अपना स्मार्टफोन रोज स्विच ऑफ कर रीस्टार्ट करिए, कुछ दिन बाद हमें 'थैंक्यू' बोलेंगे
अपने फोन को रोजाना रीस्टार्ट करने (Reasons to Restart smartphone on a Regular Basis) से बेकार का डेटा साफ हो जाता है और रैम खाली हो जाती है, जिससे फोन धीमा होने और बग आने से बचता है.

अच्छे से याद करके बताना कि आखिरी बार आपने कब अपना फोन रीस्टार्ट किया था. सच्ची-सच्ची बताना. नहीं याद आया ना, क्योंकि हम और आप आजकल फोन को रीस्टार्ट करना भूल गए हैं. फोन रीस्टार्ट तभी होता है जब बैटरी पूरी तरह खत्म हो गई हो या फिर किसी और वजह से फोन को स्विच ऑफ करना पड़े.
लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि रीस्टार्ट कितना (Reasons to Restart smartphone on a Regular Basis) जरूरी होता है. बोले तो रीस्टार्ट की कीमत तुम क्या जानो कखग बाबू. फोन की सेहत का राज होता है रीस्टार्ट. जंक फ़ाइलों का काल होता है रीस्टार्ट.
रीस्टार्ट से सिर्फ फायदे होते हैंरीस्टार्ट के फायदे जानने के लिए हम आपको ऐसा नहीं करने के घाटे बता देते हैं. बाकी आपको खुद ही समझ आ जाएगा. चलते-चलते फोन स्लो हो जाता है. बैकग्राउन्ड में ऐप्स अपना ग्राउन्ड बढ़ाते रहते हैं. टेंपरेरी फाइल्स का फैलाव स्टोरेज पर बढ़ता जाता है. इसकी वजह से रैम पर लोड बढ़ता जाता है. ऐप्स की क्रैश लैंडिंग होने लगती है.
दरससल फोन के अंदर जंक और डेड फ़ाइलें जमा होती रहती हैं. कुकीज इकट्ठे होते रहते हैं. वैसे तो ये फ़ाइलें हमारी कल्पना से भी छोटी होती हैं, मगर जब ये लाखों-करोड़ों में इकट्ठा हो जाती हैं तो डिवाइस की मेमोरी में अपने लिए जगह बनाती हैं.
ऐप्स अचानक से हिचकी लेने लगते हैं बोले तो ग्लिच आ जाता है. बैटरी अचानक से फुर्र होने लगती है. वैसे तो आजकल डिवाइस बहुत स्मार्ट हो चले. ऐप्स इस्तेमाल में नहीं तो उसको हाइबरनेशन में डाल देते हैं. मगर हाइबरनेशन भी एक किस्म की नींद है, भले गहरी ही सही. कुछ ना कुछ बैटरी पर असर डालती है.
सबसे जरूरी बात, सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट ढंग से इंस्टॉल नहीं हो पाते. ये प्रोसेस तो आपने खुद नोटिस किया होगा. जब भी कोई नया ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट आता है या कंपनी सिक्योरिटी पैच पुश करती है तो सिस्टम रीस्टार्ट मांगता है. मगर ये प्रोसेस लगातार चलता है. ऐसे में एक रीस्टार्ट सब कुछ ढंग से इंस्टॉल कर देता है. ‘प्रफुल्ल मैं थक गया’ क्योंकि लिस्ट लंबी है.

इसलिए अपने डिवाइस मतलब फोन और लैपटॉप को रीस्टार्ट करने की आदत डालिए. दिन में एक बार आपने डिवाइस को रीस्टार्ट कीजिए. ये एकदम गहरी नींद जैसा असर करता है. एकदम वैसे ही जैसे हमारे दिमाग में होता है. कितना कुछ भरा होता है. जैसे एक नींद हमें फ्रेश और खाली कर देती है, वैसे ही रीस्टार्ट डिवाइस की मेमोरी को खाली करता है. वैसे रीस्टार्ट की पूरी ताकत जाननी है तो गौरी भईया से पूछ लीजिए. कौन गौरी भईया. अरे 12th Fail वाले. पूरी फिल्म इसी शब्द के दायरे में घूमती है.
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