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राहुल गांधी ने मोदी पर उठाए सवाल, लल्लन ने दिए जवाब

भइया बोले हैं, फिर बोले हैं, बोले, लेकिन भूकंप नहीं आया. भइया बोलते हैं तो पत्रकार अब कैमरा और माइक लेकर नहीं जाते भूकंपोमीटर लेकर जाते हैं. कहते हैं एपिसेंटर पर बैठकर नापेंगे रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता कितनी थी. कभी नहीं नाप पाते. भूकंपय नहीं आता. तो राहुल भइया दिल्ली में कांग्रेस के जन वेदना सम्मेलन में बोल रहे थे. जन वेदना के नाम से एक तो ऐसा लगता है जैसे कोई झंडू बाम लगाने बैठा है. पर नहीं लल्लन बैठा था वहां, नाक की गूजी निकाल के कुर्सी में लगा रहा था. लल्लन ऐसा करने वालों में इकलौता नहीं था. भइया के पीछे जो खड़ा था, वो भी यही कर रहा था.

जन वेदना सम्मेलन में इस कोने बैठा था लल्लन. फोटो - ट्विटर
जन वेदना सम्मेलन में इस कोने बैठा था लल्लन. फोटो – ट्विटर

राहुल बहुत बात बोले, लल्लन ने वहीं पर जवाब दिया. दलाल मीडिया ने दिखाया नहीं. यही होता है, आम आदमी की बात उठाई ही नहीं जाती. लेकिन लल्लन काहे चुप रहे लल्लन चिबिल्ला है, जो कहा था लिख लाया है आप पढ़ो.


देश के लिए रक्तदान करता एक कांग्रेसी नेता
देश के लिए रक्तदान करता एक कांग्रेसी नेता

राहुल: बीजेपी और उनके प्रधानमंत्री पूछते हैं, कांग्रेस ने क्या किया सत्तर साल में? कांग्रेस ने अपना ख़ून दिया है. मैं बीजेपी से पूछता हूं, उनके कार्यकर्ताओं ने कितना ख़ून दिया है देश के लिए?
लल्लन: बेई सुनो, छुट्टी के हैंगओवर, न्यू इयर के सेंटा! कांग्रेस के कुलबोरन. चौरासी में कहां थे? ज्यादा खून-खराबे की बात न करो, हमाई पित्ती उछलने लगती है, जांघन के नीचे गुलगुला सा होता है वहां की नसी कलबलाने लगती है. गिन्नाई छूटती है. खून-वून का बीजेपी वालों से न पूछा करो, ऐसे ही सरकार नहीं बन गई है, तुमने अपना बहाया होगा, उनने.. मुंह न खुलवाओ. पीएम गुजरात का है. वहां ब्लड बैंक चलते हैं, सारा खून बिचारे बीजेपी वालों का ही होता है, तुमको पता नहीं है गुजरात का विकास मॉडल ऐसा था कि मच्छरों के खून पीने के लिए साबरमती रिवरफ्रंट के किनारे अलग ब्लड बैंक बना था.

राहुल: मोदी ने पिछले ढाई साल में वो किया जो हमने सत्तर साल में नहीं किया. चाहे वो आरबीआई हो, चुनाव आयोग हो, न्यायपालिका हो, मोदी और आरएसएस ने इन संस्थाओं को कमज़ोर किया.
लल्लन: आं आं आं.. फस्ट हाफ तक सही कह रहे थे. सच्चाई निकल ही जाती है मुंह से, देखो मानते हो न उस आदमी ने अढ़ाई साल में तुम्हारे सत्तर साल से ज्यादा काम किया है. भले बर्बादय किया हो, उसकी स्पीड देखो, जिस काम में 70 लगे वो ढाई में कर दिया. वाह मोदी जी वाह. एक ही तो दिल होता है आदमी के शरीर में, मोदी जी कितनी बार जीतोगे? वैसे कहना क्या चाह रहे हो, आरबीआई, चुनाव आयोग, न्यायपालिका को कांग्रेस सत्तर साल में कमजोर नहीं कर पाई थी? और सुनो आरबीआई को कुछ न कहना, गांव में सरपंचपति वाला हिसाब-किताब होता है, वही हिसाब चला रहे हैं अपने लड़के. और चुनाव आयोग का क्या? मुलायम के पूत और मुलायम उसी के दरवज्जे रगड़ा खा रहे हैं. बाकी न्यायपालिका पे देखो कुछ कहना नहीं. सोल्जर और न्यायपालिका पर हमसे सुना नहीं जाता कुछ. क़ानून हाथ में ले लेंगे. यही न्यायपालिका है, बुलाइस थी नेशनल हेराल्ड में तो भगे-भगे कोरट पहुंचे थे. वो कमजोर हुई है?

राहुल : नोटबंदी का फ़ैसला मोदी का व्यक्तिगत फ़ैसला है.
लल्लन : तो का युगांडा के शिक्षा मंत्री से पूछे? गजब बात करते हो. तुम्हारा पैसा भी डूब गया क्या, अबे जेटली तक को पता नहीं था, व्यक्तिगत तो था ही. व्यक्ति ने लिया तो व्यक्तिगत ही रहेगा, वैसे जेटली की क्या कहें. जेटली को तो अब भी नहीं पता. जेटली को तो ये भी नहीं पता कि 2014 में क्या हुआ था.

