लासा बुखार के लक्षण और अन्य जरूरी बातें

By Shweta Singh
Publish Date: 19-02-2022

कोविड-19 की लहरें एक के बाद एक आ ही रही हैं. इस संक्रमण की रफ्तार थमी भी नहीं थी कि 'लासा बुखार' नाम की नई टेंशन ने दस्तक दे दी है.

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इस बार सबसे बड़ी चिंता ये है कि ये नॉर्मल या वायरल बुखार से थोड़ा अलग है. चूहों से फैलता है. और कोई खास लक्षण दिखाए बिना ही इससे लोग गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं. 

हाल ही मे लासा बुखार के कुछ मामले यूके में सामने आए. इन सभी की ट्रैवल हिस्ट्री अफ्रीका की रही है. ऐसे में हम आपको इस बीमारी से जुड़ी कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं.

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नाइजीरिया में सबसे पहले 1969 में लासा बुखार सामने आया था. जिससे दो नर्सों की मौत हो गई थी. ये कई पश्चिम अफ्रीकी देशों के लिए आम बुखार है. 

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इसके लक्षण में बुखार, थकान, सिरदर्द, कमजोरी जैसी परेशानियां ही होती हैं. कुछ लोगों में सांस की तकलीफ, चेहरा फूलना, ब्लीडिंग, चेस्ट पेन जैसी समस्या भी हो सकती हैं, लेकिन ये रेयर है.

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लासा बुखार किसी इनफेक्टेड चूहे के मल-मूत्र से फैलता है. कभी-कभार किसी संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकले तरल पदार्थ, आंख, मुंह नाक के संपर्क में आने से फैलता है. 

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जबतक काफी गंभीर लक्षण न हो, तब तक इसके लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते हैं. हालांकि, एक बार कोई संक्रमित हो जाए तो उसमें 1 से 3 हफ्ते बाद लक्षण दिखाई देते हैं. 

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देखा गया है कि जब लक्षण काफी गंभीर हो जाते हैं तो कुछ केस में मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो सकता है. ऐसे में लासा बुखार से जान भी जा सकती है. वहीं, इसकी सबसे आम जटिलता बहरापन है. 

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बुखार से बचाव के लिए चूहों से दूरी सबसे जरूरी है. घर पर चूहों को आने से रोकना और उन जगहों पर भी जाने से बचना चाहिए जहां चूहे हो सकते हैं. चूहे को हाथ से नहीं चूहेदानी से ही पकड़ना चाहिए.

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