वो एक्टर जो पर्दे पर 182 बार मरा

9 जून, 1962 को आशीष का जन्म दिल्ली में हुआ. मलयाली पिता और बंगाली मां की कोख से. मां मशहूर कत्थक डांसर थीं और पिता केरल के जाने-माने थिएटर आर्टिस्ट थे.

बचपन में बड़े शैतान थे. कुछ भी करने जाते तो मां कहतीं- ‘नो आशीष’. मजाक-मजाक में बताते हैं, उन्हें ऐसा लगने लगा कि उनका नाम आशीष नहीं ‘नो आशीष’ है.

करियर शुरू हुआ कन्नड़ा फिल्म ‘आनंद’ से. गोविंद निहलानी डायरेक्टेड ‘द्रोहकाल’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. अब तक 12 भाषाओं की 200 से ज़्यादा फिल्में कर चुके हैं.

पापा का नाम गोविंद विद्यार्थी है. उनके जीवन का एक ही मंत्र था कि हमेशा सीखते रहो. इसलिए अपने नाम के आगे विद्यार्थी सरनेम लगाया जो बेटे को भी मिला.

स्ट्रिक्ट पैरेंट्स के साथ रहने की वजह से बंधन महसूस करते थे. कॉलेज के लिए घर से दूर गए. आशीष विद्यार्थी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है.

आशीष ने ज़्यादातर निगेटिव रोल किए. और विलेन को तो हर फिल्म में हीरो के हाथों मरना पड़ता है. इस चक्कर में आशीष परदे पर तकरीबन 182 बार मर चुके हैं.

एक डायरेक्टर ने तारीफ में कहा- ‘तुम कमाल के कॉमर्शियल एक्टर हो’. ये सुनकर आशीष दुखी हो गए. क्योंकि उन्हें कमर्शियल एक्टर कहलाना ठीक नहीं लगता था.

छत्तीसगढ़ में फिल्म ‘बॉलीवुड डायरी’ की शूटिंग के दौरान एक्टिंग की धुन में गहरे नदी में चले गए. क्रू को लगा परफॉर्म कर रहे हैं. पर आशीष विद्यार्थी डूब रहे थे. 

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