iPhone में नया धांसू फीचर आया, चोर बिरादरी गुस्से में अपने फोन तोड़ न डाले
Apple ने आईफोन में नया फीचर लगा दिया है. अब अगर आईफोन के अंदर कोई चोरी किया हुआ पार्ट लगा होगा तो वो काम ही नहीं करेगा. माने जो आपके आईफोन की बैटरी खराब हुई और आपने मार्केट से जाकर किसी चोरी के आईफोन की बैटरी लगवाई तो वो काम नहीं करेगी.

Apple अपने आईफोन में एक ऐसी तगड़ी चीज लेकर आया है जिसके बाद उसके फोन की चोरी काफी कम हो सकती है. अगर आपको लग रहा है कि उसने Find My iPhone को अपग्रेड किया है या लॉकडाउन मोड में दो ताले और लगा दिए तो ऐसा नहीं है. कंपनी ने मोबाइल चोरी की असली जड़ को काटने का प्रबंध किया है. बताते कैसे.
आजकल मोबाइल चोरी तो जरूर होती है, मगर चोरी हुए फोनों को मार्केट में सेल नहीं किया जाता. ऐसा इसलिए क्योंकि एंड्रॉयड और आईफोन में ट्रैकिंग बहुत तगड़ी हो गई है. स्विच ऑफ हुआ फोन भी ट्रैक हो जाता है. कई सारे फोन को स्विच ऑफ करना या उनका नेटवर्क बंद करना भी संभव नहीं है. नतीजतन, फोन चोरी होने के बाद उसके पार्ट्स को सेल किया जाता है. चोरी हुए फोन का डिस्प्ले कहीं और प्ले होता है तो रैम कहीं और रम जाती है. एप्पल ने इसी का प्रबंध किया है.
चोरी का पार्ट किसी काम नहीं आएगाApple ने आईफोन में नया फीचर लगा दिया है. अब अगर आईफोन के अंदर कोई चोरी किया हुआ पार्ट लगा होगा तो वो काम ही नहीं करेगा. माने जो आपके आईफोन की बैटरी खराब हुई और आपने मार्केट से जाकर किसी चोरी के आईफोन की बैटरी लगवाई तो वो काम नहीं करेगी. ऐसा कोई पार्ट लगाने पर फोन की स्क्रीन पर मैसेज आएगा.

मैसेज में लिखा होगा कि यह पार्ट किसी दूसरे iCloud अकाउंट से जुड़ा है. अगर इसे आपके फोन में इस्तेमाल करना है तो उसका आईडी और पासवर्ड लगाओ. यहां एक बात समझ लीजिए. ऐसा कुछ तभी होगा जब लगाया हुआ पार्ट किसी चोरी के फोन का होगा. कंपनी के आधिकारिक सर्विस सेंटर से पार्ट बदलवाने पर ऐसा नहीं होगा. इसके साथ में, अगर पार्ट किसी वैध सोर्स से लिया गया है तब भी दिक्कत नहीं आएगी. एप्पल के लिए ऐसा करना कोई मुश्किल काम था भी नहीं. बस सारे पार्ट्स का डेटा बेस या कहें उनका नंबर सर्वर में अपलोड ही तो करना था.
माने जो आपने किसी भी फर्जी दुकान से कोई पार्ट लगवाया तो फोन उसको नहीं पहचानेगा. सर्विस सेंटर से लगा तो उस पार्ट की नई पहचान आपके आईफोन से करवा दी जाएगी. जाहिर सी बात है कि ऐसा होने से चोरी हुए आईफोन के पार्ट किसी काम नहीं आएंगे. मगर एक दुख है.
Android में नहीं होने वालाएप्पल ऐसा इसलिए कर पाया है क्योंकि उसका पूरा सिस्टम उसके हाथ में है. सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर पर उसका नियंत्रण है. पार्ट्स कहीं भी बने, कोई भी बनाए, उसका लेखा-जोखा उसके पास होता है. जबकि एंड्रॉयड में सबका अपना सिस्टम है. गूगल सिर्फ एंड्रॉयड का लाइसेंस देता है. एक तरह से कहें तो शरीर भले एक हो, कपड़े अलग-अलग हैं. ट्रैकिंग आसान नहीं. मगर जो कभी एंड्रॉयड ने भी अपना क्लोज इकोसिस्टम बना लिया तो इधर भी मामला सेट हो जाएगा.
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