सेंसेक्स में लगातार 6 कारोबारी सत्रों में लगभग 3,000 अंकों की गिरावट आई है. इस गिरावट ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया है. कई अहम तकनीकी स्तर टूट चुके हैं . बाजार के ज्यादातर सूचकांक गिरावट दिखा रहे हैं. वैसे तो बाजारों में करेक्शन आम बात है, लेकिन जब नुकसान लगातार सत्र दर सत्र बढ़ता जाए तो कहानी बदल जाती है. बाजार में लगातार जारी हालिया इस गिरावट के बाद कई सवाल उठ रहे हैं कि बाजार में आखिर में ये क्यों हो रहा है?
सेंसेक्स 6 दिनों में 3,000 अंक कैसे गिर गया? शेयर बाजार के गिरावट का सच जान लीजिए
सेंसेक्स में लगातार 6 कारोबारी सत्रों में लगभग 3,000 अंकों की गिरावट आई है. इस गिरावट ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया है. कई अहम तकनीकी स्तर टूट चुके हैं .
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इंडिया टुडे के पत्रकार कौस्तुव दास की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले करीब एक साल तक निवेशक हर गिरावट पर खरीदारी के आदी हो चुके थे. हर करेक्शन को मजबूत घरेलू निवेश और भारत की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसे का सहारा मिला. लेकिन अब यह पैटर्न टूट गया है. जैसे-जैसे सेंसेक्स लगातार नीचे फिसलता गया और निफ्टी एक के बाद एक सपोर्ट लेवल के नीचे गया. शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स ने पोजीशन काटीं, लॉन्ग पोजीशन वाले निवेशकों ने अपना एक्सपोजर घटाया और वोलैटिलिटी बढ़ गई. एक बार अहम स्तर टूटे, तो बिकवाली अपने आप तेज होती चली गई . यह नई नकारात्मक खबरों से ज्यादा स्टॉप-लॉस और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग के कारण हुई. यह व्यवहार में आया बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है. बाजार अक्सर इसलिए नहीं गिरते कि फंडामेंटल्स अचानक बिगड़ जाते हैं, बल्कि इसलिए कि निकट भविष्य की स्थिरता पर भरोसा कमजोर पड़ जाता है.
शेयर बाजार में गिरावट क्यों जारी है?जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार का कहना है कि साफ दिख रहा है कि बाजार कमजोर हो चुका है. इसके लिए घरेलू और विदेशी दोनों कारण जिम्मेदार हैं. अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर को अनिश्चितता अब भी जारी है. वहीं जियो पोलिटिकल टेंशन जैसे कि ईरान और वेनेजुएला में तनाव बना हुआ है. इन सबने मिलकर निवेशकों की बेचैनी बढ़ाई है. इनमें से कोई एक वजह इतनी बड़ी गिरावट (3,000 अंक) के लिए जिम्मेदार नहीं है लेकिन सब मिलकर उस भरोसे को खत्म कर रही हैं, जिसके सहारे निवेशक पहले की गिरावटों में टिके रहे थे. विजयकुमार ने इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) में तेज उछाल की ओर भी इशारा किया है, जो बताता है कि बाजार अब बड़े उतार-चढ़ाव के लिए खुद को तैयार कर रहा है. ज्यादा उतार-चढ़ाव से निवेशक बाजार से ताबडतोड़ खरीदारी से बच रहे हैं. इससे बाजार गिरावट अपेक्षा से ज्यादा लंबी खिंच सकती है.
बिकवाली तकनीकी नुकसान से और बढ़ गई. जैसे ही निफ्टी 25,700, 25,600 और फिर 25,500 जैसे अहम स्तरों के नीचे गया, बाजार में गिरावट और बढ़ गई. ये स्तर सिर्फ चार्ट पर खींची गई रेखाएं नहीं हैं. ये ट्रेडर्स, फंड्स और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम के लिए संदर्भ बिंदु होते हैं. इनके टूटते ही ऑटोमैटिक सेलिंग शुरू हो जाती है. नतीजा यह रहा कि बिना किसी बड़ी खबर के भी बाजार नीचे की ओर फिसलता रहा, क्योंकि स्थिरता लौटने तक खरीदार जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं.
