॉस्टल और नई हॉस्पिटल बिल्डिंग से जुड़ी समस्याओं को लेकर डीन को पिछले तीन साल से अवगत करा रहे हैं लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं हैं. यहां हर चीज का बैकअप है चाहे वो पानी की मोटर हो या फिर लाइट का ट्रांसफार्मर. लेकिन हालात ये हैं कि अब बैकअप वाली चीजें भी खराब हो रही हैं और खराबी भी ऐसी की जिसे आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है.

एमबीबीएस के एक और छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर लल्लनटॉप को बताया,

मैं राजस्थान का रहना वाला हूं. यहां कोई परिचित भी नहीं है. लाइट न होने की वजह से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. ये लाइट की समस्या कोई पहली बार की नहीं है. इससे पहले भी ऐसी समस्याएं होती रही हैं. इस बार बैकअप वाला ट्रांसफार्मर भी खराब हो गया है. लाइट न होने की वजह से कैंडल, फोन टॉर्च के जरिए पढ़ाई करनी पड़ रही है. तीन दिन बाद कॉलेज ने जनरेटर चलाया वो भी कुछ घंटों के लिए और उसके बाद बंद कर दिया. हालांकि सोमवार तक लाइट सही होने का आश्वासन दिया था. लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुई है. ये भी नहीं मालूम कब तक ठीक हो पाएगी.

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कई सालों से दिक्कतों का सामना कर रहे छात्र

छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के स्टूडेंट्स और फैकल्टी की बात जानने के बाद हमने इस मसले को लेकर कॉलेज के डीन को फोन किया लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई.  खबर लिखे जाने तक उनका फोन स्विच ऑफ आ रहा था और लाइट नहीं आई थी. 

 

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