जब आपस में उलझे
टीम इंडिया के
लीजेंड्स

By Praveen Nehra
Publish Date: 24-12-2021

1983 के मद्रास टेस्ट में कपिल देव ने उस वक़्त पारी घोषित कर दी जब सुनील गावस्कर 236 रनों पर खेल रहे थे. अगले साल कपिल देव को एक शॉट खेलने के लिए टीम से ड्रॉप कर दिया गया.

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कपिल का कहना था कि ये गावस्कर ने किया है, जबकि गावस्कर का कहना था कि वे सेलेक्शन मीटिंग में थे भी नहीं. फिर BCCI ने एक मीटिंग बुलाकर दोनों के बीच के मसले को सुलझाया.

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1996 में नवजोत सिंह सिद्धू इंग्लैंड का दौरा छोड़ कर वापस आ गए थे. उनका कहना था कि मोहम्मद अज़हरुद्दीन उन्हें लगातार गाली दे रहे थे.

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BCCI ने जांच के बाद निष्कर्ष निकाला कि अज़हरुद्दीन का मकसद सिद्धू का अनादर करना या उन्हें गाली देने का नहीं था, बल्कि दोस्तों को संबोधित करने का उनका एक सामान्य तरीका था. 

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सचिन तेंडुलकर ने 1999 में कप्तान बनने के बाद मोहम्मद अज़हरुद्दीन को टीम में लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि पिछले कुछ समय से अज़हर अपना 100% नहीं दे रहे थे.

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2000 में अज़हर की वापसी हुई. इस दौरान तेंडुलकर ने सीरीज में हार का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया. फिर साल के अंत में अज़हर मैच फिक्सिंग के मामले में फंस गए थे.

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2004 के पाकिस्तानी दौरे पर भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे राहुल द्रविड़ ने ऐसे समय पर पारी घोषित कर दी जब सचिन 194 पर खेल रहे थे.

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दोहरे शतक से चूकने के चलते तेंडुलकर काफी नाखुश थे. इसके बाद दोनों के बीच कोई बड़ा विवाद तो नहीं हुआ, लेकिन कुछ समय तक चुप्पी जरूर बनी रही.

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2017 में भारत के कप्तान विराट कोहली के साथ हुई झड़प के चलते अनिल कुंबले ने टीम के हेड कोच के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

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आज तक कुंबले के इस्तीफे की वजह पर कोई आधिकारिक बयान तो नहीं आया है. लेकिन माना जाता है कि टीम के चयन को लेकर कोच और कप्तान के बीच कहासुनी हो गई थी.

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