विदेशी निवेशक बेच रहे शेयरइंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी बीच सतर्क बने हुए हैं . वे अपने शेयर बेच रहे हैं. जब भी दुनिया के किसी हिस्से में तनाव बढ़ता है ग्लोबल फंड आमतौर पर शेयर बाजार से दूरी बनाते हैं. ईरान और वेनेजुएला में तनाव के बीच विदेशी निवेशक घरेलू बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. जब भी विदेशी निवेशक बाजार में बिकवाली करते हैं तो बड़े स्टॉक्स खासकर बड़े बैंक और इंडेक्स हैवीवेट इसकी मार सबसे ज्यादा झेलते हैं. इससे इंडेक्स और नीचे जाते हैं और सेंटिमेंट और खराब होता है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी के पहले नौ दिनों में ही, एफआईआई ने लगभग 12,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई .
कंपनियों के रिजल्ट सीजन से पहले निवेशक सतर्कअब निवेशकों का ध्यान तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों पर है. नतीजों के मौसम में अक्सर वोलैटिलिटी बढ़ती है, खासकर जब उम्मीदें ऊंची हों. निवेश प्लेटफॉर्म एनरिच मनी के सीईओ पोन्मुडी आर के मुताबिक बाजार इस समय डिफेंसिव फेज में है और निवेशक नतीजों की स्पष्टता से पहले बाजार में नया निवेश करने से बच रहे हैं. उनका कहना है कि बड़े आईटी कंपनियों और बैंकों के नतीजे निकट भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं, लेकिन तब तक सतर्कता हावी रहेगी. इससे ऐसी स्थिति बन गई है जहां बिकवाल सक्रिय हैं, लेकिन खरीदार बेहद चुनिंदा और धैर्यवान हैं.
इस बार गिरावट सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं हैं. रिपोर्ट बताती है कि बाजार की लय टूट रही है. इससे पहले बाजार में बड़ी गिरावट आती थीं लेकिन जल्दी ही खत्म हो जाती थीं. यह गिरावट लगातार बनी हुई है. यहां न तो कोई एक बड़ा झटका है और न ही घबराहट से हुआ क्रैश. इसके बजाय अनिश्चितता, तकनीकी नुकसान और सकारात्मक ट्रिगर्स की कमी से भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हुआ है. ऐसे माहौल में बाजारों के लिए संभलना मुश्किल होता है, क्योंकि सिर्फ उम्मीद से ट्रेंड नहीं पलटता.
निवेशकों को अब क्या देखना चाहिएआगे का दौर कुछ अहम बातों पर निर्भर करेगा. पहला, ये कि कंपनियों के नतीजे और इनका मुनाफा कितना भरोसा दिलाते हैं. दूसरा, क्या वोलैटिलिटी कम होती है, जिससे खरीदारों का आत्मविश्वास लौटे. तीसरा, भू-राजनीति तनाव में कब तक कमी आती है? इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कब तक बात बनती है ? इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तब तक इन बातों को लेकर कुछ स्पष्ट संकेत नहीं मिलते हैं तो बाजार सीमित दायरे रह सकता है या और गिर सकता है. निवेशकों के लिए यह समय सटीक बॉटम पकड़ने से ज्यादा अनुशासन बनाए रखने का है. पिछले 6 कारोबारी दिन याद दिलाते हैं कि बाजार सीधी रेखा में नहीं चलते. जब अनिश्चितता बढ़ती है और भरोसा कमजोर पड़ता है. इसलिए अब असली परीक्षा यह नहीं है कि बाजार कितनी तेजी से गिरा, बल्कि यह है कि वह भरोसा कितनी मजबूती से दोबारा बना पाता है.
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