सनी देओल के 8 धांसू डायलॉग्स

ये मज़दूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है! ये ताकत ख़ून-पसीने से कमाई हुई रोटी की है. मुझे किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं.

अशरफ अली! आपका पाकिस्तान ज़िंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा! बस बहुत हो गया.

इस चोट को अपने दिल-ओ-दिमाग़ पर क़ायम रखना. कल यही आंसू क्रांति का सैलाब बनकर, इस मुल्क की सारी गंदगी को बहा ले जाएंगे.

अगर अदालत में तूने कोई बद्तमीजी की तो वहीं मारूंगा. जज ऑर्डर ऑर्डर करता रहेगा और तू पिटता रहेगा.

बाप बनकर बेटी को विदा कर दीजिए, इसी में सबकी भलाई है. वरना अगर आज ये जट बिगड़ गया तो सैकड़ों को ले मरेगा.

आप शायद ये भूल रहे हैं कि ये वर्दी, ये कुर्सी, आपको हमारी सुनने के लिए मिली है. आप यहां बैठे हैं, हमारे लिए, और ये तरीका है आपका हमसे बात करने का.

भैरों सिंह, आज मरने की बात की है, दोबारा मत करना. दुनिया की तारीख़ शाहिद है कि मरकर किसी ने लड़ाई नहीं जीती. लड़ाई जीती जाती है दुश्मन को ख़तम करके.

चिल्लाओ मत, नहीं तो ये केस यहीं रफा-दफा कर दूंगा. न तारीख़ न सुनवाई, सीधा इंसाफ. वो भी ताबड़तोड़.

रोचक ख़बरों का एक
मात्र ठिकाना