राहुल: मोदी को गरीब, किसान, मज़दूरों के बीच जाने की ज़रूरत है.
लल्लन : पता-वता तो रहता है नहीं तुमई कुछ, गरीब कौन है? गरीब है बीजेपी का आम कार्यकर्ता, गरीब वो बेचारे हैं, जो टम्पो में भर के 2000 के खुल्ले ले-ले जा रहे थे पकड़े गए. किसान कौन हैं? तुम्हाय जीजा किसान हैं. वो आदमी जिसका फार्मविले पर खेत है, वो किसान है, अम्तापबच्चन किसान हैं. इनके पास जाएं मोदी? बाकी वो हल वाला किसान तो तुम्हाई कांग्रेस टाइम पे ही लटक-लुटक के छुट्टी पा गया.

राहुल : अब अच्छे दिन तभी आएंगे जब 2019 में कांग्रेस सत्ता में आएगी.
लल्लन : नाक की गूजी यहीं से गुलकी बना के फेंकेंगे, माइक पर फुरफुराते रहि जाओगे. हमारा दिमाग बहुक्खराब है ये अच्छे दिन वाला भूतियाप हमाए आगे दुबारा न करना, हम 2014 में झेले हैं आज तक उस उंगली में दर्द होता है, जिससे वोट दिया था. हमको पता है अच्छे दिन की हकीकत राहुल. दिल जलाने को ये काफी है. तुम्हाई कांग्रेस को ये तो पता नहीं रहता कि 2017 में छुट्टी मना के आओगे के नहीं, 2019 की बात न करो.

राहुल : मोदी ने कहा था हिंदुस्तान को साफ़ कर दूंगा, सबकुछ साफ़ कर दूंगा, सबको झाड़ू पकड़ा दिया, लेकिन फ़ैशन था कुछ दिन झाड़ू चला फिर ख़त्म.
लल्लन : हमको पता है, ये काहे की कुढ़न है, सही बताओ केजरीवाल ने आज का भाषण लिखा है न? उसी की कलसती है, जब झाड़ू का नाम आता है. कांग्रेस से मोदी ने गांधी ले लिया, AAP से झाडू ले ली. और कित्ता साफ़ करें मोदी. एक मोदी क्या-क्या साफ़ करे. सहारा की डायरी साफ़ कर दी. एटीएम साफ़ कर दिए, मेरी जेब साफ़ कर दी. अब का चाहते हो? ललित मोदी साफ निकल गया, माल्या साफ़ बच गया अब क्या चैये?

राहुल : झाड़ू के बाद मेक इन इंडिया आया फिर कनेक्ट इंडिया आया, फिर स्किल इंडिया फिर स्टैंड अप इंडिया और फिर कुछ दिन योगासन पर बैठ गए.
लल्लन : सुनो बेई. स्टैंड अप इंडिया कब आया. स्टार्ट अप इंडिया कब आया. आदमी से मजाक करो तो यही दिक्कत होती है वो मजाक को सीरियसली लेने लगता है. तुमको कॉमेडियन कह दिए चार आदमी, तुमने स्टैंड अप इंडिया गढ़ लिया. और भले आदमी योगासन पर बैठने दो, मोदी को. जब तक बैठे हैं, उड़ेंगे नहीं.

राहुल गांधी का आरोप सुन मजाक-मजाक में नाक बंद सुसाइड की कोशिश करते मोदी
राहुल गांधी का आरोप सुन मजाक-मजाक में नाक बंद सुसाइड की कोशिश करते मोदी

राहुल : मोदी ने योगा किया लेकिन पद्मासन ठीक से नहीं किया. जो योगा कर सकता है वो पद्मासन कर सकता है लेकिन जो पद्मासन नहीं कर सकता वो योगा नहीं कर सकता.
लल्लन : मोरे दस जनपथ के योगाचार्य, मोरे विक्रम ठाकुर. तुम कभी वर्ड प्ले के फेर में नहीं आए क्या. पद्म माने क्या होता है? माने कमल, जो कमल पे बैठ के पीएम की कुर्सी पर बैठ गया उसे तुम पद्मासन नहीं आता बता रहे हो. भाई उसने योग कर-कर पूर्ण बहुमत उठा लिया था, तुम जोड़-भाग करते रहि गए. थेथरई छोड़ो. वेदना-संवेदना के फेर में न पड़ो. लच्छन सुधार लो भला हो जाएगा.

लल्लन का बाहर फेंका जाना देखते राहुल, फोटो- ट्विटर से
लल्लन का बाहर फेंका जाना देखते राहुल, फोटो- ट्विटर से

बताना न होगा इतना कहते न कहते ही लल्लन को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उठाकर पिछले दरवाजे से बाहिर मचिक दिया और लल्लन पतलून की धूल झारते. गांधी चौराहे की सीधी बस पकड़कर घर लौट आए.


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